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वर्क फ्रॉम होम से नहीं हो पा रहा है काम का आकलन, बॉस से दूरी प्रोमोशन रुकने का बन सकती है कारण


Archna jha
Archna jha | 06 Apr, 2020 | 5:26 pm

महामारी बन चुके कोविड-19 के फैलते संक्रमण की वजह से लगभग सभी देशों में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है। जिसके चलते सभी छोटी-बड़ी कम्पनियों ने अपने कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्राम होम’ करने का निर्देश जारी किया है। जिससे की  लॉकडाउन के दौरान दफ्तर के काम भी प्रभावित न हों और कर्मचारी भी घर बैठे ही ऑनलाइन काम कर सकें और उनकी कमाई पर भी कोई असर न हो। लेकिन यह ‘वर्क फ्राम होम’ कल्चर कितना उचित है। इसके लिए इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलू पर विचार करना आवश्यक है।

Main
Points
वर्क फ्रॉम होम से मिल रहे हैं निगेटिव, पॉजीटिव रिस्पॉस
बॉस से दूरी होने पर नहीं मिल रही प्रशंसा
प्रोमोशन में भी बाधक बनता है वर्क फ्रॉम होम
जेंडर इक्वैलिटी को बेहतर बना रहे है वर्क फ्रॉम होम

घर पर रहने से मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव

वर्क फ्रॉम होम के नकारात्मक पहलूओं को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। लॉकडाउन के चलते लोगों को घर में रहकर ही काम करना पड़ रहा है। लोग सोशलाइज़ नहीं हो पा रहे हैं। जिसका असर उनकी मानसिक दशा पर साफ देखा जा सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि घर में वो काम में ध्यान नहीं लगा पाते। इसलिए वो कार्यालय के वातावरण में काम करना ज्यादा पसंद करते हैं।

बॉस से दूरी प्रोमोशन मिलने में बाधक

कुछ लोग यह तक मानते हैं कि घर से काम करते हुए उनके कौशल की प्रंशसा कोई नहीं करता। जिससे उन्हें हताशा होती है। कुछ अध्ययन के मुताबिक यह तथ्य भी सामने आये हैं कि घर से काम करने पर कर्मचारी बॉस के संपर्क में नहीं रह पाते। जिसकी वजह से उनकी वर्क रेटिंग तय नहीं हो पाती। जो  कहीं न कहीं उनकी पदोन्नति में रुकावट साबित होती हैं। दफ्तर के माहौल में कर्मचारी में न केवल कार्यालय आते हैं बल्कि उसे स्वयं को निखारने का मौका मिलता है। वर्क फ्रॉम होम पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर है। यदि किसी स्थिति में इंटरनेट उपलब्ध नही होता तो व्यक्ति का काम पूरी तरह से ठप्प हो सकता है।

वर्क फ्राम होम के सकारात्मक पहलू

जेंडर इक्वैलिटी को मिलता है बढ़ावा – न्यूयार्क की नार्थवेस्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैथियास डोएपके के मुताबिक वर्कप्लेस में महिलाओं औऱ पुरुषों के काम और सैलरी को लेकर हमेशा भेदभाव रखा जाता है। यह कल्चर इस फांसले को न केवल खत्म करेगा,बल्कि जेंडर इक्वैलिटी को बढ़ावा देगा। कहीं न कहीं यह कल्चर दफ्तर में कर्मचारियों के बीच रहने वाले मनमुटाव को भी कम करेगा।

वर्चुअल वर्कप्लेस को बढ़ावा मिलेगा 

तमाम कम्पनियों जैसे एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, टाइटन, वर्ल्पूल, वेदांता का मानना है कि आज कस्टमर सर्विसेज़, फोन बैंकिंग,एचआर और कॉरपोरेट ऑफिस फंक्शन के लिए रिमोट डिजिटल वर्किंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिससे डिज़िटाइज़ेशन के क्षेत्र में प्रगति मिल हो रही है।

क्या कहते हैं एचआर एक्सपर्टस्

इससे कर्मचारियों के साथ कम्पनियों को भी सहूलियत होती है। साथ ही कर्मचारियों के आने- जाने का खर्च बचेगा। कर्मचारियों की निज़ी ज़िन्दगी और काम के बीच सांमजस्य हो सकेगा। इतना ही नहीं घर से काम करने के और भी कई लाभ हैं जैसे-घंटो ट्रैफिक में फंसें रहने के तनाव से मुक्ति, घर के शांत वातावरण में बेहतर काम हो सकेगा। जिससे कर्मचारी की प्रोडेक्टिविटी उभर के आएगी। एचआर कंपनी रेडस्टैंड की अध्यक्ष अंजली रघुवंशी का कहना है, “ पहले जो क्षेत्र वर्क फ्राम होम की श्रेणी में नहीं आते थे, वह भी आज लॉकडाउन के चलते इस दिशा में अपनी सोच बदल रहे हैं”।

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