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प्रकाश जावड़ेकर की नसीहत, चिदंबरम से ज्ञान लें राहुल गाँधी

कर्ज माफी में सरकार या बैंक कर्जदार की वित्तीय स्थिति का आकलन कर कर्ज न चुका पाने की मजबूरी में उसके कर्ज को माफ कर देती है। इसका मतलब यह है कि उसकी देनदारी खत्म मान ली जाती है और उससे रकम वसूली की प्रक्रिया रोक दी जाती है लेकिन कर्ज को राइट ऑफ (बट्टा खाते) करने का मतलब होता है कि बैंक को उस कर्ज के वापसी की उम्मीद नहीं है और वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया की मदद लेनी पड़ेगी। बट्टा खाते में उन कर्ज को डाला जाता है जब कर्जदार कर्ज चुकाने का सामर्थ्य तो रखता है लेकिन चुकाता नहीं है। इस प्रक्रिया में कर्ज माफ नहीं होते बल्कि उन्हें बट्टा खाते में डाल वसूली की प्रक्रिया जारी रखी जाती है।

Ankit Mishra
Ankit Mishra | 29 Apr, 2020 | 6:11 pm

भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी समेत देश के 50 बड़े विलफुल डिफॉलटर्स के 68,607 करोड़ रुपए के कर्ज की राशि को बैंकों ने बट्टा खाते(write off) में डाल दिया है। यह जानकारी सामने आने के बाद कई दिनों से शांत पड़ी कर्ज पर होने वाली सियासत एक बार फिर सामने आ गई। कांग्रेस के नेताओं ने इस पर सवाल उठा केंद्र से स्पष्टीकरण माँगा तो सरकार की तरफ से भी प्रकाश जावड़ेकर ने जवाब दिया।

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Points
RTI से मिली जानकारी आरबीआई 68,607 करोड़ रुपये के कर्ज बट्टा खाते में डाले
राहुल गांधी का आरोप दोस्तों को पहुंचाई मदद
जावड़ेकर ने दी राहुल गाँधी को पी. चिदंबरम से टूयशन लेने की सलाह

विपक्ष का आरोप दोस्तों को पहुंचाई मदद 

यह जानकारी सामने आने के तुरंत बाद कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने ट्विटर पर 16 मार्च की एक वीडियो पोस्ट की जिसमें वह लोकसभा में सरकार से देश के 50 बड़े विलफूल डिफॉलटर्स की जानकारी मांग रहे थे। केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अपने मित्रों को बचाने के लिए सरकार ने सच छिपाया है।

जावड़ेकर की नसीहत 

राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि राहुल गाँधी को पी. चिदंबरम से टूयशन लेना चाहिए। जिससे उनको राइट ऑफ और कर्जमाफ़ी (waive off) में अंतर स्पष्ट सके।

क्या है मामला

24 अप्रैल को आरबीआई ने एक RTI के जवाब में बताया कि 68,607 करोड़ की बकाया धनराशि तकनीकी और विवेकपूर्ण तरीके से 30 सितंबर, 2019 को राइट ऑफ कर दिया गया था। इस सूची में शीर्ष पर मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड हैं। इस कंपनी के सबसे ज्यादा 5,492 करोड़ रुपये की देनदारी राइट ऑफ की गई है। इसके अलावा मेहुल चौकसी से ही जुड़ी अन्य कंपनियां, गिली इंडिया लिमिटेड और नक्षत्र ब्रांड्स लिमिटेड के क्रमशः: 1,447 करोड़ रुपये और 1,109 करोड़ रुपये लोन राइट ऑफ किये गया है।

इस सूची में दूसरे स्थान पर संदीप झुनझुनवाला और संजय झुनझुनवाला से संबंधित कंपनी आरईआई एग्रो लिमिटेड है। इस कंपनी ने 4,314 करोड़ रुपये के कर्ज लिए थे। झुनझुनवाला बंधू पिछले एक साल से भी अधिक समय से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में हैं।

सीबीआई जांच का सामना कर रहे एक अन्य भगोड़े हीरा कारोबारी जतिन मेहता की विनसम डायमंड्स एंड ज्वेलरी का भी नाम इस सूची में है। इस कम्पनी ने बैंकों से 4076 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है।

इसके अलावा अन्य नामी कंपनियों में कोठारी समूह से संबंधित कम्पनी रोटमैक ग्लोबल प्रा.लि. का भी नाम है। इस कम्पनी ने 2,850 करोड़ रुपये के कर्ज लिए हैं। बाबा रामदेव और बालकृष्ण के समूह की कंपनी रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड का भी नाम इसमें शामिल है।

किसने मांगी जानकारी 

आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले ने आरबीआई से यह जानकारी मांगी थी। देश के बड़े विलफुल डिफॉलटर्स की लिस्ट के साथ 16 मार्च तक उनके कर्ज की स्थिति का ब्यौरा भी आरटीआई के तहत माँगा गया था। आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि उसने यह आरटीआई इसलिए दायर कि क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 16 मार्च को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा पूछे गए प्रश्न का जवाब संसद में देने से इनकार कर दिया था।

राइट ऑफ मतलब कर्जमाफ़ी नहीं 

इस आरटीआई के सामने आने के बाद सोशल मीडिया समेत कई खबरों में इसे कर्जमाफ़ी बताया गया जिसके बाद खुद आरबीआई ने स्पष्टीकरण दे इस स्थिति को स्पष्ट किया है।

कर्जमाफी और राइट ऑफ में अंतर-

कर्ज माफी में सरकार या बैंक कर्जदार की वित्तीय स्थिति का आकलन कर कर्ज न चुका पाने की मजबूरी में उसके कर्ज को माफ कर देती है। इसका मतलब यह है कि उसकी देनदारी खत्म मान ली जाती है और उससे रकम वसूली की प्रक्रिया रोक दी जाती है लेकिन कर्ज को राइट ऑफ (बट्टा खाते) करने का मतलब होता है कि बैंक को उस कर्ज के वापसी की उम्मीद नहीं है और वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया की मदद लेनी पड़ेगी। बट्टा खाते में उन कर्ज को डाला जाता है जब कर्जदार कर्ज चुकाने का सामर्थ्य तो रखता है लेकिन चुकाता नहीं है। इस प्रक्रिया में कर्ज माफ नहीं होते बल्कि उन्हें बट्टा खाते में डाल वसूली की प्रक्रिया जारी रखी जाती है।

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RBI   |  RTI   |   topdefaulters   |  rahul gandhi

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