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गतिरोध का प्रभाव, लोकसभा में काज का अभाव


Parliamentary Business Team
Parliamentary Business Team | 07 Mar, 2020 | 12:00 am

लोक सभा (loksabha) के बजट सत्र (budget session) का 12 वां दिन वाकई ‘यादगार’ रहा। गतिरोध और अवरोध का ऐसा आलम था कि सदन को आज तीन बार स्थगन का मुँह देखना पड़ा। काम के नाम पर दो दिन से जारी खानापूर्ति तीसरे दिन भी जारी रही जिसके चलते प्रोडक्टिविटी औंधे मुंह गिर कर अब तक के न्यूनतम स्तर 4 फीसद पर आ गई।

Main
Points
लोकसभा से विवाद से विश्वास बिल पास
लगातार तीसरे दिन नहीं चली लोकसभा
विपक्ष का हंगामा जारी

काम नहीं औपचारिकता..

11 बजे शुरू हुई कार्यवाही बमुश्किल 10  मिनट हंगामे के बीच चलने के बाद ही, पहले 12 बजे फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।  जब 2 बजे दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो उम्मीद जताई जा रही थी कि लोकसभा में काम होगा,  लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते केवल ख़ानापूर्ति होती दिखी।  हालांकि उस दौरान सरकार ने अति महत्वपूर्ण "विवाद से विश्वास" (vivad se vishwas) बिल शोर और हंगामे के बीच ही पास करा लिया ।  

केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) की गैरमौजूदगी में उनकी जगह भाजपा सांसद संजय शामराव धोत्रे ने IIIT Laws Amendment Bill 2020 सदन में रखा जिसे विपक्ष के नारों के बीच ही पास कर  पुरः स्थापित कर दिया गया। इस बिल के पास होने के बाद सदन की कार्यवाही विपक्ष के विरोध के चलते 5 मार्च, सुबह 11.00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई और आज भी कार्यसूची में प्रस्तावित अधिकतर कार्य अधूरे ही रह गए।

किसकी रही कितनी भागीदारी?

बजट सत्र के 12 वें दिन लोकसभा में 285 सांसदों ने 415  लिखित सवाल पूछे।   415 सवालों में सबसे ज्यादा जवाबदेही रेल मंत्री की रही।  रेल मंत्री से कुल 109 सवाल किये गये। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से संबंधित मंत्री को 60  लिखित सवालों के जवाब देने पड़े। वहीं रक्षा मंत्रालय के हिस्से 54 सवाल आये। 15 सवाल एसिड हमले से घायल पीड़ितों (acid attack survivor)  को कानूनी सहायता पहुँचाने से संबंधित पूछे गए। यह देखना सुखद है की सांसद इस अत्यंत जरूरी मुद्दे पर संवेदनशील है।

लोकसभा में लगभग 14 प्रतिशत महिला सांसद है जिनकी संख्या 73 है लेकिन इनमें से सिर्फ 54.7%  महिला सांसदों ने ही पूछा। वही 424 पुरुष सांसदों में 245 सांसदों ने सवाल पूछा। शैक्षणिक योग्यता के पैमाने पर यदि आंके तो 12वीं उत्तीर्ण सांसद सवाल पूछने में अग्रणी रहे। 75.5% 12वीं पास सांसदों ने सदन में सवाल पूछा।

राज्यों में कौन आगे..

अगर हम राज्यवार स्थिति देखें तो पिछले दो दिन की तरह आज भी महाराष्ट्र (Maharashtra) के सांसद सवाल उठाने में सबसे आगे है। महाराष्ट्र के सवाल पूछने योग्य कुल 45 सांसदों में 38 सांसदों ने सवाल पूछे।

राज्यों के प्रदर्शन को बेहतर तरीके से समझने के लिए हमने उन्हें 3 भागो में बांटा है।  दक्षिणी राज्य (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी,केरल), हिंदी भाषी राज्य (बिहार, छत्तीसगढ़,दिल्ली, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड)  और नार्थ-ईस्ट राज्य (अरुणांचल प्रदेश, असम,मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा) इन तीनों में सबसे बेहतर प्रदर्शन दक्षिणी राज्यों का रहा। दक्षिणी राज्यों से आने वाले 125 सांसदों में से 90 सांसदों ने सवाल पूछा।

वहीँ सबसे बुरा हाल उत्तर-पूर्वी राज्यों(North-East)  से आने वाले सांसदों का रहा।  उत्तर-पूर्वी राज्यों से केवल त्रिपुरा और असम के सांसदों ने सवाल उठाये। त्रिपुरा के सभी 2 सांसदों ने तो वही असम से सभी 13 में से 8 सांसदों ने सवाल पूछे। इन दोनों राज्यों के अलावा बाकि बचे 6 राज्यों के किसी भी सांसद ने सदन में सवाल रखने की ज़हमत नहीं उठाई।    

अगर हिंदी भाषी क्षेत्रों की बात करे तो कुल 197 सांसद सवाल पूछने योग्य है, जिनमें सिर्फ 89  सांसदों ने अपने सवाल रखे। यह आकड़ा 45 % बैठता है. इन राज्यों में सबसे बेहतर प्रदर्शन राजस्थान (71%) का रहा वहीं सबसे नीचे मध्य प्रदेश (30%) के सांसद रहे। हिंसा से जूझ रही दिल्ली के कुल 6 सांसदों में से 4 ने सवाल उठाया।

दल के आधार पर आकलन-

दलों में भी महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार चला रहे शिवसेना और एनसीपी ही आगे रहे।  शिवसेना के 18 में से 15 सांसदों ने सवाल पूछा  तो वहीं एनसीपी के  सभी पांच सांसदों ने सवाल उठाये। दक्षिणी राज्य  के पार्टियों का प्रदर्शन भी बेहतर रहा।  डीएमके के 75% तो आंध्र के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी की पार्टी YSR Congress  के 68 प्रतिशत व तेलगु देशम पार्टी(TDP) के तीनों सांसदों ने सवाल उठाये हालांकि तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के सांसद फिसड्डी साबित हुए।  उनके 9 में से मात्र 3 सांसदों ने सवाल पूछे ।

वहीँ देश की सबसे बड़ी पार्टी, सत्ताधारी भाजपा (BJP) के 55% सांसदों ने तो प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस(Congress) के 75% सांसदों ने सवाल उठाए।  लोकसभा में लेफ्ट पार्टियों (CPI+CPI-M) के सांसदों की भागीदारी सवाल पूछने में शत प्रतिशत रही।

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