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रैपिड टैस्टिंग किट्स को लेकर भारत और चीन में गर्मागर्मी

रैपिड टैस्टिंग किट्स से की गई जाँच में एक्यूरेसी की कमी के चलते ICMR ने सभी राज्यों से किट्स के इस्तेमाल पर रोक के लिए एजवाइज़री जारी की है और चीन को किट्स वापस देने का फैसला लिया है

Archna Jha
Archna Jha | 29 Apr, 2020 | 3:56 pm

देश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों और अब तक कोरोना वायरस की कोई वैक्सीन न आने के चलते सभी राज्य सरकारों में चिंता का माहौल है, जिसके कारण सभी राज्यों ने साउथ कोरिया मॉडल को अपनाते हुए बड़े लेवल पर कोरोना टैस्टिंग के लिए और रैपिड टैस्टिंग किट्स को एकमात्र सहारा समझते हुए, केंद्र सरकार से मार्च महीने के अंत में रैपिड टैस्टिंग किट्स की मांग की थी। जिसके चलते सरकार ने 4 अप्रैल को चीन से 10 लाख रैपिड टैस्टिंग किट्स मंगवाये थे। लेकिन हाल ही में, इंडियन काउन्सल ऑफ मेडिकल रिसर्च(ICMR) ने एडवाइज़री जारी करते हुए सभी राज्य सरकारों को रैपिड एंटी बॉडीज़ टैस्ट बंद करने का निर्देश दिया है, साथ ही सभी राज्य सरकारों से किट्स को तुरंत लौटाने की बात कही है।

Main
Points
इन किट्स से कोरोना संक्रमितों की जाँच के गलत नतीजे आ रहे है : ICMR
पूर्व में सभी राज्यों ने केन्द्र सरकार से इन किट्स को मंगवाने की गुज़ारिश की थी
सबसे पहले राजस्थान सरकार ने टैस्ट के नतीजों को गलत बताया
भारत का यह कदम गैर-ज़िम्मेदाराना है: चीन दूतावास
स्पेन, ब्रिटेन, तुर्की, अमेरिका ने भी इन चीन की टैस्ट किट्स में खामी बताई है

क्यों लगाई गई है रैपिड एंटी बॉडीज़ टैस्ट पर रोक

दरअसल, कोरोना वायरस से निपटने की तमाम कोशिशों में रैपिड टैस्ट को गेम चेंजर के रुप में देखा गया लेकिन, रैपिड टैस्टिंग के इस्तेमाल के बाद राज्य सरकारों ने इसकी यथार्थता पर संदेह व्यक्त किया। बता दें, सबसे पहले राजस्थान सरकार ने RT-PCR  के ज़रिये जाँचे हुए 107 कोरोना पॉज़िटीव मरीज़ों को ही रैपिड टैस्टिंग किट्स के ज़रिये दोबारा जाँचा, जिसके केवल 4.5% रिजल्ट ही सही आये। ICMR के डॉक्टर रमन गंगाखेडकर के मुताबिक-“सभी राज्यों में टैस्टिंग किट्स बांटी गईं थी, लेकिन राजस्थान से शिकायत आई कि इन किट्स से कम डिटेक्शन हो रहे हैं, जिसके चलते हमने 3 अन्य राज्यों से भी बात की, हमें पता चला है कि नतीज़ों में बहुत ज्यादा वेरीऐशन आ रहे हैं, कई जगह 6% से लेकर 71%  तक का फर्क है, हमने अपने स्तर पर भी इन रैपिड टैस्ट किट्स की जाँच की है और अब ये किट्स चीन को वापस लौटा दी जाएंगी।” भारत को इसका आर्थिक नुकसान होने के संदर्भ में ICMR का कहना है कि- “ ये किट्स चीन सरकार से न लेकर चीन की कुछ निजी कंपनियों जेसे- गंवांग्झू वोंडफो बायोटैक, ज़ुहाई लिवजॉन डायग्नोस्टिक्स से ली हैं और क्योंकि भारत सरकार ने इन किट्स की अभी पेमेंट नही की थी, जिसकी वजह से भारत को इसका कोई आर्थिक नुकसान नही होगा”

कैसे काम करता है रैपिड बॉडी टैस्ट

पाथ लैब के मैनेजिंग डायरेक्टर अरविन्द लाल के मुताबिक- “कोरोना संदिग्ध का खून, प्लाज़्मा या सीरम के रुप में सैंपल लेकर, तय मात्रा में किट में बताई गई जगह पर डाला जाता है, अगर टैस्ट किट पर एक गुलाबी लाइन आती है इसका मतलब व्यक्ति कोरोना नेगेटिव है। किट पर C और  M लकीरें आती है, तो मरीज़ एंटीबाडी के साथ पॉज़िटीव है इसके अतिरिक्त दो अन्य सांकेतिक मानक हैं जिससे कोरोना पॉज़िटीव होने की दो अन्य अवस्थाओं का पता चलता है”

भारत के इस कदम पर चीन की प्रतिक्रिया

भारत स्थित चीन के दूतावास के प्रवक्ता का इस बारे मे कहना है कि- “चीन हमेशा ही एक्सपोर्ट किये जाने वाले मेडिकल प्रोडक्टस की क्वालिटी का पूरा ध्यान रखता है। इतना ही नही, इन किट्स को ICMR और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलोजी, पुणे ने अप्रूव किया था। हो सकता है कि इन किट्स से तय प्रक्रिया के तहत टैस्टिंग न की गई हो। ऐसे में भारत का यह बयान कतई गलत और गैर ज़िम्मेदाराना है”

दूसरे देशों में भी आई इन किट्स से समस्या

न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक- इन किट्स से टैस्ट के गलत नतीजे आये है, जिन लोगों में एंटी बॉडी नही है, ये किट्स उनमें भी एंटी बॉडी बता रही है। वहीं ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के अनुसार- इन टैस्ट किट्स में सेंसटिविटी रेट कम है। इससे पहले स्पेन, तुर्की और नीदरलैंड ने चीन के बने हज़ारों टैस्टिंग किट्स और मेडिकल मास्क को डिफेक्टिव बताकर रिजेक्ट कर दिया था।

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Covid 19   |  ICMR   |  rapidtes tingkits   |  nonac curacy   |  stop   |  theuse of kit

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