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घर वापसी से घर-घर पहुंच रहा कोरोना का खतरा! कोरोना संक्रमण अब शहरों से गांव की तरफ शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। जैसे -जैसे प्रवासी मजदूर शहर से गांव की तरफ लौट रहें हैं गांव में कोरोना का संताप बढ़ता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में बिहार ,झारखंड और यूपी के गांव जिस तरह से बीमार हुए हैं उससे लग रहा है कि आने वाला कल और भयावह होगा।
    PB Desk    |    22 May 2020  |  06:13 PM

जैसे जैसे  बड़े-बड़े शहरों से गांव औऱ कस्बों की ओर प्रवासी मजदूर पलायन कर रहे हैं,कोरोना का दंश बढ़ता जा रहा है। पहले कोरोना का प्रभाव ज्यादादर शहरी इलाके में ही देखने को मिल रहे थे लेकिन प्रवासियों की घर वापसी ने एक नया बखेरा खड़ा कर दिया है। श्रमिकों को उनके घर ले जाने के लिए अब बड़े स्तर पर श्रमिक ट्रेन चलाई जा रही है। श्रमिक घर पहुँच रहे हैं और बाद में वहाँ कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। हालात ये है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के जो जिले कुछ दिनों पहले ग्रीन जोन में थे वो रेड जोन में शामिल हो गए हैं। ऐसे में कोरोना के खिलाफ जंग जीतने में कोरोनावॉरियर्स के लिए और चैलेजिंग होता जा रहा है।

Main
Points
लॉकडाउन में छूट दे रहा खतरे को निमंत्रण
मजदूरों के साथ गांव-गांव पहुंच रहा है कोरोना वायरस
यूपी, बिहार के कई जिलों में बढ़ा कोरोना मीटर का ग्राफ

गांव में बढे कोरोना

बिहार में कोरोना संक्रमण के करीब 19 सौ से अधिक मामले हैं। पिछले 24 घंटे में अब तक सबसे ज्यादा  274 मामले सामने आए हैं। बिहार के 19 सौ कोरोना केसों में से करीब एक हजार कोरोना पॉजिटिव प्रवासी मजदूर हैं। इनमें से करीब 296 मजदूर दिल्ली , महाराष्ट्र से करीब 253 और गुजरात से करीब 180 मजदूर बिहार लौटे थे। इसके अलावा हरियाणा और राजस्थान से 100 से अधिक संक्रमण के साथ मजदूर लौटे हैं । यानी बिहार में 55 फीसदी मामले पलायन के वजह से बढ़े हैं।

यूपी के गांव कोरोना से भयभीत 

शहरों से सबसे अधिक प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश लौटें हैं। जानकारी के मुताबिक यूपी के लिए 1100 स्पेशल ट्रेनों और बसों के जरिए अभी तक 16 लाख से ज्यादा मजदूर दूसरे राज्यों से यूपी के अलग अलग इलाकों में पहुंचे चुके हैं और उनके साथ यूपी के कई इलाकों में कोरोना का वायरस भी पहुंच गया है। सबसे डरावनी तस्वीर बाराबंकी की आई। बारांबकी में 15 और 16 मई को 245 लोगों का टेस्ट कराया गया जिसमें से 95 कोरोना पॉजिटिव निकले।  इसमें में से 49 वो प्रवासी हैं जो अलग अलग राज्यों से बाराबंकी पहुंचे। पिछले गुरुवार को बाराबंकी में 9 नए केस सामने आए जिसमें से 8 मुंबई से लौटे थे और एक जयपुर से वापस आया था । जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में अकेले बाराबंकी में करीब 20 हजार प्रवासी मजदूर लौटे हैं और करीब 1100 गांव में इनकी  निगरानी के लिए बाकायदा निगरानी समिति भी बनाई गई है। हर घर के आगे होम क्वारंटीन का पोस्टर भी लगाया गया है।

मजदूरों के साथ गांव-गांव पहुंचा कोरोना

बाराबंकी ही नहीं, उत्तर प्रदेश के कई और ऐसे जिले हैं जहां प्रवासी मजदूरों के घर वापस लौटने की  वजह से कोरोना का ग्राफ बढ़ा है। यूपी के सिद्धार्थनगर में 63 कोरोना पॉजिटिव मामले पाए गए  हैं और सभी प्रवासी मजदूर हैं। इसी तरह जौनपुर में 47 मजदूरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।  रामपुर में 45 मजदूरों को कोरोना संक्रमित होने का मामला सामने आया है, तो वहीं बहराइच में 42 में से 41 कोरोना पॉजिटिव मरीज़ प्रवासी मजदूर हैं।लखीमपुर में 35 कोरोना पॉजिटिव मामलों में से 34 प्रवासी मजदूर हैं। आजमगढ और बलरामपुर में तीस-तीस मजदूरों को कोरोना हुआ। वारासणी में 28 मजदूर कोरोना की चपेट में आए जबकि संभल में 27, गोंडा में 24, हरदोई में 20 मजदूर कोरोना लेकर वापस लौटे हैं ।

कई और राज्यों के गांव भी प्रभावित 

बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा मजदूरों की घर वापसी से दूसरे राज्यों में भी कोरोना का खतरा बढ गया है। राजस्थान की बात करें तो यहां कोरोना संक्रमण के करीब 6 हजार से ज्यादा मामले हैं और इनमें से करीब 11 सौ कोरोना पॉजिटिव प्रवासी मजदूर हैं। मध्यप्रदेश में 58 सौ से ज्यादा संक्रमण के केस हैं जिनमें से 400 प्रवासी मजदूर हैं। लॉकडाउन के दौरान छूट और मजदूरों के अपने गृह राज्य पलायन की  वजह से कोरोना का ग्राफ उन राज्यों में भी बढ़ रहा है जहां अभी तक कई ग्रीन जोन थे, जो अब ऑरेंज और रेड जोन में बदलने लगे हैं।

इसी प्रकार झारखंड में कोरोना वायरस के 281 में से 130 मरीज प्रवासी मजदूर हैं। छत्तीसगढ़ में कोरोना के 126 केस में से 62 कोरोना के मरीज दूसरे राज्यों से घर लौटे प्रवासी मजदूर ही हैं। इसी तरह हिमाचल में कोरोना के 140 से ज्यादा केस हैं,इनमें से 79 केस सिर्फ प्रवासी मजदूरों हैं।

बस और ट्रेन के जरिए गृह राज्य पहुंचे प्रवासी मजदूरों को ट्रैक करना और उन्हें क्वारंटीन सेंटरों में पहुंचाना तो आसान है लेकिन प्रशासन के लिए सबसे बड़े सिरदर्द वो प्रवासी बने हैं जो पैदल या फिर साइकिल से अपने अपने गांव पहुंचे हैं। ऐसे मामलों से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण को खत्म करना है तो सरकार को कुछ ऐसा करना होगा जिससे  बड़े शहरों में रहने वाले बिहार, यूपी, मध्यप्रदेश, जैसे अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूरों का डर खत्म हो सके और उनका पलायन रूक सके।

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