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लॉकडाउन में 70 लाख महिलाओं को अनचाहा गर्भधारण का खतरा- UN

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान महिलाएं परिवार नियोजन के साधनों तक नहीं पहुँच पा रही हैं ऐसे में निम्न और मध्यम आय वाले देशों में करीब 70 लाख महिलाओं को अनचाहे गर्भधारण का खतरा हो सकता है| इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अन्य प्रकार के शोषण के मामले भी तेजी से बढ़ सकते हैं|

Riya Rai
Riya Rai | 30 Apr, 2020 | 6:30 pm

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को खत्म करने के लिए कई देशों में लॉकडाउन लागू है| इस लॉकडाउन के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है|इस दौरान खासकर निम्न और माध्यम आय वर्ग के लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो रहे हैं|

Main
Points
UNFPA- लॉकडाउन में निम्न और मध्यम आय वाले देशों की स्वास्थ्य सेवाएं हुई है प्रभावित
स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने से 5 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोधक इस्तेमाल से वंचित
लॉकडाउन के चलते आने वाले समय में 70 लाख महिलाओं को अनचाहे गर्भधारण का खतरा
महामारी के कारण अगले 10 साल में बढ़ सकते हैं बाल विवाह के 1.30 करोड़ मामले
समाज के बीच भेदभाव को गहरा कर रही है महामारी-UNFPA

लॉकडाउन में 5 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से वंचित

संयुक्त राष्ट्र जनसख्या कोष के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान प्रमुख स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने के कारण निम्न और मध्यम आय वाले देशों में करीब पांच करोड़ महिलाएं आधुनिक गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल से वंचित रह सकती है, जिनसे आने वाले महीनों में  अनचाहे गर्भधारण के 70 लाख मामले सामने आ सकते हैं|

बाल विवाह के 1.30 करोड़ मामले सामने आने की सम्भावना 

इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने अगले 10 साल यानी 2020 से 2030 तक 1.30 करोड़ बाल विवाह के मामले सामने आने की सम्भावना जताई है| संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने सहयोगी एजेंसियों के साथ आंकड़े जुटा कर यह अध्ययन किया है| इस अध्ययन के मुताबिक कोरोना संकट के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं परिवार नियोजन के साधनों तक नहीं पहुंच पा रही हैं| ऐसे में महिलाओं को अनचाहे गर्भधारण का खतरा है| इसके अलावा अध्ययन में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अन्य प्रकार के शोषण के मामलों में भी तेजी से बृध्दि होने की आशंका जताई गई है|

समाज के बीच भेदभाव को गहरा कर रही है महामारी

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की कार्यकारी निदेशक नतालिया कानेम ने कहा की ये आंकड़े पूरी दुनिया में महिलाओं और लड़कियों पर पड़ने वाले भयावह प्रभावों की ओर इशारा करते हैं| वह कहती हैं की महामारी समाज के बीच भेदभाव को गहरा कर रही है|

लैंगिक भेदभाव के मामले बढ़ा सकता है लॉकडाउन

अध्ययन के मुताबिक, छह महीने का लॉकडाउन लैगिंक भेदभाव के 3.10 करोड़ अतिरिक्त मामले सामने ला सकता है| वहीँ दुनिया की लाखों महिलाएं परिवार नियोजन के लिए अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही अपनी सेहत की सुरक्षा कर पाने में नाकाम हो सकती हैं|

114 देशों में 45 करोड़ महिलाएं करती हैं गर्भनिरोधक का इस्तेमाल

इस अध्ययन में यह बात सामने आई है की निम्न और मध्यम आय वाले 114 देशों में करीब 45 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करती हैं| लॉकडाउन से सम्बंधित दिक्कतों के कारण इस देशों में करीब 4.70 करोड़ महिलाएं आधुनिक गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल से वंचित रह सकती हैं जिससे आने वाले समय में अनचाहे गर्भधारण के 70 लाख अतिरिक्त मामले सामने आ सकते हैं|

महामारी के दौरान महिलाओं के FGM के 20 लाख मामले सामने आने की सम्भावना

अध्ययन मकह गया है की महामारी के दौरान महिलाओं के खतने(FGM) और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए चल रहे कार्यक्रमों की रफ़्तार भी प्रभावित हो सकती है| ऐसे में आने वाले अगले 10 साल में एफजीएम के अनुमानित 20 लाख मामले सामने आंएगे| ये तमाम आंकड़े अमेरिका के जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के एवेनिर हेल्थ और ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया विश्वविद्यालय के सहयोग से तैयार किये गए हैं| 

Tags:
Corona Virus   |  world   |  wide   |  Lockdown   |  UNFPA   |  Report   |  women   |  unintended   |  pregnancy   |  America   |  Australia

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