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विदेशी निवेश पर भारत को मिल सकती है अच्छी खबर, कोरोना के चलते बिगड़ी अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा।

कोरोना की मार झेल रहे दुनियाभर की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। चीन से 1000 विदेशी कंपनियां अपना निवेश हटाने पर अड़ गईं हैं, इन में से लगभग 300 कंपनियां भारत में निवेश करने को राजी हो गई हैं जिसके चलते चीन बौखलाने लगा है।

Suyash Tripathi
Suyash Tripathi | 21 Apr, 2020 | 4:12 pm

कोरोना वैश्विक महामारी ने दुनियाभर में जन-जीवन को पूरी तरह अस्त व्यस्त कर दिया है। इसकी चपेट में दुनियाभर के करीब 23 लाख अभी तक आ चुके हैं। दुनियाभर के देशों की अर्थव्यवस्था कोरोना के कारण चरमरा सी गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी कोरोना का खासा असर पड़ा है। कोरोना की मार से चीनी अर्थव्यवस्था भी धीमी पड़ गई है, लेकिन चीन के लिए आर्थिक संकट से उबरने का रास्ता मीलों तक आसान नहीं नजर आ रहा है। लगभग 1000 विदेशी कंपनियां चीन में अपने निवेश को छोड़ने का मन बना रहीं हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इनमें से करीब 300 कंपनियां भारत में निवेश करने का मन बना चुकी हैं। भारत सरकार से भी लगातार यह कंपनियां मेल-जोल बढ़ा रही हैं।

Main
Points
चीन की अर्थव्यवस्था पर लग सकती है चोट
चीन से 1000 विदेशी कंपनियां वापस ले सकती हैं निवेश
1000 कंपनियों में से 300 कंपनियां भारत में निवेश करने को राजी
विदेशी कंपनियां भारत में करेंगी मैन्युफैक्चरिंग
निवेश से रोजगार तो बढ़ेगा ही, अर्थव्यवस्था भी होगी मजबूत

चीन की अर्थव्यवस्था पर असर

चीन में कोरोना की वजह से अर्थव्यवस्था पर खासा असर पड़ा है, जिसके चलते चीन से विदेशी कंपनियां अपने निवेश और मैन्युफैक्चरिंग यूनिटस् हटाने का मन बना चुकी हैं। चीन में पिछले साल रिकॉर्ड 5.8% विदेशी निवेश के दर में वृद्धि आंकी गई, जो लगभग 136.71 बिलियन यूएस डॉलर थी। इस आंकड़े से साफ समझा जा सकता है कि चीन की नेट अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा एफडीआई यानी विदेशी निवेश पर निर्भर है। अब ऐसे में 1000 के करीब कंपनियों का चीन को छोड़ना चीन की अर्थव्यवस्था के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत

मिल रही जानकारी के मुताबिक 1000 कंपनियों में से 300 कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में निवेश के लिए तैयार हैं। ये कंपनियां मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, टेक्सटाइल्स और सिंथेटिक फैब्रिक्स के क्षेत्र में सक्रिय हैं। केंद्र सरकार ने भी इस मामले पर हामी भरते हुए कहा है कि, ‘कोरोना वायरस के नियंत्रण में आने के बाद स्थिति हमारे लिए बेहतर होगी और भारत वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरेगा।’ भारत में पिछले साल 49 बिलियन यूएस डॉलर के करीब विदेशी निवेश हुआ था, इस निवेश का भारतीय जीडीपी में करीब 1.8% का योगदान रहा।

भारत सरकार का प्लान

भारत सरकार ने पिछले वर्ष ही कॉर्पोरेट टैक्स को घटाकर 25.17% कर दिया था, साथ ही नई फैक्ट्रियां लगाने वालों के लिए ये टैक्स घटाकर 17% तक कर दिया था। सरकार ने मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) में राहत दी है। कंपनियों को अब 18.5% की बजाय 15% की दर से मैट देना होगा। दरअसल, MAT उन कंपनियों पर लगाया जाता है जो मुनाफा तो कमाती हैं लेकिन रियायतों की वजह से इन पर टैक्‍स की देनदारी कम होती है।

कोरोना की मार से भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगे चोट पर यह निर्णय मरहम की तरह साबित हो सकता है। लम्बें समय तक यह निवेश न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा अपितु भारत में रोजगार के नए दरवाजे भी खोलेगा।

Tags:
Coronaeffect   |  FDI   |  economy   |  China   |  India   |  MAT

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