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अलगाववादी नेता गिलानी ने क्यों दिया हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा दे दिया है। एक आडियो मैसेज जारी करते हुए गिलानी ने कहा कि उन्होंने अपने फैसले के बारे में सभी को बता दिया है। उन्होंने कहा कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मौजूदा हालात को देखते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया है।
    PB Desk    |    29 Jun 2020  |  07:10 PM

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उस धड़े से अलग होने की सोमवार को घोषणा की जिसका गठन उन्होंने 2003 में किया था। मीडिया के लिए जारी चार पंक्ति के लेटर और एक ऑडियो संदेश में, 90 वर्षीय नेता के प्रवक्ता ने कहा, ''गिलानी ने हु्र्रियत कॉन्फ्रेंस फोरम से पूरी तरह से अलग होने की घोषणा की है।'' गिलानी ने संगठन के सभी घटकों को विस्तृत पत्र लिखते हए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस छोड़ने के अपने फैसले के पीछे के कारण बताए हैं। उन्हें इस संगठन का आजीवन प्रमुख नामित किया गया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के सदस्यों की वर्तमान की गतिविधियों के विभिन्न आरोपों को लेकर गठबंधन जांच कर रहा है।

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Points
अलगाववादी नेता गिलानी ने दिया इस्तीफा
2003 से गिलानी हुर्रियत के नेता थे
गिलानी कश्मीर विरोधी गतिविधियों में लगे रहे
गिलानी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं

गिलानी का पत्र

गिलानी ने अपने दो पन्ने के पत्र में कहा, ''इन प्रतिनिधियों की गतिविधियां अब वहां (पीओके) सरकार में शामिल होने के लिए विधानसभाओं और मंत्रालयों तक पहुंच बनाने को लेकर सीमित है। कुछ सदस्यों को बर्खास्त कर दिया गया जबकि अन्य ने अपनी खुद की बैठकों का आयोजन शुरू कर दिया। इन गतिविधियों को आपने (घटकों ने) यहां बैठक कर उनके निर्णयों को समर्थन देकर बढ़ावा दिया है।'' उन्होंने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द करने और पूर्व के राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के बाद हुर्रियत सदस्यों की निष्क्रियता की ओर इशारा किया।

विवादों में रहे अली शाह गिलानी

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी हमेशा विवादों में रहे हैं।  साल 2014 में उन्होंने कहा था कि कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। गिलानी और कुछ दूसरे हुरियत नेताओं के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने लश्कर-ए-तैयबा से कथित तौर पर फंड लेने पर मामले में जांच भी की थी. गिलानी पर आरोप था कि उन्‍होंने जम्मू एवं कश्मीर में विध्‍वसंक गतिविधियों के लिए ये पैसे लिए।

जांच एजेंसियों के रडार पर थे गिलानी

माना जा रहा है कि गिलानी जांच एजेंसियों के डर से हुर्रियत से इस्तीफा दिया है। पिछले साल अप्रैल में गिलानी के खिलाफ आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की थी। उनके दिल्ली स्थित फ्लैट को जब्त कर लिया गया।  गिलानी का ये आवास दिल्‍ली के मालवीय नगर स्थित खिड़की एक्‍सटेंशन में है। इनकम टैक्स का आरोप है कि गिलानी ने 1996-97 और फिर 2001-02 के बीच कोई टैक्स नहीं भरा। आईटी डिपार्टमेंट के मुताबिक गिलानी पर 3.62 करोड़ से ज़्यादा का टैक्स बकाया था। साल 2018 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सैयद अली शाह गिलानी पर 14.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। करीब 6.88 लाख रुपये कुर्क किए गए थे। गिलानी पर अवैध तरीके से विदेशी मुद्रा रखने का आरोप था।  हालांकि 90 वर्षीय गिलानी की तबियत ख़राब होने की ख़बरें भी बराबर आती रही हैं लेकिन जानकार मान रहे हैं कि क़ानूनी दावपेंच से परेशान गिलानी ने इस्तीफा देने में ही भलाई समझी है।

अलगाववादी संगठनों का मंच हुर्रियत

आपको जानकारी हो कि आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस कश्मीर में सक्रिय सभी छाेटे बड़े अलगाववादी संगठनों का एक मंच है। इसका गठन 1990 के दशक में कश्मीर में जारी आतंकी हिंसा और अलगाववादी सियासत को संयुक्त रूप से एक राजनीतिक मंच प्रदान करने के इरादे से किया गया था। कश्मीर में 1990 की दशक की शुरुआत में सक्रिय सभी स्थानीय आतंकी संगठन प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से किसी न किसी अलगाववादी संगठन से जुड़े थे।

गिलानी को 2003 में हुर्रियत की बागडोर मिली थी

 गिलानी को  2003 में घटक दलों ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का शासन संभालने के लिए मजबूर किया था और बाद में उन्हें आजीवन इसका चेयरमैन बना दिया। तब से गिलानी इस पद पर बैठे थे। गिलानी ने घटक दलों को कहा, ''अनुशासनहीनता और अन्य खामियों को आपने नजरअंदाज किया और इतने वर्षों में भी आपने जिम्मेदारी तय करने की मजबूत व्यवस्था नहीं बनाई लेकिन अब आपने सारी हदें पार कर दीं हैं और नेतृत्व के खिलाफ बगावत पर उतर आएं हैं।'' हालांकि खबर ये भी है घटक दल पिछले काफी समय से गिलानी का विरोध कर रहे थे। घातक दलों का मानना था कि पिछले कुछ समय से गिलानी कश्मीर को अलग करने की कोई बड़ा मुहिम चलाने में असफल रहे।

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