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क्या सिंधिया की राह पर चल पड़े हैं मिलिंद देवड़ा

कांग्रेस का भूतकाल चाहे जो भी रहा हो, उसका वर्तमान तो सही नहीं है और भविष्य के बारे में भला कौन बात करे। 2014 के बाद कांग्रेस लगातार खाती नजर आ रही है और राहुल गांधी के अधिकतर युवा साथी या तो नाराज चल रहे हैं या फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर चलने को तैयार हैं। मुंबई के युवा कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा भी भगवाधारी हो जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
    Akhilesh Akhil    |    29 Jun 2020  |  06:15 PM

कहावत है कि नेचर और सिग्नेचर नहीं बदलता लेकिन राजनीति में ऐसा संभव नहीं। यहां नेचर भी बदलता है और सिग्नेचर भी। सालों तक एक पार्टी की चादर ओढ़ने वाले लोग पालक झपकते ही दूसरी पार्टी का अंगवस्त्र धारण कर लेते हैं। फिर दूसरी पार्टी में जाकर अपनी मातृ पार्टी पर हमला भी करते हैं। उसकी नीतियों को देश हित से परे मानते हैं। लोग भौंचक होकर उस नेता को देखते रहते हैं कि यह अभी सच बोल रहा है या तब सच बोल रहा था। और जब यह अब सच बोल रहा है तब इतने सालों से उस पार्टी में क्यों था ? ऐसे बहुत सारे सवाल उठ सकते हैं। राजनीति अगर निर्लज्ज है तो ऐसे नेता उसकी बानगी भर हो सकते हैं। कहानी ये है कि कांग्रेस के युवा नेता मिलिंद देवड़ा इन दिनों मोदी सरकार के सपोर्ट में खड़े हो गए हैं। पिछले कुछ समय से हाशिये  पर चल रहे मिलिंद देवड़ा ने चीन संग तनाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में बढ़े आरोप-प्रत्यारोप के बीच ट्विटर पर लिखा है "यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब चीन के अतिक्रमण के खिलाफ राष्ट्रीय आवाज एक होनी चाहिए, तब उसकी जगह राजनीतिक कीचड़बाजी हो रही है। हम दुनिया में तमाशा बन गए हैं। चीन के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है।"  बता दें कि पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार और फिर कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा के बयान से कांग्रेस अपनों के बीच ही घिर गई है। शरद पवार ने चीनी मोर्चे पर सरकार का साथ देने वाला बयान देते हुए कहा कि लद्दाख की घटना संवेदनशील है और इसे सरकार की नाकामी नहीं कह सकते। इसके बाद कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ाने वाला बयान दे दिया।

Main
Points
अपने ही नेता के बयान से बढ़ी कांग्रेस की परेशानी
मिलिंद देवड़ा ने चीन विवाद पर कांग्रेस की आलोचना की
पीएम मोदी के कामों का समर्थन करते रहे हैं देवड़ा
सिंधिया की राह जा सकते हैं देवड़ा

देवड़ा करते रहे मोदी सरकारी के काम  की प्रशंसा

ऐसा नहीं है कि देवड़ा ने पहली दफा इस तरह के बयान दिए हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद जब विपक्ष की ओर से पुनर्गठन बिल का लगातार विरोध हो रहा था, उस वक्त भी मिलिंद देवड़ा ने कांग्रेस को नसीहत दे दी थी। उन्होंने कहा था कि पार्टियों को अपनी विचारधारा से अलग हटकर इस पर बहस करनी चाहिए कि भारत की संप्रभुता और संघवाद, जम्मू-कश्मीर में शांति, कश्मीरी युवाओं को नौकरी और कश्मीरी पंडितों के न्याय के लिए बेहतर क्या है।

इसके अलावा अमेरिका में हुए हाउडी मोदी कार्यक्रम को लेकर जब कांग्रेस मोदी सरकार पर निशाना साध रही थी तो उस वक्त भी देवड़ा सरकार के समर्थन में नजर आए थे। उन्होंने कहा था कि ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री का भाषण भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी को दर्शाता है। डोनाल्ड ट्रंप की मेहमाननवाजी और भारतीय-अमेरिकियों के योगदान को स्वीकारना गर्व की बात है।

तो क्या देवड़ा भी सिंधिया की राह पर जाने को तैयार हैं

राजनीति में कुछ भी संभव है, जिसकी चर्चा ऊपर की जा चुकी है। सच यही है कि इधर कुछ समय से कांग्रेस के कई युवा नेता अपने राजनीतिक भविष्य के लिए विकल्प की तलाश कर रहे हैं। इसमें संजय निरूपम ,सचिन पायलट, अदिति सिंह और मिलिंद देवड़ा जैसे और भी नाम हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़ भाजपा के साथ चले गए। अब मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के कांग्रेस छोड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। काफी दिनों से देवड़ा खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस में उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार की भागीदारी के बावजूद उन्हें मुंबई की राजनीति में अहम भूमिका निभाने के बाद भी जगह नहीं मिली। जिसके बाद पिछले कुछ महीनों से उनका रवैया बदला-बदला लग रहा है।

आपातकाल को लेकर भी पार्टी की नीतियों पर उठाये सवाल

बीते दिनों आपातकाल को लेकर भी उन्होंने एक ट्वीट किया था ''आपात काल हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र का जब-जब परीक्षण किया जाता है, तब-तब वो पूरी ताकत से वापस लड़ता है। यह राजनीतिक पार्टियों पर भी लागू होता है। लोकतांत्रिक संगठन चुनौतियों से बेहतर तरीके से पार पा सके। लोकतंत्र निरंतर कार्य है, जिसमें प्रतिबद्धता, बलिदान और ईमानदार आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता होती है।'' दरअसल, कांग्रेस नेता ने आत्मनिरीक्षण की बात करके अपनी पार्टी की नीतियों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

देवड़ा की परेशानी

गौरतलब है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता मिलिंद देवड़ा 2004 से 2014 तक दो बार सांसद रहे हैं। उन्होंने दक्षिण मुम्बई संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व किया है। मिलिंद देवड़ा ने मनमोहन सिंह सरकार के दूसरे कार्यकाल के आखिरी तीन सालों के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली थी। साल 2014 में इस सीट से शिवसेना के अरविंद गनपत सावंत से देवड़ा हार गए। फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में भी देवड़ा की हार गनपत से ही हुई। माना जा रहा है कि अब देवड़ा को यह सीट आगामी चुनाव में शायद ही लड़ने को मिले क्योंकि महाराष्ट्र मेंशिवसेना ,कांग्रेस और एनसीपी की सरकार है। ऐसे में अगले चुनाव में यह सीट फिर से शिवसेना को ही जा सकती है। ऐसे में देवड़ा के सामने भविष्य का संकट भी है। ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि देवड़ा कोई बड़ा कदम उठाते हुए सिंधिया की राह पकड़ सकते हैं।

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