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दोहरे संकट में फंसे डॉक्टर! इलाज भी करें और दुर्व्यवहार भी झेलें!


Manmeet Singh
Manmeet Singh | 03 Apr, 2020 | 5:38 pm

कोरोना वायरस के फैलते ही दुनिया तबाही के मुहाने पर आ खड़ी हुई है। खुद को उन्नत और सर्वश्रेष्ठ बताने वाले मुल्क भी आज बेबस और लाचार है। इटली, स्पेन, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे विकसित देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था भी चरमरा गई है।

Main
Points
भारत में भी डाक्टर कोरोना से संक्रमित
पीपीई की देश में भारी कमी
चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें आई सामने

डॉक्टर ही बीमार पड़ गये तो आगे क्या!

बीमारों का इलाज तो चिकित्सक कर देंगे लेकिन अगर इन्हें कुछ हुआ तो आगे क्या? ये सवाल इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमितों का इलाज करते वक़्त डॉक्टर भी संक्रमित हुए है। यह मुद्दा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक के हिसाब से इटली और अमेरिका जैसे देशों में उपलब्ध डॉक्टरों की संख्या औसत से अधिक है इसके बावजूद वहां स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो रही है। ऐसे में औसत से भी नीचे वाले चिकित्सीय ढांचे के साथ भारत कब तक और किस हद तक इस महामारी से लड़ पाएगा।

संक्रमण से बचने का साधन हैं डॉक्टरों के पास!

इस वक़्त पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) ही चिकित्सकों को इलाज के दौरान कोरोना के संक्रमण से बचा सकता है। ईबोला के वक़्त पीपीई की कमी से ही अफ्रीकी देशों में काफी चिकित्सकों की मौत हुई थी। अकेले चीन में इस महामारी के कारण 1700 से ज्यादा डॉक्टर कोरोना से संक्रमित पाए गए। भारत में भी डॉक्टरों के संक्रमित होने की खबरें आने लगी है।

पीपीई की सबसे ज्यादा जरुरत कोरोना संक्रमितों का इलाज़ कर रहे फ्रंट लाइन डॉक्टरों को पड़ती है। पीपीई में फेस शील्ड, मास्क, ग्लव्स, एवं पूरे बदन को ढकने वाले परिधान होते है। देश में इसकी भारी कमी है क्योंकि इन सामानों के लिए हम दूसरे देशों पर निर्भर थे और महामारी के कारण मेडिकल इक्विपमेंट की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ी है जिससे इसकी कमी हर देशों में है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च महीने में देश को 7.25 लाख बॉडी सूट, 65 लाख N-95 मास्क व 1 करोड़ 3 लेयर मास्क की आवयश्यकता थी। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट को माने तो मेडिकल इक्विपमेंट की मांगो को 25 से 30 दिनों में पूरा कर लिया जायेगा।

सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं सुरक्षा उपकरण

कम नमूनों की जाँच की बात तो अक्सर की जा रही है लेकिन जो स्वास्थ्य कर्मी जाँच करने में लगे हुए है क्या उनकों उचित सुरक्षा के साधन उपलब्ध कराए गए है। पुरे देश में 113 सरकारी और 47 प्राइवेट लैब सैंपल की जांच के लिए बनाये गए हैं। प्राइवेट लैब में लाल पैथ जैसे बड़े लैब के पास तो समुचित सुविधा उपलब्ध है पर समस्या सरकारी जांच केन्द्रों के साथ है। चूँकि मरीज़ के संपर्क के बिना कार्य संभव नहीं है इसलिए इन्हे उपकरणों की अत्यधिक आवश्यकता है।

समस्या यहीं तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की भी खबरें सामने आयी है। इंदौर में जाँच के लिए गए स्वास्थ्यकर्मियों पर स्थानीय लोगों ने पत्थरबाज़ी की।

इलाज भी करें और दुर्व्यवहार भी सहें डॉक्टर

ऐसी मुश्किल घड़ी में स्वास्थ्यकर्मियों को समाज की दुर्भावना का भी सामना करना पड़ा है। दिल्ली समेत देश के तमाम हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आ रही है जिनमें स्वास्थ्यकर्मियों से दुर्व्यवहार देखने को मिला है। दिल्ली में हॉस्टल में रह रही आईसीयू में काम करने वाली नर्स को कमरे में बंद कर ड्यूटी जाने से रोका गया। वहीं कई डॉक्टरों को हाउसिंग सोसाइटी द्वारा मकान खाली करने को भी कहा गया।

ऐसी घटनाएं बेहद शर्मनाक है। एकतरफ जहां डॉक्टर अपनी जान की परवाह किये बगैर अपना धर्म निभा रहे हैं। सीमित संसाधनों के साथ काम करने को मजबूर हमारे डॉक्टरों को हम केवल नैतिक समर्थन ही दे सकते है लेकिन एक समाज के तौर पर हम उसमें भी विफल हो रहे है।

Tags:
Corona Virus   |  equipment   |  shortage   |  doctor

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