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कोरोना के बाद चीन से भारत आया अफ्रीकन स्वाइन फीवर

असम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर से 2800 सुअरों की मौत, राज्य सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस की तरह ही यह बीमारी भी चीन से ही आई है क्योकि इस बीमारी के चलते 2018 में चीन में 60% सुअरों की मौत हुई थी

Archna Jha
Archna Jha | 06 May, 2020 | 6:13 pm

सभी देशों को वैश्विक आर्थिक बाज़ार उपलब्ध करवाने वाले चीन ने दुनिया को महामारियां देने में भी कोई कमी नही रखी है। चाहे वह 2002 में आई SARS महामारी हो या 2012 में आई MERS और अब 2019 में कोविड-19 महामारी। परन्तु, चीन का विचार केवल यहीं पर रुकने का फिलहाल तो नही लगता। दरअसल, हाल ही में ऐसी ख़बर सामने आई है जिसमे पता चला है कि असम में फरवरी से अब तक अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) से 2800 सुअरों की मौत हो चुकी है, यह राज्य अब ASF का केन्द्र बिन्दु बनता जा रहा है। जिसके चलते संक्रमित सुअरों की मृत्यु दर 100% से अधिक हो चुकी है। ऐसे में असम सरकार का दावा है कि यह फ्लू भी कोरोना वायरस की तरह चीन से ही आया है क्योंकि 2018-2020 के बीच चीन में ASF की वजह से 60%  सुअरों की मौत हो गई थी।

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Points
अफ्रीकन स्वाइन फीवर चीन की देन: असम सरकार
राज्य वन विभाग, पशु चिकित्सा और इंडियन काउन्सल आफ एग्रीकल्चर मिलकर इस दिशा में एक रोडमैप तैयार करेंगें: अतुल बोरा
इस दिशा में रोकथाम के लिए विशेष दल का गठन: अतुल बोरा

इस बारे में क्या कहना है असम के मुख्यमंत्री का

मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने  राज्य के पशु चिकित्सा और वन विभाग को अफ्रीकन स्वाइऩ फीवर से असम के सुअरों को बचाने के लिए इंडियन काउन्सल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR)  के नेशनल रिसर्च पिग सेंटर के साथ मिलकर एक रोड़मैप बनाने की बात कही है। इसके साथ-साथ सोनोवाल ने राज्य के पशु विभाग से सुअर पालन के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों की संख्या और उनके संक्रमित होने या न होने का पता लगाने की बात भी कही है। 

इस बारे में अतुल बोरा का क्या कहना है

इस बारे में असम के पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा का कहना है कि- “राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSD)  भोपाल ने पुष्टि की है कि यह अफ्रीकी स्वाइऩ फ्लू (ASF) ही है। केन्द्र सरकार ने हमें बताया है कि देश में इस बीमारी का यह पहला मामला है और इसके चलते 306 गांव में 2800 सुअरों की मौत हो चुकी है।”

ASF  के लिए असम में हुआ एक विशेष दल का गठन

अतुल बोरा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में ASF  की चपेट में आने से 2800 सुअरों की मौत पर चिंता जताते हुए एक विशेष दल के गठन की बात कही । इस विभाग ने यह निश्चित किया है कि भले ही राज्य सरकार ने संक्रमित सुअरों को मारने मंज़ूरी दे दी हो लेकिन, विभाग संक्रमित सुअरों को न मारते हुए जैव सुरक्षा के अन्य उपायों को लागू करने की कोशिश करेगा जिससे की लॉकडाउन का भी पालन हो सके। 

चीन से भारत कैसे आई यह बीमारी

PTI के मुताबिक- “चीन के शिजांग प्रांत में ये बीमारी शुरु हुई थी जो की अरुणाचल प्रदेश के पास ही पड़ता है। ऐसे में यकीनन चीन-अरुणाचल सीमा के ज़रिये यह बीमारी असम तक पहुंच गई। पहले बाहर घूमने वाले सुअर संक्रमित हुए फिर फार्म में रहने वाले।” वही वैज्ञानिकों का इस बारे में कहना है कि- “सुअर के मांस, लार, खून और टिश्यू के ज़रिये ये बीमारी एक सुअर से दूसरे सुअर में फैलती है। चिंता का विषय यह है कि कोरोनावायरस की तरह ही अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का भी आज तक कोई इलाज नही मिला है। ऐसे में संक्रमित सुअरों को मार देना ही एकमात्र उपाय है , जिससे यह बीमारी आगे न फैले, हालांकि इसकी वैक्सीन बनाने का काम भी जारी है और कई देशों में इस पर रिसर्च भी हो रही है।“

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