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कोरोना पर हुई चर्चा, कांग्रेस के 1/7 सांसद निलंबित


Parliamentary Business Team
Parliamentary Business Team | 07 Mar, 2020 | 12:00 am

दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर संसद (Parliament) में चर्चा को लेकर घमासान जारी रहा । लोकसभा (Lok Sabha)  स्पीकर ओम बिड़ला (Om Birla) )  नें कांग्रेस  के 7  सांसदों को असंसदीय व्यवहार के कारण इस पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। लोकसभा स्पीकर ने कल से ही सदन की कार्यवाही से दूरी बना रखी है। आज भी वह सदन में मौजूद नहीं रहे।

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Points
केन्द्रीय मंत्री हर्षवर्धन का लोकसभा में कोरोना वाईरस पर बयान
कांग्रेस के 7 सांसद निलंबित, बजट सत्र से रहेंगे बाहर

पीठासीन सभापति मीनाक्षी लेखी (Meenakshi Lekhi)  ने कहा कि “सदन में जब मत संख्या 13 तथा 14 पर चर्चा की शुरुआत हुई तब कुछ सदस्यों ने सभा की कार्यवाही से संबंधित कागज अध्यक्ष पीठ से छीन लिए और उछाले। संसदीय इतिहास में ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण आचरण संभवत पहली बार हुआ है”। उन्होंने सांसदों के इस आचरण की निंदा की। स्पीकर ने गौरव गोगोई(Gaurav Gogoai), टीएन प्रतापन (T.N. Pratapan), राजमोहन उन्नीथन(Rajamohan unnithan), मणिकम टैगोर(Manicka Tagore), बेनी बेहन(Benny Behanan), डीन कुरीकोस( Dean Kuriakose), और गुरजीत सिंह(Gurjeet Singh Aujla) को पूरे बजट सत्र से निलंबित कर दिया। निलंबन के तुरंत बाद ही लोकसभा को 6 मार्च सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

हंगामे के चलते लोकसभा में प्रस्तावित अधिकतर कार्य अधूरे रह गए लेकिन प्रोडक्टिविटी में थोड़ी बढ़त देखने को मिली। पिछले 3 दिन से जो आकड़ा 10 प्रतिशत या उससे नीचे था आज बढ़कर 21 प्रतिशत पहुंच गया। सदन में शून्यकाल (Zero Hour) की जगह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन (Dr. Harshwardhan)  का कोरोना  वायरस (COVID-19) पर वक्तव्य रखा गया। उससे पहले लोकसभा में जल संसाधन,  मानव विकास और गृह मामले से सम्बंधित स्थायी समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

किसकी रही कितनी भागीदारी?     

लोकसभा में पुछे गए सांसदों द्वारा लिखित सवालों के आकड़ों पर नजर डालें तो आज कुल 389  सवाल पूछे गए जिनमें  17  सांसदों ने कृषि उड़ान से जुड़े मामले पर सवाल पूछा। सांसदों की भागीदारी मात्र 56.22% रही क्योकि मात्र 280 सांसदों ने सवाल पूछे। महिला सांसदों की भागीदारी में हल्की गिरावट देखने को मिली। सवाल पूछने में उनकी भागीदारी 52.05 रही।  कुल 73 महिला सांसदों में से 37 ने सवाल पूछे, वहीं पुरुषों में यह प्रतिशत 57 रहा।

राज्यों में कौन आगे ?

राज्यावार भागीदारी की बात करें तो आज भी दक्षिण भारत के राज्य सवाल पूछने के मामले में अग्रिम पंक्ति में रहे । महाराष्ट्र के  45 में से 40 (89%) सांसदों ने सवाल पूछे वहीं अन्य राज्यों में  आंध्र प्रदेश के 21(84%), केरल के 20 (75%), तमिलनाडु 27(69.23%), और कर्नाटक के 15 (60%) सांसदों ने सवाल पूछ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।उत्तर-पूर्वी राज्य मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, के किसी भी सांसद ने सवाल पूछने में कोई भागीदारी नहीं दिखाई । पूर्वोत्तर राज्यों में केवल त्रिपुरा के सभी 2 सांसद और असम के 8( 61%)  सांसदों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई है।देश के हिंदी भाषी क्षेत्र के राज्य के अधिकतर सांसद सवाल पूछने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है । राजस्थान को छोड़ (71.43%), बाकि सभी राज्यों की लोकसभा में भागीदारी खराब रही है । मध्य प्रदेश के 26 में से मात्र 8 सांसद, पंजाब 11 में से 4 सांसद, उत्तर प्रदेश के 72 में से 27 सांसद, झारखंड के 13 में से 5 सांसद और बिहार 35 में से 16 सांसदों ने ही सवाल पूछें है।

पार्टी vs पार्टी 

पार्टियों के बीच शिवसेना निरंतर सवाल पूछने में आगे है। शिवसेना के कुल 18 में 16 सांसदों ने सवाल पूछे। वहीं महाराष्ट्र में उनके सहयोगी एनसीपी के सभी 5 सांसदों ने सवाल किए।बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कुल 22 में से 7 सांसदों ने सवाल उठाया   आप, जनता दल(s), हेमंत सोरेन की पार्टी JMM, और शिरोमणी अकाली दल के किसी भी सांसद ने सदन में कोई भी प्रश्न नहीं पूछा जबकि  सीपीआई (M), चंद्र बाबू नायडू की पार्टी टीडीपी और AIMIM  की भागीदारी 100 प्रतिशत रही। वहीं अन्य पार्टियों में समाजवादी पार्टी से 1(20%) सांसद  (31.82%),नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुल 3 में से 1 सांसद और बीएसपी के 4 (40%) सांसदों ने सवाल पूछा।

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