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प्रवासी मज़दूरों की वापसी का किराया देगी कांग्रेस

रेल मंत्रालय के इस बयान पर कि प्रवासी मज़दूरों के लिए चलाई गई ट्रेन टिकट का किराया मज़दूरों से ही वसूला जाये इस पर कांग्रेस अध्यक्ष ने उनका किराया भरने की बात कही

Archna Jha
Archna Jha | 04 May, 2020 | 11:32 am

कोरोना मे लागू लॉकडाउन की वजह से मज़दूर आजीविका कमाने के चलते एक लम्बे समय से अपने घरों से दूर किन्ही दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। अब जब उन्हे अपने घर जाने की इजाज़त मिली है, तो केन्द्र सरकार ने यह कहकर कि किराये का सारा खर्च इन मज़दूरों से ही वसूला जाएगा मानों उन के जख्मों पर और नमक छिड़कने जैसा काम कर दिया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों के बीच काफी बहसबाज़ी होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने इस विषय पर एक बढ़ा फैसला लिया है जिसके मुताबिक अब कांग्रेस पार्टी इन ज़रुरतमंद मज़दूरों के रेल के टिकट का खर्चा उठाएगी।

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रेल मंत्रालय का राज्य सरकारों के लिए बयान, प्रवासियों से ही रेल के किराये की वसूली की जाए
जब विदेश में फंसे भारतीयों की वापसी का किराया नही मांगा गया, तो मज़दूरों से क्यो: सोनिया गांधी

क्या है श्रीमती सोनिया गांधी का इस बारे में बयान

प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए एंव मज़दूरों के रेल खर्च पर बयान देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि –“भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह फैसला लिया है कि प्रदेश कांग्रेस की कमेटी की हर इकाई हर ज़रुरतमंद, श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे में आगे भी ज़रुरी कदम उठायेगी। जब हम विदेश में फंसे हुए भारतीयों को बिना कोई खर्च मांगे वापिस ला सकते हैं, गुजरात में एक कार्यक्रम में सरकारी ख़जाने से 100 करोड़ खर्च कर सकते हैं इतना ही नही अगर रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री राहत कोष से 151 करोड़ रुपये दे सकता है तो फिर मुश्किल वक्त में मज़दूरों के साथ ही ये भेदभाव क्यों? क्या मज़दूरों के किराये का खर्च उठाना आवश्यक नही?”

क्या है पूरा मामला

दरअसल 24 मार्च को जब लॉकडाउऩ लागू हुआ था, तब लाखों की संख्या में मजदूर जहां पर थे वहीं फसें रह गए। अब 40 दिन बाद उनकों जाने की इजाज़त मिली है, राज्य सरकारों के निवेदन पर केन्द्र सरकार ने इसके लिए स्पेशल ट्रेन की मंज़ूरी भी दे दी है, लेकिन इस दौरान मज़दूरों के किराये का वहन राज्य सरकारें ही उठाएंगी जो कि मज़दूरों से ही लिया जाएगा। रेल मंत्रालय के इस फैसले की काफी आलोचना की गई है, ना सिर्फ राजनीतिक दल और राज्य सरकारों ने इसका विरोध किया है बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी कड़ी आलोचना हो रही है। ऐसे में सोनिया गांधी ने कहा है कि- “केन्द्र और राज्य सरकारों से मांग की थी कि प्रवासी मज़दूरों से किराया न लें, लेकिन उन्होनें ध्यान नही दिया”

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