Your image is ready, you can save / share this image
Please wait!
#MPsPerformance


%
RANKINGOUT OF

फाल्गुन का रंग, होली तक संसद बंद


Parliamentary Business Team
Parliamentary Business Team | 07 Mar, 2020 | 12:00 am

शुक्रवार को औपचारिकता पूरी कर संसद होली की छुट्टी पर चली गई। बजट सत्र के 14 वें दिन 11 बजे शुरू हुई लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 12:55 पर 11 मार्च, सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस अल्पावधि में भी सदन को 3 बार स्थगित  करना पड़ा। होली के पहले संसद का यह आखिरी दिन था और सांसद इतनी जल्दी में थे की उनसे 2 घंटे भी न बैठा गया। उनकी गंभीरता का परिचय इसी बात से मिलता  है कि लोकसभा की कार्यवाही में सदन में मौजूद सांसदों की भागीदारी मात्र 31.53 प्रतिशत ही रही जिसकी वजह से प्रोडक्टिविटी 12.5 फीसद ही रही।

Main
Points
The Insolvency and Bankruptcy (Second Amendment) Bill,2019 हुआ पास
प्रोडक्टिविटी 12.5 फीसद ही रही

निलंबन पर होगा पुनर्विचार?

लोक सभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तावित The Insolvency and Bankruptcy (Second Amendment) Bill, 2019 पास हुआ और सदन में विपक्ष के तमाम सांसदों ने कल निलंबित हुए कांग्रेस के 7 सांसदों के निलंबन का मुद्दा उठाया । लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता और सांसद अधीर रंजन चौधरी सहित डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने इस निलंबन को गलत ठहराते हुए इसे वापस लेने की मांग की।  लोकसभा में शुक्रवार को पीठासीन सभापति किरीट सोलंकी ने जानकारी दी कि लोकसभा अध्यक्ष एक समिति का गठन कर दी है जो सदन में दो मार्च से पांच मार्च तक के सभी घटनाक्रमों की जांच कर रिपोर्ट देगी। उन्होंने बताया कि समिति की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे जिसमें सभी दलों के प्रतिनिधि होंगे।

यथास्थिति क़ायम

लोकसभा में काम के नाम पर खाना पूर्ति का दौर आज भी जारी रहा। लिखित सवालों की संख्या आज घट कर 225 हो गई जो सदन में प्रश्न पूछने योग्य मौजूद सांसदों (498) की संख्या के मुकाबले आधी भी नहीं है। देश की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व कर रही महिला सांसदों में से  जहां 59 प्रतिशत ने सवाल पूछा वही पुरुष सांसदों के मामले में यह आँकड़ा  26 प्रतिशत ही रहा जो वाकई निराशाजनक है ।

आँकड़ों की माने तो पिछले 4 दिनों से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे महाराष्ट्र समेत दक्षिण भारत के तमाम राज्यों के सांसदों को भी वीकेंड रास आया जिसकी वजह से उनकी भी भागीदारी में गिरावट दर्ज की गई । महाराष्ट्र 29(64%), तमिलनाडु 13(33%), कर्नाटक 8 (32%), केरल 6 (30%), आंध्र प्रदेश 10 (40%) यह सारे वह राज्य है जिनका प्रदर्शन निरंतर अच्छा रहा था। कुछ राज्य ऐसे भी है जिन्होंने अपना ढर्रा बिलकुल भी नहीं बदला इनमें मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, गोवा, जम्मू -कश्मीर शामिल है। इन राज्यों के सांसदों का प्रदर्शन कल भी शून्य था आज भी शून्य है । 

"नाम बड़े और दर्शन छोटे"

इस पंक्ति के ज़हन में आते ही देश के बड़े राज्यों के प्रदर्शन के आँकड़े आँखों के सामने आ जाते है। सवाल पूछने में उत्तर प्रदेश 19 (26%), मध्यप्रदेश 5(19%), पश्चिम बंगाल 11 (27%) और बिहार 4 (11 %) जैसे बड़े राज्य के सांसदों का प्रदर्शन, वहां की जनता के साथ बिलकुल भी न्याय नहीं करता। जैसा हाल इन बड़े राज्यों का रहा कुछ ऐसा ही हाल इन राज्यों के बड़े राजनीतिक दलों का भी रहा। बंगाल की पार्टी तृणमूल कांग्रेस से 27 %, बसपा से 20 प्रतिशत, जदयू से 12 प्रतिशत तो लोक जनशक्ति पार्टी और समाजवादी पार्टी के किसी भी सांसद ने सवाल पूछने की ज़हमत नहीं उठाई।

Tags:

Stories for you

SEARCH YOUR MP

Or

Selected MP