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हंगामे की भेंट चढ़ा, बजट सत्र का दसवां दिन


Parliamentary Business Team
Parliamentary Business Team | 09 Mar, 2020 | 12:00 am

2  मार्च 2020 को बजट सत्र के 10 वें दिन लोक सभा (loksabha) के शुरु होते ही दिवंगत सांसद बैद्यनाथ प्रसाद महतो (Baidyanath Prasad Mahto) की याद मे सांसदों ने मौन धारण  किया। इसके बाद जब संसद 11 बजे शुरू हुई तो हंगामे की वजह से सदन दो बजे तक के लिये स्थगित कर दिया गया जिसकी वजह  से प्रश्नकाल (Question hour) और शून्यकाल (Zero hour) में कोई  काम नही  हो सका। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई जो आधे घंटे चली। बजट सत्र के दुसरे चरण के पहले दिन ही सदन को 5 बार स्थगित करना पड़ा जिसके कारण प्रोडक्टिविटी मात्र 9.72 प्रतिशत ही रही।

Main
Points
विपक्ष ने लगातार की अमित शाह के इस्तीफे की मांग
विवाद से विश्वास बिल संसद में हुआ पेश
लोकसभा की प्रोडक्टिविटी रहीं मात्र 9.72 फीसदी

महत्वपूर्ण बिल

आज लोकसभा(loksabha) में कुल 4 विधेयक (Bill) पेश होने के लिए प्रस्तावित थे  लेकिन दिल्ली हिंसा(delhi riots) पर विपक्ष द्वारा किए गए हंगामे की वजह से मात्र 2 ही विधेयक सदन के पटल पर रखे जा सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण(nirmla sitharaman) ने “प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास बिल” चर्चा के लिए पेश किया जिस पर हंगामे की बीच ही चर्चा शुरू की गई।  इस बिल के संबंध में उन्होंने ने बताया कि विभिन्न अदालतों  में प्रत्यक्ष कर से सम्बंधित लंबित मामले इस बिल की सहायता से हल हो जाएंगे।  इस बिल पर चर्चा के दौरान पश्चिमी चम्पारण से भाजपा सांसद संजय जायसवाल (Sanjay jaiswal)  ने इस बिल के नाम पर उपजे विवाद पर कांग्रेस को आड़े हाथो लिया।  डॉ जायसवाल ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर टैक्स टेररिज्म करने का आरोप लगाया और नोकिया के बंद होने के पीछे कांग्रेस के टैक्स टेररिज्म को वजह बताया।  हालांकि चर्चा का मुद्दा जल्द ही बदल गया और डॉ जायसवाल बिल की बजाये विपक्ष पर दिल्ली में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाने लगे।

दूसरा बिल The Medical Termination of Pregnancy(Amendment) Bill,2020  स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन (Harshwardhan) के द्वारा पेश किया गया।

आज के दिन का आंकलन

आज सदन में सांसदों के 377  सवालों का चयन किया गया।  एक प्रतिनिधि मौखिक या लिखित रूप से एक दिन में 5 सवाल कर सकता है पर आंकड़े बता रहे हैं कि सवाल  पूछने के योग्य  कुल 497 सांसदों में से मात्र 274 सांसदों  ने ही सवाल पूछा। लगभग 45% सांसदों ने सवाल पूछने में कोई रुचि नहीं दिखाई। पूछे गए 377 सवालों में से सबसे ज्यादा सवाल वित्त मंत्रालय के हिस्से आए. वित्त मंत्रालय से 95,  मानव संसाधन विकास मंत्रालय से 88  और 46 सवाल पर्यटन मंत्रालय से पूछे गए।

बात अगर सरकार कि योजनाओं की करें तो 8 सांसदों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों से संबन्धित सवाल किये।  पुरुष और महिला सांसदों की स्थिति आज लगभग एक जैसी रही, जहां पुरुषों में 55.42 प्रतिशत  सांसदों ने सवाल पूछे वही 53.42%  महिला  सांसदों  ने अपने  सवाल सभा के पटल पर रखे।

शैक्षणिक योग्यता के पैमाने पर यदि ध्यान दिया  जाए तो 12वीं पास सांसदों का प्रदर्शन अपने से ज्यादा पढ़े-लिखे डॉक्टर, परास्नातक एवं पेशेवर डिग्री धारक सांसदों से बेहतर रहा। कुल 61 12वीं  पास  सांसदों में से 41 सांसदों ने सवाल किए। वही पेशेवर डिग्री धारकों में यह संख्या 40 रही जबकि सदन मे पेशेवर डिग्री धारको कि संख्या 90 है।

महाराष्ट्र रहा सबसे आगे

लोकससभा में अगर राज्यावार सांसदों के प्रदर्शन को आंके तो महाराष्ट्र अव्वल रहा। महाराष्ट्र के 45   में 41  सांसदो ने सवाल पूछे। अन्य राज्यों की बात करे तो केरल के 15 (75%)  सांसदों में ने सवाल  किया। सबसे बड़े राज्य यूपी के 28 (39%),  पश्चिम बंगाल के 15 (37% ), बिहार के 18 (51%)  सांसदों ने सवाल किया।उत्तर पूर्वी राज्यों के सांसदों की स्थिति निराशाजनक रही।

दलगत ब्यौरा देखे तो राज्यों की तरह यहाँ भी महाराष्ट्र की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियां- एनसीपी और शिव सेना सबसे आगे रही। जहां  एनसीपी के सभी 5 सांसदों ने सवाल किया वही शिवसेना के 89  प्रतिशत सांसदों ने सवाल किया। समाजवादी पार्टी के किसी भी सांसद ने सवाल नहीं उठाया। यही हाल आप आदमी पार्टी का रहा। सत्ता रूढ़ भाजपा के 51.74 % और कांग्रेस के 70% सांसदों ने सवाल किया।

4:30  बजे सदन को 3 मार्च, 11 बजे तक के लिये स्थगित कर दिया गया। अब देखना महत्त्वपूर्ण होगा की सरकार इस गतिरोध के बीच संसद को सुचारू रूप से कैसे चलाएगी?

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