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चीन ले आया अपनी ऑफिशियल डिज़िटल करेंसी

चीन ने जारी की अपनी ऑफिशियल डिजिटल करेंसी, पिछले 5 सालों से इस पर काम कर रहा था, 2022 के ओलम्पिक की तैयारी के लिए शुरु की गई है ये करेंसी

Archna Jha
Archna Jha | 30 Apr, 2020 | 6:13 pm

डिज़िटल करेंसी को लेकर अकसर नकारात्मक रुख अपनाने वाला चीन बहुत जल्द अपने ही सेंट्रल बैंक के अन्दर बनाई गई डिज़िटल करेंसी को लाँच करने जा रहा है। चीन ने हमेशा ही डिज़िटल करेंसी विशेषकर फेसबुक की लिब्रा क्रिप्टोकरेंसी का यह कहकर विरोध जताया कि – इस तरह की करेंसी का इस्तेमाल चीन और अन्य विकासशील देशों जैसे भारत और ब्राज़ील की संप्रभुता के लिए एक खतरा साबित हो सकता है और ऐसी करेंसी केवल सरकार या संट्रेल बैंक से ही लॉच होनी चाहिए। लेकिन हाल ही में पता चला है कि चीन पिछले 5 सालों से डिज़िटल करेंसी अपनाने पर काम कर रहा है। हालांकि चीन ने अभी तक इसे कोई ऑफिशियल नाम नही दिया है, लेकिन माना जा रहा है कि इस करेंसी को चीन DIGITAL CURRENCY ELECTRONIC PAYMENT (DCEP)  नाम दे सकता है। इसके बाद चीन दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जो अपनी ऑफिशियल डिज़िटल करेंसी लॉच करेगा। बता दें कि G-20 के बाकी देशों का भी डिज़िटल करेंसी के बारे में यही कहना है - "अक्सर देखा गया है कि डिज़िटल करेंसी अस्थिर होती है, उहाहरण के तौर पर 2013 में BITCOIN  एक ही रात में 233 डॉलर से घटकर 67 डॉलर रह गया। इसी प्रकार 2017 में एक ही रात में यह 1000 डॉलर से बढ़कर 3000 डॉलर हो गया था।"

Main
Points
चीन ने DCEP नाम से अपनी डिजिटल करेंसी चालू करने का फैसला लिया है
शुरुआत में केवल सिविल सर्वेंट और बड़े व्यापारियों को इसके इस्तेमाल की दी जाएगी इजाज़त
सरकारी कर्मचारी अपने स्मार्टफोन में एप इंस्टाल कर हर महीने डिजिटल करेंसी ट्रांसफर करवा सकते हैं: चीन

डिज़िटल करेंसी शुरु करने के पीछे क्या तर्क दे रहा है चीन

THE WALL STREET JOUNAL के मुताबिक –चीन के केन्द्रीय बैंक के गवर्नर यी गैंग का कहना है कि- “डिज़िटल करेंसी लाने का मकसद चीन के मुद्रा आधार या नकदी के सर्कुलेशन को बदलना है, इसका बैंक डिपोज़िट्स और निजी तौर पर चलने वाले पेमेंट्स प्लेटफॉर्म पर कोई असर नही होगा।” वहीं चीन के केन्द्रीय बैंक के अनुसंधान संस्थान ने कहा कि बींजिग में 2022 में शीतकालीन ओलम्पिक की तैयारी के लिए भी डिज़िटल करेंसी को शुरु किया जा रहा है। शुरूआत में इस करेंसी को पूरे देश में या बड़ी मात्रा में जारी नही किया जाएगा, जिससे इसकी टैस्टिंग के वक्त बढ़ने वाली मंहगाई की आशंका से भी बचा जा सकेगा। शुरु में केवल सिविल सर्वेंट और कुछ फेमस व्यापारियों को ही इस करेंसी के इस्तेमाल की इजाज़त दी जा सकती है।“ 

चीन के केन्द्रीय बैंक ने इस करेंसी को लॉच करने के बारे मे कहा कि इससे सरकार के संचालित डिज़िटल भुगतान प्रणाली में बदलाव से मनी लान्ड्रिंग, जुआ और टेरर फंडिंग से निपटने में भी मदद मिलेगी। दरअसल, चीन के 4 सबसे बड़े सरकारी बैंक डिज़िटल करेंसी को विकसित करने के लिए केन्द्रीय बैंक से जुड़े हैं। साथ ही, इस करेंसी की शुरुआती टैस्टिंग बींजिंग के चार बड़े शहरों शेन्ज़ेन , सूज़ौ, चेंग्दु और ज़्यानोंग में की जाएगी।

क्या होती है डिज़िटल करेंसी

दरअसल डिज़िटल करेंसी को कोई सरकार या सेंट्रल बैंक नही छापता है, यह करेंसी ऑनलाइन काम करती है, जैसे बिटकॉइन को कोई सरकारी बैंक नही छापते। बता दें, कि माइक्रोसॉफ्ट और एक्सपीडिया जैसी वैश्विक कंपनियाँ बिटकॉइन में लेन-देन करती हैं। यह एक वर्चुअल टोकन की तरह काम करता है। दुनियाभर में अब तक 6000 डिज़िटल करेंसी हैं, जिनमें सबसे फेमस बिटकॉइन है, भारत में भी कईं लोग बिटकॉइन के ज़रिये लेन-देन करते है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी बिटकॉइन को कानूनी करार दे दिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि डिज़िटल करेंसी होने के कारण धोखाधड़ी की गुंज़ाइश कम होती है, दूसरी बात क्रिप्टोकरेंसी में मुनाफा काफी होता है। ऑनलाइन खरीददारी के दौरान लेन-देन भी आसानी से होता है।

Tags:
China   |  digital   |  currency   |  DCEP

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