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बिहार के मज़दूरों को देना पड़ेगा रेल किराया

बिहार में प्रवासी बिहारीयों का भारी तादाद में वापस आना शुरु हो गया है । लॉकडाउन में बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों, कामगारों और छात्रों की संख्या सबसे अधिक है, राज्य में उनके वापस आने का सिलसिला जारी है। लेकिन मुसिबत ये है कि ये लोग अपने खर्चे पर आ रहे हैं। रेल का किराया भी ख़ुद ही उठाना पड़ेगा ।

Abhishek Dubey
Abhishek Dubey | 05 May, 2020 | 5:06 pm

केरल से मजदूरों के लेकर लौटी श्रमिक स्पेशल ट्रेन के सवारों ने अपने - अपने 910 रुपये का टिकट ख़ुद कटाया और रास्ते में अपना ख़र्च भी खुद ही किया। सोमवार को ही केरल से दो ट्रेनें दानापुर स्टेशन पहुंची, जिनमें 2,310 प्रवासी मजदूर थे । राजस्थान के कोटा से भी 3,275 फंसे हुए छात्रों को लेकर सोमवार को तीन ट्रेनें बिहार पहुंची, इनमें दो ट्रेनें बरौनी जंक्शन पहुंची जबकि एक गया जंक्शन ।हालांकि, बिहार सरकार ने ये घोषणा की हुई है कि बाहर से लौटने वाले सभी प्रवासियों को किराया समेत कम से कम एक हज़ार रुपये दिए जाएंगे। मगर, यह राशि 21 दिनों के क्वारंटीन पीरियड के बीत जाने के बाद दी जाएगी।

सरकार की तरफ़ से एक नया आदेश भी जारी हुआ है जिसके मुताबिक़ बाहर से लौटने वालों को होम क्वारंटीन में भी रखा जाएगा। सभी को पहले एक शपथ पत्र भरना होगा और सरकार के लगाए लॉकडाउन के नियमों का पालन करना होगा । इस नए आदेश को लेकर प्रवासियों की निगरानी और उनके रख-रखाव के मुद्दे पर बिहार का विपक्ष नीतीश सरकार पर पलटी मारने के आरोप लगा रहा है।

Main
Points
मज़दूर अपना रेल किराया ख़ुद देंगे
बार-बार बदल रहा है बिहार सरकार का स्टैंड-तेजस्वी यादव
लगातार भारी संख्या में बिहार पहुंच रहे हैं प्रवासी
सबकी होगी जांच
क्वारंटीन सेंटर के लिए सरकार के पास नहीं है जगह- तेजस्वी यादव

लाखों आने बाक़ी, इंतजाम नाकाफी !

बिहार सरकार के आईपीआरडी की तरफ़ से चार मई को जारी अपडेट के मुताबिक़ अब तक बाहर फंसे 17 लाख लोगों ने राहत और मदद मांगी है। ज़ाहिर है, ट्रेनें चलनी शुरू हो गई हैं तो अब फंसे हुए ये लोग लौटकर वापस आएंगे। 

लौटने वाले सभी प्रवासियों की रेलवे स्टेशन पर ही शुरुआती स्क्रीनिंग के बाद बसों से उन्हें उनके गृह जिले में भेजा जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक़ मंगलवार को राज्य के अलग-अलग स्टेशनों पर प्रवासियों को लेकर नौ ट्रेनें आएंगी।

खबर है कि प्रखंड स्तर पर 2450 क्वारंटीन सेंटर का संचालन हो रहा है, जहां सोमवार की शाम तक 8968 लोग रह रहे हैं। रहने वाले लोगों को थाली, बाल्टी, गिलास, कपड़ा, तीन वक़्त का खाना और दो वक़्त पर दूध के पैकेट दिए जा रहे हैं। पंचायत और गांव के स्तर पर क्वारंटीन सेंटर बनाने का काम तेजी से चल रहा है, जल्द ही गांव के निकटवर्ती विद्यालयों में क्वरंटीन सेंटर बना दिए जाएंगे।"

Information and Public Relation Department (IPRD) Bihar ने ट्वीट कर कहां है कि बिहार के बाहर लॉकडाउन की स्थिति में फंसे हुए मज़दूरों,छात्रों, पर्यटकों आदि को सम्बंधित राज्यों, जहाँ पर वे फंसे हुए हैं वहां पंजीकरण करवाना ज़रुरी है ।

कुल मिलाकर इस आपात स्थिति में जहां प्रकृति का कहर मज़दूरों पर गिरा है वहां सरकार तुरंत मदद करने के बजाए राजनीति करने और आरोप-प्रत्यारोप करने में लगी हुई है । इन मज़दूरों की गलती बस इतनी है कि इनके पास ना पैसा है, ना खाना, ना घर बस ये अपने घर जाना चाहते हैं ।

Tags:
Covid-19   |  Bihar   |  CM   |  Nitish   |  Laborers   |   Rail   |  ticket

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