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कोरोना वायरस का घर बने तब्लीगी जमात का क्या है इतिहास, दुनिया का क्या रिश्ता है जमात से!


Ankit Mishra, Manmeet Singh
Ankit Mishra, Manmeet Singh | 02 Apr, 2020 | 6:16 pm

दिल्ली का निज़ामुद्दीन इलाक़ा आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। ये इलाक़ा सुर्ख़ियों में तब आया जब निज़ामुद्दीन में मौजूद तब्लीगी मरकज में शामिल जमातियों में 24 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। पिछले 24 घंटे में बढ़े कोरोना संक्रमित मामलों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने तब्लीगी जमात को जिम्मेदार ठहराया है।

Main
Points
बढ़ते कोरोना मामलों के लिए तब्लीगी जमात जिम्मेदार- हेल्थ मिनिस्ट्री
भारत सहित अन्य देशों में भी हो रहा है विरोध
दुनिया भर के 140 से ज्यादा देशों में है केन्द्र
भारत में ही 1926 में हुई थी तब्लीगी मरकज की स्थापना

इस जमात का विरोध सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी हो रहा है। तब्लीग़ी जमात ने फरवरी में एक धार्मिक आयोजन मलेशिया की मस्जिद में कराया था। ऐसा माना जा रहा है कि इस आयोजन में आए लोगों से दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैला। 

मलेशिया में कोरोना संक्रमण के कुल जितने भी मामले पाए गए हैं उनमें से ज़्यादातर लोग तब्लीगी जमात के आयोजन का हिस्सा रहे थे। ब्रुनेई से इस मस्जिद के आयोजन में शामिल हुए कुल 40 में से 38 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं।

सिंगापुर, मंगोलिया समेत और भी कई देशों में इसके आयोजन से कोरोना फैला है। पाकिस्तान से आई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ तब्लीग़ी जमात के आयोजन में शामिल कई लोगों में भी कोरोना संक्रमण पाया गया है।

क्या है तब्लीगी जमात

एक अनुमान के मुताबिक यह जमात विश्व की सबसे बड़ी मुसलमानों की संस्था है। इसके केन्द्र 140 से ज्यादा देशों में हैं। भारत के भी सभी बड़े शहरों में इसके सेन्टर हैं। मरकज़ का शाब्दिक अर्थ होता है केंद्र, तब्लीगी का मतलब है अल्लाह, तो वही जमात का अर्थ होता है समूह। तब्लीगी मरकज़ का मतलब एक ऐसे केंद्र से है जो इस्लाम की बात दूसरे मुसलमानों तक पहुंचाने का काम करता है। जमातियों का मकसद आम मुसलमानों के विश्वास और आस्था को पुनर्जीवित करना है। इसके केंद्र में पोशाक और व्यक्तिगत व्यवहार शामिल है।

मरकज़ का इतिहास

तब्लीगी जमात की स्थापना भारत में 1926-27 के दौरान हुई। एक इस्लामिक स्कॉलर मौलाना मुहम्मद इलियास ने इस जमात की बुनियाद रखी थी। परंपराओं के मुताबिक़ मौलाना मुहम्मद इलियास ने अपने काम की शुरुआत दिल्ली से सटे मेवात में लोगों को मज़हबी शिक्षा देने के ज़रिए की। बाद में यह सिलसिला आगे बढ़ता गया।

इसकी पहली सभा 1941 में आयोजित हुई थी जिसमें 20 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए । शुरूवाती दौर में जमात का काम-काज भारत तक सीमित था लेकिन बाद में इसका प्रचार-प्रसार दुनिया के अन्य देशों में फैल गया इसमें इंडोनेशिया, सिंगापुर, मलेशिया, ब्रिटेन, अमेरिका सहित तमाम देश शामिल हैं।

क्या है उद्देश्य?

तब्लीगी जमात मूलतः 6 आदर्शों  पर काम करता है। कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तब्लीग। इनका मतलब क्रमशः कलमा पढ़ना, 5 वक्त की नमाज़ अदा करना, इस्लामिक शिक्षा ग्रहण करना, मुस्लिम भाइयों का सम्मान करना, इरादों में ईमानदारी और इस्लाम का प्रचार करना।

क्या होता है मरकज़ में?

जमात के लोगों को छोटे-छोटे समूहों में बाँट दिये जाते हैं। हर समूह में दस लोग होते हैं जिनकी जिम्मेदारी लोगों को नज़दीकी मस्जिद तक पहुँचाने की होती है। सुबह और शाम को यह शहर की यात्रा करते है। सुबह के वक्त ये हदीस पढ़ते हैं और नमाज पढ़ने और रोजा रखने पर इनका ज्यादा ज़ोर होता है। इस तरह से ये अलग-अलग इलाकों में इस्लाम का प्रचार करते हैं और अपने धर्म के बारे में लोगों को बताते हैं।

निज़ामुद्दीन  मरकज़ के चलते वहां के सर्वेसर्वा मौलाना साद भी विवादों के केंद्र में रहे। दिल्ली पुलिस मौलाना साद की तलाश कर रही है। इससे पहले मौलाना का तथाकथित ऑडियो टेप भी वायरल हुआ था। गौरतलब है कि तब्लीगी जमात की शुरुआत मौलाना साद के पूर्वज ने की थी।

Tags:
Corona Virus   |  fightagainst corona   |  tabligijamaat   |  @nizamuddinmarkaz

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