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कोरोना फैलाने की चाइनीज़ 'साजिश', जानवरों के निर्यात पर दी छूट


Manmeet Singh
Manmeet Singh | 14 Apr, 2020 | 9:17 am

चीन से फैले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में मौत का तांडव मचा रखा है। अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के 185 देशों में 18 लाख से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 1 लाख से ज्यादा लोग मौत के मुंह में समा गए हैं। इसके बावजूद चीन सुधरने को तैयार नहीं है। अंग्रेजी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक चीन जानवरों के निर्यात पर कर में रियायत देने की तैयारी कर रहा है । अखबार की मानें तो चीनी अधिकारी अब अपने घरेलू व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद  सांप, कछुए, बीवर, चमगादड़ ,कीवी  जानवरों के उत्पादों के निर्यात पर  छूट दे रहे हैं।

Main
Points
चीन में जानवरों के निर्यात पर टैक्स में छूट
कोरोना जैसा वायरस फैलने का अंदेशा
घरेलू बाजार में जानवरों के व्यापार पर है रोक
जानवरों के व्यापार पर पूर्ण रोक की मांग

गौरतलब है कि कोरोनावायरस की शुरुआत दिसंबर के आखिरी हफ्तों में चीन से हुई थी। इसके लगातार प्रसार को देखते हुए 24 फरवरी को चीन ने घरेलू बाजार में जानवरों के खरीद-फरोख्त और व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था। शेनज़ेन ऐसा करने वाला चीन का पहला शहर था।

क्या कहते हैं शोध

हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभी तक कोरोनोवायरस के प्रकोप के सटीक कारण की पहचान नहीं की है लेकिन मरीज के नमूनों के आधार पर वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी द्वारा किए गए एक अध्ययन में चमगादड़ का कोरोनावायरस के साथ 96% आनुवंशिक मैच पाया गया। एक अन्य चीनी अध्ययन ने सुझाव दिया कि वुहान बाजार में बिकने वाले सांप स्रोत थे। "

अनुसंधानों के मुताबिक़ पैंगोलिन उन वायरसों का कैरियर हो सकता है जिनमें से एक वायरस के चलते कोविड-19 संक्रमण हो सकता है। हालांकि नेचर जर्नल में प्रकाशित एक आलेख के मुताबिक़, कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने में पैंगोलिन की भूमिका की पुष्टि नहीं हो सकी है।

चिंतनीय विषय

घरेलू बाजार में जानवरों के व्यापार पर रोक लगाने के बाद उनके निर्यात पर छूट- चीन के इस दोहरे मापदंड से दुनिया को घातक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। वर्तमान स्थिति से ही दुनिया के देश उबर नहीं पाए हैं ऐसे में जानवरों के मांस का निर्यात स्थिति को और खराब कर सकता है। गौरतलब है कि SARS और MERS जैसी महामारियां भी सांप और चमगादड़ सरीखे जानवरों से ही इंसानों में फैली थीं जिसकी वजह से चीन में जानवरों के व्यापार पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया गया था।

चीन में जानवरों का इस्तेमाल

बर्डिंग बीजिंग के संस्थापक और वन्य जीव संरक्षण कंसल्टेंट के तौर पर चीन में कार्यरत टैरी टाउनशैंड बताते हैं, "वन्य जीव उत्पादों वाली दवाइयां बहुत फ़ायदेमंद होती हैं, इसकी वैज्ञानिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है लेकिन परंपरागत व्यवस्थाओं पर लोगों का भरोसा काफ़ी मज़बूत है।

2017 में चाइनीज़ एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग के एक रिसर्च के मुताबिक़ ऊदबिलाव, रैकून, कुत्ते और लोमड़ी में क़रीब 75 प्रतिशत वन्य जीवों का इस्तेमाल उनके खाल के लिए किया जाता है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार एक्ट एशिया के सह-संस्थापक और सीईओ पेई एफ सू बताते हैं, "2018 में क़रीब पाँच करोड़ जानवरों को उनके चमड़े के लिए मार डाला गया. इन्हीं ऊदबिलाव, रैकून कुत्ते और लोमड़ियों को कै़द में रखकर उनकी ब्रीडिंग कराई जाती है ताकि उनसे फर और चमड़ा हासिल किया जा सके और बाद में उनके मांस की बिक्री की जाए।"

भालूओं के गॉल ब्लैडर से पित्त रस निकाला जाता है जिसका इस्तेमाल परंपरागत चीनी दवाईयों में होता है। बाघ, भालू और अजगर के अलावा चीन में बड़े पैमाने पर मगरमच्छ और सैलामैंडर्स जैसे वन्य जीवों की भी ब्रीडिंग कराई जाती है।

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