Your image is ready, you can save / share this image
Please wait!
#MPsPerformance


%
RANKINGOUT OF

प्रश्नकाल और शून्यकाल के अलावा भी क्या सांसद उठा सकते हैं जनता के मुद्दे?

संसदीय प्रक्रियाओं में एक और अहम प्रक्रिया होती है जिसमें सांसदों को अपनी बात रखने का मौका मिलता है। इसे कहते हैं नियम 377 के तहत चर्चा। इसमें सांसद लोक महत्व के अर्जेंट मसले सदन में उठा सकते हैं और हल कराने की गुजारिश कर सकते हैं। इस बार मानसून सत्र में कई दिनों में लोकसभा में नियम 377 के तहत चर्चा हुई और इसमें लोकल से लेकर नेशनल लेवल तक के कई अहम मसले उठाए गए।

PB Desk
PB Desk | 08 Oct, 2020 | 6:15 pm

नियम 377 के तहत चर्चा में भाग लेकर सांसद जनसेवक की अपनी भूमिका के साथ न्याय करते दिखते हैं। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा लोक सभा में प्रक्रियाविधियों के नियम और कार्य के आयोजन के नियम 377 के तहत उठाए गए मामलों पर तथा राज्यर सभा में विशेष उल्ले7ख के माध्यठम से अनुवर्तन कार्रवाई की जाती है। संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल के बाद ही संसद तात्काीलिक सार्वजनिक महत्वक के मामले उठा सकते हैं। यह अनिवार्य नहीं है, फिर भी मंत्री कभी-कभार सदस्यों द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। 

Main
Points
संसद में नियम 377 के तहत है खास व्यवस्था
लोक महत्व के अर्जेंट मसले उठाने की अनुमति
सांसद पूछ सकते हैं जनता से जुड़े सवाल

मुद्दों पर सदन या सदस्य को मिलता है आश्वासन

संबंधित मंत्री की अनुपस्थिति में संसदीय कार्यमंत्री द्वारा सदन अथवा वैयक्तिक सदस्य को आश्वासन दिया जाता है कि उनकी भावनाएं संबंधित मंत्रियों तक पहुंचा दी जाएंगी। मंत्रालय द्वारा संसद के दोनों सदनों में दैनिक कार्रवाइयों से मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों, वचनों, शपथों आदि को चुना जाता है और फिर इन्हें कार्यान्वयन के लिए संबंधित मंत्रालयों और विभागों में भेजा जाता है। आश्वासनों के कार्यान्व‍यन में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के विवरण आश्वासन के कार्यान्वयन की उचित संवीक्षा के बाद, कार्यान्वयन की रिपोर्ट विभिन्न संबंधित मंत्रालयों और विभागों से प्राप्त की जाती है और इन्हें संसदीय कार्य मंत्री या सदन के मंत्री द्वारा सदनों के पटल पर आवधिक रूप से रखा जाता है।

मानसून सत्र में 377 में उठे मसले

इस बार संसद का मानसून सत्र कोरोना के कारण काफी देर से शुरू हो सका। समय की कमी के कारण लोकसभा स्पीकर ने प्रश्नकाल की अनुमति नहीं दी और हंगामे के भी आसार थे। फिर भी लोकसभा में नियम 377 के तहत चर्चा को अधिकांश दिनों में सदन के कामकाज की सूची में रखा गया था। कई दिनों इसके तहत चर्चा भी हुई। लोकल स्तर पर सड़क से लेकर बालिकाओं की शिक्षा और आनलाइन शिक्षा में परेशानी तक के मुद्दे सांसदों ने उठाए।

Tags:
Indian Parliament   |  Sansad   |  Parliament Rule 377

Stories for you

SEARCH YOUR MP

Or

Selected MP