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रैपिड टेस्ट किट पर उठे सवाल, चीन ने पेश की सफाई


Ankit Mishra
Ankit Mishra | 22 Apr, 2020 | 3:51 pm

कोरोना संक्रमण की जाँच के लिए रैपिड टेस्ट किट के इस्तेमाल पर आईसीएमआर ने रोक लगा दी है। जिसके बाद चीन की तरफ से इस मामले में सफाई पेश की गई है। भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि चीन अपने देश से निर्यात किए गए चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता को बहुत महत्व देता है। वह आईसीएमआर के साथ संपर्क में हैं और इस मामले में जरूरी सहायता करेगा।

Main
Points
भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा आईसीएमआर के साथ संपर्क में
भारत सरकार ने चीन से 6.5 लाख रैपिड टेस्टिंग किट मंगवाए थे
राजस्थान सरकार ने इसके इस्तेमाल पर लगाई रोक

क्या है मामला

पिछले हफ्ते भारत सरकार ने चीन से 6.5 लाख रैपिड टेस्टिंग किट मंगवाए थे। यह किट रविवार को राज्यों को भेजे गए थे। इस किट की सहायता से जांच के बाद सबसे पहले राजस्थान सरकार ने इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई। जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में भर्ती 168 कोरोना मरीजों पर किये गए रैपिड टेस्ट में सिर्फ 5 फीसदी मरीज ही पॉजिटिव पाए गए।

राजस्थान सरकार से शिकायत मिलने के बाद आईसीएमआर ने तीन अन्य राज्यों से भी रिपोर्ट मांगी। राज्यों की तरफ से आये जवाब में पता चला कि आरटी-पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए सैंपल्स की जांच रैपिड टेस्टिंग किट से करने पर काफी बड़ा अंतर पाया गया है। हालाँकि आईसीएमआर के अनुसार चीन से किट आने के बाद लैब में जांच की गई थी, जिसमें यह 71 फीसदी तक सही परिणाम दे रही थी जिसके कारण इसका उपयोग सर्विसलांस के लिए करने का फैसला लिया गया था।

आईसीएमआर करेगा जांच

आईसीएमआर ने यह भी माना कि परिणाम में इतना अंतर होने के कारण सर्विलांस में भी इसकी उपयोगिता संदिग्ध होती है। इस कारण देश की सर्वोच्च स्वास्थ्य रिसर्च एजेंसी ने रैपिड किट के इस्तेमाल पर पूरे देश में दो दिन के लिए रोक लगा दी है। इन दो दिनों में आईसीएमआर के 8 क्षेत्रीय इंस्टीट्यूट, फील्ड में जाकर चीन से आये रैपिड टेस्ट किट के दूसरे जत्थे का भी टेस्ट करेंगे। इस दौरान अगर यह भी अपेक्षित परिणाम देने में असफल होते हैं तो सरकार रैपिड टेस्ट किट को संबंधित कंपनी को लौटा देगी।

इससे पहले भी चीन से आये पीपीई किट समेत मास्क और ग्लव्स की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। गौरतलब है कि चीन से आयातित इन सामानों को काफी ऊँची कीमत पर मंगाया गया है।

क्या होता है एंटीबॉडी टेस्ट

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इस टेस्ट से कोरोना संक्रमण की जांच का पता शत-प्रतिशत नहीं लगाया जा सकता क्योंकि इसमें सिर्फ व्यक्ति के अंदर उन एंटीबॉडीज का पता लगाया जाता है जो किसी भी वायरस के चपेट में आने के बाद शरीर में उस वायरस से लड़ने के लिए बनती हैं। इसके लिए व्यक्ति की उंगली से महज़ एक-दो बूंद खून की जरूरत होती है। इससे ये पता चल जाता है कि इम्यून सिस्टम ने वायरस को बेअसर करने के लिए एंटीबॉडीज बनाए हैं या नहीं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति जिसके अंदर किसी प्रकार का लक्षण न दिखा हो और वह कोरोना संक्रमित हो या ठीक भी हो चुका हो तो इस टेस्ट के सहारे उसके शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज की पहचान कर उसके कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि की जा सकती है।

इस टेस्ट की सबसे बड़ी कमी है कि यह शुरुआती दौर के कोरोना संक्रमित मरीज़ों की पहचान करने में असफल हैं। चूँकि शरीर के अंदर वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज का निर्माण करने में कुछ दिनों का समय लगता है और यदि जांच एंटीबॉडीज के निर्माण के पहले की जाए तो परिणाम नेगेटिव आएगा।

प्रामाणिक न होने के बाद भी मंजूरी क्यों ?

अब सवाल यह उठता है कि जब यह जांच पूर्णतः प्रामाणिक नहीं है फिर ICMR ने इसको मान्यता क्यों दी ?  कोरोना संक्रमण की जांच का जो सबसे प्रामाणिक तरीका है वह आरटी-पीसीआर(Real-Time Reverse Transcription–Polymerase Chain Reaction) कहलाता है। इस जांच में ज्यादा समय लगता है और यह जाँच सिर्फ अत्याधुनिक लैब में ही की जा सकती है। इस जांच से ऐसे मरीज़ जो पहले कोरोना संक्रमित रहें हों और जाँच के वक़्त ठीक हो चुके हो उनका पता नहीं चलता। 

इसके उलट रैपिड टेस्ट के नतीजे मात्र 15 से 20 मिनट में आ जाते है जिसकी सहायता से संक्रमितों को क्वारंटीन कर उनके कांटेक्ट ट्रेसिंग करने में आसानी होती है। इस टेस्ट में कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मरीज़ भी पकड़ में आते हैं जिससे उनकी कांटेक्ट ट्रेसिंग कर इसके फैलाव को रोकने में मदद मिलती है। इसी वजह से ICMR ने इसके इस्तेमाल को मान्यता दी है।

Tags:
Corona   |  rapidtestingkit   |  rtpcr   |  ICMR   |  China,

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