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कोरोना का पता लगायेगा आर्टिफिशियल इंटैलिज़ैंस, भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया सॉफ्टवेयर

आवाज़ और सांस लेने के तरीकों से कंम्प्यूटर के जरिए पता चलेगा कोरोना संक्रमितों का, जापान के क्योटो शहर में आईआईटी रुड़की के प्रोफेसरों और स्टूडेंट्स ने बनाया सॉफ्टवेयर।

Archna Jha
Archna Jha | 21 Apr, 2020 | 2:32 pm

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कोरोना वायरस के संक्रमितों का जल्द से जल्द पता लगाने के लिए इस समय दुनिया भऱ में कईं तरह के शोध चल रहे हैं। जिसमें पता चला है कि जापान के क्योटो शहर में भारतीय वैज्ञानिकों ने आईआईटी रुड़की के प्रोफेसरों और विधार्थियों के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इटैलिजेंस यानि कृत्रिम बुद्धि आधारित एक सॉफ्टवेयर बनाया है, जो न केवल कोरोना सबंधी रैपिड पूल टैस्ट, पीसीआर टैस्ट से कम लागत का है बल्कि जिन डॉक्टरों और नर्सों का कोरोना की जाँच के दौरान संक्रमितों के संपर्क में आकर स्वंय भी संक्रमित होने का डर होता है, इस सॉफ्टवेयर की मदद से उनका भी बचाव हो सकेगा।

Main
Points
आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस से बने सॉफ्टवेयर से कोरोना मरीज की पहचान
जापान में भारतीय वैज्ञानिकों ने AI आधारित सॉफ्टवेयर बनाया
सॉफ्टवेयर के साथ एक्स-रे मशीनों का इस्तेमाल होगा
पीसीआर, रैपिड पूल टैस्ट की तुलना में अधिक उपयोगी
सॉफ्टवेयर से मिल रहे 99.69% सही रिज़ल्ट

कैसे काम करेगा यह सॉफ्टवेयर

आर्टिफिशियल इंटैलिज़ैंस पर आधारित यह सॉफ्टवेयर ऐसा है जिसमें एक्स-रे मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। संक्रमण के अंदेशा वाले शख्स की आवाज़ और सांस लेने के पैटर्न को इसमें दर्ज किया जाऐगा। जिसकी टेस्टिंग के बाद ये सॉफ्टवेयर ये बता पायेगा कि वो शख्स कोरोना कोरोना संक्रमित है या नहीं। दरअसल पूरी प्रक्रिया में संक्रमित के फेफेड़ों के एक्स-रे को कंप्यूटर में डाला जाएगा फिर सॉफ्टवेयर में, एक्स-रे को 2 मांपकों से गुज़रकर जाना होगा, जिससे व्यक्ति के पॉजिटिव होने या न होने का पता चल सकेगा। इतना ही नही इस सॉफ्टवेयर के ज़रिये ASYMPTOMATIC मरीज़ों यानि किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण न होने के बावज़ूद भी उसका न केवल कोरोना संक्रमित होना बल्कि दूसरों को भी संक्रमित करने की स्थिति का पता चल सकेगा।

कितना प्रभावशाली है सॉफ्टवेयर?

कृत्रिम बुद्धि आधारित इस सॉफ्टवेयर से अभी तक कम ही टैस्ट हुए हैं लेकिन सभी की जांच के परिणाम 99.69% तक सही निकलें हैं। इस सॉफ्टवेयर के उपयोग से जांच में कम लागत, रैपिड स्क्रीनिंग (जिसमें 4 सेकेण्ड में 100 एक्स-रे इमेज एकसाथ निकलना), कोरोना संक्रमण के सही परिणाम, साथ ही हेल्थ वर्कर्रों का संक्रमण से बचाव जैसे कुछ फायदे भी होने का दावा किया जा रहा है।

क्या है आर्टिफिशयल इंटैलिज़ेस

कृत्रिम बुद्धि या आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस मानव या अन्य किसी जीव से विपरीत मशीनों से तैयार की गई बुद्धि होती है। तकनीकि के बदलते दौर में कंप्यूटर विज्ञान के ज़रिये एक ऐसी बुद्धि या मशीन बनाई गई है जिसमें न केवल सोचने-समझने का ज्ञान होता है बल्कि सही निर्णय लेने की क्षमता भी होती है। सरल शब्दों में कहें तो कंप्यूटर का ऐसा दिमाग, जो इंसानो की तरह सोच सके। बता दें कि पूर्व में आर्टिफिशियल इंटैलिज़ैस का प्रयोग कानूनी मामलों को सुलझाने में भी हुआ है, जिसके बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आ चुके हैं।

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Covid 19   |  Indian   |  scientists   |  artificial   |  intelligence   |  software   |  to   |  detectco   |  vidpositive

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