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बस्तीः सांसद के बड़े दावे, जनता ने की शिकायत

पार्लियामेंट्री बिजनेस लगातार सांसद जी के संसदीय क्षेत्र में पहुंचकर ग्राउंड ज़ीरो से उनकी परफॉरमेंस पर नजर रखता है और पेश करता है एमपी का रिपोर्ट कार्ड। इसी सिरीज के तहत इस बार पार्लियामेंट्री बिजनेस पहुंचा उत्तर प्रदेश के बस्ती संसदीय क्षेत्र में और चेक की वहां के सांसद हरीश द्विवेदी की परफार्मेंस। क्या कुछ दिखा वहां और क्या है वहां की जनता की राय अपने माननीय सांसद के बारे में...

PB Desk
PB Desk | 08 Sep, 2020 | 8:15 pm

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले को खासतौर से कपड़ा उद्योग और चीनी मिलों के लिए जाना जाता था। बताया जाता है कि रामायणकालीन महर्षि वशिष्ठ का आश्रम इसी क्षेत्र में होने की वजह से इसका प्राचीन नाम वैशिष्ठी था जिसे बाद में राजा कल्हण ने बदलकर बस्ती कर दिया था। बस्ती को हिंदी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान और आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल के जन्मस्थान के रूप में भी जाना-पहचाना जाता है। इसी जिले के अगोना गांव में उनका जन्म हुआ था। क्षेत्रफल की दृष्टि से बस्ती उत्तर प्रदेश का 7वां सबसे बड़ा जिला है। राजनीतिक रूप से कम चर्चित बस्ती लोकसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का दबदबा दिखता है। इस लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभाएं हैं, हर्रैया, महादेवा, बस्ती सदर, कप्तानगंज और रुधौली। पांचों विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है।इतना ही नहीं क्षेत्र के सांसद हरीश द्विवेदी भी बीजेपी के ही नेता हैं। बस्ती सदर लोकसभा से राम गरीब पहले सांसद थे।

Main
Points
उत्तर प्रदेश के बस्ती संसदीय क्षेत्र में हरीश द्विवेदी की परफार्मेंस।
बस्ती लोकसभा क्षेत्र में बहुसंख्यक आबादी हिंदुओं की है।
रोजगार और सड़कों की हालत पर भी सांसद को जनता ने घेरा।

लोकसभा सीट का इतिहास

साल 1952 में देश में हुए पहले आम चुनाव में बस्ती 3 संसदीय सीटों में बंटी थी, डुमरियागंज लोकसभा, खलीलाबाद लोकसभा और बस्ती सदर लोकसभा।यहां 1957 में स्वतंत्र लोकसभा सीट के तौर पर पहली बार चुनाव हुआ। तब यह सीट आरक्षित थी और यहां से निर्दलीय उम्मीदवार रामगरीब चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। कुछ समय बाद ही क्षेत्र में उपचुनाव हुए और इस बार यहां से कांग्रेस ने बाजी मार ली और केशवदेव मालवीय सांसद बने। मालवीय यहां से 10 साल तक सांसद रहे। इसके बाद कांग्रेस के शिव नारायण साल 1967 के चुनाव में जीतकर संसद पहुंचे। 1971 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अनंत प्रसाद धुसिया बस्ती से सांसद बने। आपातकाल के बाद कांग्रेस विरोधी लहर में पूर्व कांग्रेसी शिव नारायण ने भारतीय लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजयी रहे। साल 1980 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और 1989 तक कल्पनाथ सोनकर और उनके बाद राम अवध प्रसाद बस्ती से सांसद रहे। साल 1991 में बीजेपी के राम मंदिर आंदोलन के साए में हुए चुनाव में श्यामलाल कमल ने क्षेत्र में जो कमल खिलाया तो यह सिलसिला साल 2004 तक किसी राजनीतिक पार्टी के रोके न रुका। साल 1996 में बीजेपी के टिकट पर श्रीराम चौहान सांसद बने और लगातार 2004 तक वह इस पद पर बने रहे। 2004 के परिसीमन में बस्ती लोकसभा सीट सामान्य श्रेणी में आ गई। इस साल हुए आम चुनाम में बीएसपी ने बीजेपी का विजय रथ रोक दिया और लालमणि प्रसाद सांसद चुने गए।2009 में अरविंद कुमार चौधरी बीएसपी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर वापसी की और मोदी लहर पर सवार होकर हरीशचंद्र उर्फ हरीश द्विवेदी लोकसभा पहुंच गए। 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने फिर से हरिश्चंद्र उर्फ हरीश द्विवेदी को प्रत्याशी बनाया और हरीश द्विवेदी चुनाव जीतकर फिर से लोकसभा पहुंचे। अयोध्या का करीबी जिला होने के नाते क्षेत्र में हिंदुत्व की राजनीति हावी है। राम मंदिर आंदोलन के बाद से यहां बीजेपी का दबदबा लगातार बढ़ा है।

नई शुगर मिल लगी, रिंग रोड की योजना

बस्ती लोकसभा क्षेत्र में बहुसंख्यक आबादी हिंदुओं की है। यहां 85 फीसदी हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं। वहीं क्षेत्र में मुसलमानों की तादाद तकरीबन 14 फीसदी है। बता दें कि जब से बीजेपी के सांसद हरीश द्विवेदी सांसद हुए बस्ती जिले में बंद मुंडेरवा सुगर मिल की जगह नई शुगर मिल लगाई गयी। 100 करोड़ की लागत से रिंग रोड बनने की घोषणा हो चुकी है। मेडकिल कालेज भी बन चुका है। बस्ती में भव्य ऑडिटोरियम भी बना है। इतना ही नहीं लोगों के टहलने के लिए पार्क और ओपेन जिम भी बनवाया गया। करोड़ो की लागत से पुस्तकालय भी बनवाया गया है। साथ ही रेलवे स्टेशन पर भी विकास किया गया है। कागजी दावों पर हमेशा जनता ही मुखर हो कर बताती है कि ग्राउंड पर कितना काम हुआ है और कितना नहीं। सो जनता से हमने बात की और जाना कि उनके क्षेत्र का क्या हाल है और पूछा कि उनके सांसद जी ने उनके लिए, संसदीय क्षेत्र के लिए क्या कुछ किया है।

सांसद के दावों से जनता की राय अलग

पार्लियामेंट्री बिजनेस से बात करते हुए स्थानीय नागिरकों ने जो कहा, वह साफ कर देता है कि जनता सांसद और उनके समर्थकों द्वार किए जा रहे दावों से ज्यादा खुश नहीं है। स्थानीय पांडे बाजार में लगने वाले जाम को लोगों ने सबसे प्रमुख समस्या बताया। साथ ही, रोजगार और सड़कों की हालत पर भी सांसद को जनता ने घेरा। अपनी बात करते हुए स्थानीय नागरिकों के चेहरे पर निराशा और क्रोध दोनों ही साफ दिखे। रिंग रोज के दावे को भी एक स्थानीय नागरिक ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि लंबे समय से बात ही हो रही है, लोकल लेवल पर होता कुछ नहीं दिख रहा है। हालांकि एक अन्य स्थानीय नागरिक ने सांसद से कामों की तारीफ करते हुए कहा कि वह बस्ती को विकास की ओर ले जा रहे हैं। 

कांग्रेस ने सांसद को घेरा

जनता ने तो अपने मन की बात बता दी पर असल संसदीय क्षेत्र के मुद्दे जिनपर काम न हो रहा हो, उस पर तो विपक्ष ही बताता है कि किन मुद्दों पर ध्यान दिया जा रहा और किन मुद्दों को किनारे लगाने की कोशिश हो रही है। इसलिए पार्लियामेंट्री बिजनेस पहुंचा विपक्ष के पास। काग्रेस जिलाध्यक्ष अंकुर वर्मा ने सांसद के कामों के दावों पर कहा कि जो कुछ बताया जा रहा है, उसमें बहुत सच्चाई नहीं है। बाढ़ यहां की एक बड़ी समस्या है। जिले में कई नदियां उफना जाती हैं और तमाम गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। इसे रोकने के लिए बंधा बनाने की बात हुई थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। हरीश जी छह साल से यहां के सांसद हैं, लेकिन बंधा पर काम कुछ भी नहीं हुआ। कांग्रेस नेता ने तो बंधा के नाम पर पैसों की आपसी बांट का भी आरोप लगाया। 

साथ ही, उन्होंने रिंग रोड तथा स्थानीय समस्याओं की तरफ भी ध्यान दिलाया और कहा कि सांसद द्वारा बस्ती में कुछ खास काम नहीं किया गया है।

सांसद प्रतिनिधि के बड़े दावे

अब जब विपक्ष कह रहा हो कि उसे तो क्षेत्र में विकास दिख ही नहीं रहा है तो जरूरी हो जाता है सांसद जी से पूछना कि जिस विकास पर आप दावा ठोंक रहे हो, उसपर तो विपक्ष कह रहा है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। जवाब तो तब लिया जाए न जब सांसद जी अपने संसदीय क्षेत्र में हों, पर हमें तो जवाब लेना था सो हम पहुंच गए बीजेपी सांसद हरीश द्विवेदी के प्रतिनिधि रमेश चंद्र पांडेय के पास। रमेश चंद्र पांडे ने वही कहा जो एक सांसद प्रतिनिधि को कहना चाहिए। लंबी बातचीत में रमेश चंद्र पांडे ने बिना रुके, बिना थके सांसद हरीश द्विवेदी का गुणगान किया। इसमें उन्होंने क्षेत्र में आडिटोरियम और पार्क से लेकर रिंग रोड योजना तक का जिक्र किया।

पार्लियामेंट्री बिजनेस पर ये है परफार्मेंस रिपोर्ट

ये तो था कि ग्राउंड जीरो पर सांसद जी क्या कुछ कर रहे हैं और क्या कुछ नहीं कर रहे हैं, पर पार्लियामेंट्री बिजनेस सांसदों के कामकाज का पूरा बही खाता रखता है। पार्लियामेंट्री बिजनेस की साइट पर मौजूद रिसर्च और डाटा के अनुसार हरीश द्विवेदी की ओवरआल रैंकिंग 180 है और लोकसभा में रैंकिंग 121 है। इसे बेहतर नहीं कहा जा सकता है। क्षेत्र की परफार्मेंस यानी सांसद निधि के खर्च के मामले में वह बहुत पीछे हैं और अब तक कुछ भी खर्च नहीं किया है। हालांकि हरीश द्विवेदी की लोकसभा में अटेंडेंस काफी बेहतर है औऱ उनकी रैंकिंग 9 है। उन्होंने अब तक इस लोकसा में 81 सवाल भी पूछे हैं। डिबेट और प्राइवेट मेंबर बिल में वह काफी पीछे हैं। एमपी रिपोर्ट कार्ड में ये रिपोर्ट थी बस्ती संसदीय क्षेत्र की। आगे भी पार्लियामेंट्री बिजनेस एेसे ही आपको देता रहेगा एमपी का रिपोर्ट कार्ड।

Tags:
UttarPradesh HarishDivedi Basti MemberOfParliament LokSabha

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