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एफडीआई पॉलिसी बदलने पर क्यों बौखलाया चीन!

भारत सरकार ने एफडीआई नियमों में बदलाव करते हुए निवेश के नियमों को कठोर किया, जिसका मकसद घाटे में चली गयी भारतीय कंपनियों का फ़ायदा उठाकर चीनी कंपनियों से उनके टेकओवर को रोकना था।

Suyash Tripathi
Suyash Tripathi | 20 Apr, 2020 | 5:05 pm

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भारत की नई एफडीआई पॉलिसी को लेकर चीन ने अपनी नाराजगी जताई है। चीनी दूतावास के हवाले से आयी खबर के मुताबिक चीन का कहना है कि भारत सरकार का नया नियम कारोबार और निवेश में उदारीकरण के सामान्य चलने के खिलाफ है। चीन ने कहा कि ऐसा करना विश्व व्यापार संघठन के नियमों और जी-20 में बनी सहमतियों के खिलाफ फैसला है। चीन ने भारत से सभी देशों से आने वाले निवेश को समान अनुमति देने की मांग भी रखी है।

Main
Points
भारत ने बनाई नई एफडीआई पॉलिसी
चीन ने एफडीआई पॉलिसी पर जताई नाराजगी
चीन आर्थिक मंदी की चपेट में आए देशों को दे रहा है लालच
एफपीआई के तहत होने वाला इन्वेस्टमेंट सिर्फ 10%
पाकिस्तान और बांग्लादेश नहीं कर सकते भारत में निवेश

भारत ने एफडीआई को लेकर क्या किया था फैसला?

वाणिज्य मंत्रालय ने 17 अप्रैल को एक नोटिफिकेशन जारी किया था। जिसमें निवेश के नियमों में बदलाव किए गए हैं और इसका उद्देश्य मजबूरी का फ़ायदा उठाकर किसी कंपनी को टेकओवर करने से रोकने के लिए था। हालांकि इसमें चीन का कोई उल्लेख नहीं था।

भारत ने क्यों उठाए बड़े कदम?

चीन आर्थिक मंदी की चपेट में आई दुनिया भर की बड़ी कंपनियों को निवेश का लालच देकर उसपर कब्जे की कोशिश कर रहा है। इन्हीं कोशिशों के बाद भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया और अपनी एफडीआई पॉलिसी में बड़ा परिवर्तन कर दिया।  भारत सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए भारत के पड़ोसी देशों के लिए अब सरकारी मंजूरी को अनिवार्य कर दिया है।

एफडीआई में क्या किया था बदलाव?

भारत के इस कदम का मतलब है कि कोई भी चीनी कंपनी या किसी और देश की कंपनी भारतीय कंपनियों में अगर हिस्सेदारी खरीदना चाहती है तो सरकार की मंजूरी लेना जरूरी होगा।

भारत में दो तरीके का होता है विदेशी निवेश

भारत में विदेशी निवेश दो तरीके का होता है. पहला एफपीआई फॉरेन प्पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट और दूसरा एफडीआई फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट. एफपीआई के तहत होने वाला इन्वेस्टमेंट सिर्फ 10% तक का होता है. वहीं एफडीआई के अंतर्गत 10% से ज्यादा का निवेश आता है। अभी तक के नियम के मुताबिक, पाकिस्तान और बांग्लादेश के किसी नागरिक या कंपनी को छोड़कर दूसरे किसी भी देश के लोग भारत में एफडीआई के तहत इन्वेस्टमेंट कर सकते थे, लेकिन अभी सरकार ने इस नियम में बदलाव किया है।

भारत सरकार के नए नियम क्या कहते हैं?

भारत के जो सीमा से लगने वाले देश हैं, अगर उनका कोई भी नागरिक या कंपनी भारत में 10% से ज्यादा का निवेश करती है तो उसे सरकार से इजाजत लेनी होगी। यह इजाजत कैबिनेट स्तर की होगी, इसलिए यह इतनी आसानी से नहीं मिलेगी। निवेश करने वाली कंपनी को बताना पड़ेगा कि वह निवेश का कोई गलत इस्तेमाल नहीं करेगी। 10% से कम वाला निवेश सेबी की निगरानी में होगा।

चीन को लेकर था डर

अब कोई भी विदेशी कंपनी बिना सरकार की अनुमति के कथित ऑटोमैटिक रूट से किसी भारतीय कंपनी का टेकओवर नहीं कर सकती है। सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा है, ''संकट की घड़ी में हम नहीं चाहते कि हमारी कंपनियों को कोई विदेश कंपनी मजबूरी का फ़ायदा उठाकर टेकओवर कर ले।''

इस तरह की पाबंदी बांग्लादेश और पाकिस्तान के लिए पहले से ही थी। अब तक यह नियम चीन, भूटान, अफ़ग़ानिस्तान, म्यांमार और नेपाल के लिए नहीं था। 

राहुल गांधी ने उठाया था सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 12 अप्रैल को ट्वीट कर विदेशी निवेश को लेकर नियम कड़ा करने का सुझाव दिया था। अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने लिखा था, ''अर्थव्यवस्था की बुरी हालत के कारण भारतीय कॉर्पोरेट्स कमज़ोर होंगे और ये टेकओवर के आसान शिकार बनेंगे. सरकार को राष्ट्रीय संकट की इस घड़ी में किसी भी भारतीय कंपनी के विदेशी टेकओवर की अनुमति नहीं देनी चाहिए.''

जब 18 अप्रैल को सरकार ने फ़ैसला लिया कि पड़ोसी देशों की कोई कंपनी भारतीय कंपनी का टेकओवर केंद्र सरकार की मंज़ूरी के बाद ही करेगी तो राहुल गांधी ने ट्वीट कर सरकार को शुक्रिया कहा. राहुल ने अपने नए ट्वीट में लिखा है, ''मेरी चेतावनी पर ध्यान देने और एफडीआई के नियमों को संशोधित करने के लिए सरकार को शुक्रिया।''

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Corona pandemic   |  Coronaeffect   |  recession   |  FDI   |  China   |  Rahul Gandhi

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