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कोरोना पर अमेरिकी जांच से क्यों घबराया चीन? आखिर अमेरिकी दल के वुहान आने पर रोक क्यों लगाई!

कोरोनावायरस की जांच के लिए अमेरिकी दल पर रोक। चीन के वुहान शहर में जांच के लिए जाना चाहता था। चीन सरकार ने लगाई रोक, कहा हम भी पीड़ित।

Manmeet Singh
Manmeet Singh | 21 Apr, 2020 | 5:41 pm

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कोरोना वायरस को पैदा करने के आरोप चीन पर लग रहे हैं जिसका संक्रमण चीन के वुहान शहर से शुरु होकर दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में फैल गया है। वुहान शहर में जांच के लिए जा रहे अमेरिकी दल को वुहान शहर में आने से चीन ने इंकार कर दिया है। चीन का कहना है कोरोनावायरस  के प्रसार में उसका कोई हाथ नहीं है। वो इसका भुक्तभोगी खुद है ना कि दोषी। इस वायरस  ने इंसानियत के हर तबके को नुकसान पहुंचाया है और साथ ही चीन को भी इसका भारी नुकसान उठाना पड़ा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए पारदर्शिता के साथ कड़े कदम उठाए हैं और उनके देश के किए गए प्रयासों से दुनिया के अन्य देशों को वायरस से लड़ने में मदद मिली है।

Main
Points
बुहान भेजना चाहते थे राष्ट्रपति ट्रंप
चीन का दावा, पारदर्शिता के साथ संक्रमण रोका
चीन के प्रयासों से ही दुनिया के देशों को वायरस से लड़ने में मिली मदद
H1 N1, एचआईवी एड्स को लेकर अमेरिका पर चीन ने उठाए सवाल
कहा अमेरिका की जवाबदेही कौन करेगा तय

विशेषज्ञों का दल चीन भेजना चाहता था अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वह कोरोना वायरस की जांच के लिए अमेरिकी विशेषज्ञों के एक दल को चीन के वुहान भेजना चाहते हैं। वह पहले ही बीजिंग को दोषी पाए जाने पर गंभीर परिणामों को भुगतने की चेतावनी दे चुके हैं। रविवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि जिस तरह से चीन ने कोरोनावायरस  से जुड़े मामलों में कार्यवाही की है वो उससे खुश नहीं है।

इससे पहले अमेरिका, कोरोना वायरस की Wuhan Institute of virology से पैदा होने की बात को लेकर जांच शुरू भी कर चुका है जिसके संदर्भ में उसने विश्व स्वास्थ्य संगठन  के मुखिया चिट्ठी लिख सहयोग की भी मांग की है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कठघरे में

कोरोना वायरस की वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिष्ठा भी खतरे में है। उसकी विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका जापान सहित कई देशों के नेताओं ने संगठन पर चीन की तरफदारी का आरोप लगाते हुए  कहां कि WHO चीन के प्रभाव में कार्य कर रहा था। यदि उसने चीन में वर्तमान हालात का जायजा लेकर विश्व पटल पर सही तस्वीर सामने रखी होती तो दुनिया आज इतनी भयावह स्थिति में ना होती। संगठन के मुखिया पर आरोप है कि उन्होंने चीन से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर ही पूर्णता भरोसा किया और व्यक्तिगत स्तर पर कोई जांच नहीं की। ताइवान की दी गई चेतावनी को भी नजरअंदाज करते हुए कोरोना को महामारी घोषित करने में भी देरी कर दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लगातार चीन का पक्ष लिया था और विश्व के अन्य देशों के चीन पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध कभी उसने विरोध किया था।

वैश्विक जांच की मांग

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री ने कोरोना वायरस  के फैलने को लेकर एक वैश्विक जांच की मांग की है। इसका जवाब देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी यह मांग पूरी तरह से निराधार है। उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए।

फ्रांसीसी वैज्ञानिक का दावा

फ्रांस के नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक ने भी दावा किया है कि कोरोना वायरस वुहान की प्रयोगशाला में ही जन्मा है। उनका कहना है कि इसकी उत्पत्ति संभवत प्रयोगशाला में एचआईवी और एड्स की दवाई बनाने के वक्त हो सकती है। इस पर चीन के प्रवक्ता का कहना था कि अभी तक इस बात का कोई भी पुख्ता सबूत नहीं है जो वैज्ञानिक दावा कर रहे हैं।

अमेरिका पर उठाए सवाल

अमेरिका पर सवाल उठाते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा की H1 N1, एचआईवी एड्स और 2008 कि वैश्विक मंदी से विश्व अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ था। चीन की तरफ से सवाल किया गया कि क्या इस पर किसी ने अमेरिका की जवाबदेही तय की?

कोरोनावायरस की वजह से अमेरिका को अब तक सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। अकेले अमेरिका में ही इससे 40,000 से ज्यादा लोगों की  मौत हो चुकी है और 7.5 लाख से ज्यादा अमेरिकी इस वायरस से संक्रमित हैं।

वैश्विक पटल पर 23 लाख लोगों को अपनी जद में ले चुके इस वायरस की वजह से एक लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

Tags:
China   |  USA   |  vahan   |  Covid-19,

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