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टिक-टॉक पर सरकार की नजर, कोरोना से जुड़ी अफवाहों के बनाये जा रहे हैं वीडियो


Ankit Mishra
Ankit Mishra | 06 Apr, 2020 | 6:28 pm

वीडियो स्टोरी भी देखें

इस समय जिस एक चीज़ के साथ इंसान सबसे ज्यादा समय बिता रहा वो है मोबाइल फ़ोन। लॉकडाउन में घर से बाहर निकल नहीं सकते इसलिए सोशल मीडिया और मनोरंजन से संबंधित तमाम एप्लीकेशन के सहारे लोग अपना समय काट रहें है। ऐसे में लोगों का समय तो कट रहा है लेकिन जाने-अनजाने उनका सामना कुछ ऐसे कंटेंट से भी हो रहा है जो झूठ प्रसारित कर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।

Main
Points
टिक-टॉक पर फैलाए जा रहे है झूठे वीडियो, दूरसंचार मंत्रालय ने तुरंत हटाने के दिए निर्देश
30 हजार वीडियो क्लिप्स की हुई जांच
कई वीडियो पाकिस्तान और मध्य पूर्व में किए गए हैं शूट
महाराष्ट्र में हुई टिक-टॉक वीडियो से संबंधित पहली गिरफ्तारी

कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में भी ऐसे हज़ारों की संख्या में वीडियो सामने आए है। इसी संबंध में दूरसंचार मंत्रालय ने टिक-टॉक और व्हाट्सएप को निर्देश दिया है कि वे अपने प्लेटफार्म से ऐसे सभी वीडियो तुरंत हटाएं जो एक खास समुदाय और वर्ग ने सोशल डिस्टेंसिंग के खिलाफ पोस्ट किए हैं।

क्या है मामला

इन दिनों टिक-टॉक पर कुछ ऐसे वीडियो क्लिप्स सामने आ रहे हैं जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को न मानने की हिदायत दी जा रही है। इन वीडियो क्लिप्स में किसी धर्म विशेष की कसम दिला कर विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार के कोरोना की रोकथाम के लिए जारी तमाम दिशा-निर्देशों को न मानने के लिए उकसाया जा रहा है।

टिक-टॉक दुनिया में 1 अरब से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है अकेले भारत में इस ऐप के 22 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड है। इस संख्या से आप इसकी पहुँच का अंदाज़ा लगा सकते हैं। छोटे कस्बों और गाँवों से लेकर बड़े शहरों के संपन्न वर्गों में भी इस ऐप के यूज़र हैं। इस ऐप के व्यापक पहुँच का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व कोरोना के खिलाफ मुहिम को कमज़ोर कर रहे हैं।

धर्म को बना रहे है हथियार

वॉयजर इंफोसेक की 30 हजार वीडियो पर की गई जांच में यह बात सामने आई कि इन वीडियो की सहायता से भारतीय मुस्लिमों के बीच गलत सूचना का प्रसार किया जा रहा है। वीडियो को अलग-अलग प्लेटफार्म की सहायता से 1 करोड़ से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है। जिस भी अकाउंट से यह वीडियो अपलोड हुए वह अकाउंट इन वीडियो के वायरल होने के बाद मिटा दिए गए। यह ख़ास पैटर्न लगभग सभी वीडियो में देखने को मिला।

नकली और संदिग्ध शोधों का हवाला देकर टिक-टॉक का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने के प्राथमिक माध्यम के रूप में किया जा रहा है। इसकी सहायता से यह झूठ फैलाया जा रहा है कि कोरोना वायरस मुसलमानों को प्रभावित नहीं करता है। इसमें यह तक दावा किया गया है कि चीन और इटली में एक भी मुस्लिम कोरोना से संक्रमित नहीं है।

सरहद पार की साज़िश?

इनमें से कई वीडियो पाकिस्तान और मध्य पूर्व में शूट किए गए हैं, लेकिन यह वीडियो भारत में हिंदी में ऑडियो को सुपरइम्पोज़ किया गया है। समस्या सिर्फ टिक-टॉक क्लिप्स की नहीं है बल्कि ये वीडियो आगे व्हाट्सएप,फेसबुक और ट्विटर पर भी शेयर किया जा रहा है। तब्लीगी जमात के मुद्दे से चर्चा में आये मौलाना साद के ऑडियो टेप भी खूब वायरल हो रहे हैं। शायद फैलाये गए इन्हीं झूठों की वजह से देश के तमाम हिस्सों से इंदौर जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

हरकत में आया सरकारी अमला

इस पूरी जांच की रिपोर्ट वॉयजर ने गृह मंत्रालय को सौंपी है। इस रिपोर्ट पर दिल्ली पुलिस भी 22 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर जांच कर रही है। देश में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से सामने आये हैं। महाराष्ट्र में टिक-टॉक वीडियो से संबंधित पहली गिरफ्तारी भी हुई है। महाराष्ट्र के मालेगाँव से नासिक में पुलिस ने 40 साल के युवक को ऐसे ही एक टिक-टॉक वीडियो बनाने के मामले में गिरफ्तार किया है। वीडियो में युवक नोट को चाटता और आपत्तिजनक धार्मिक टिप्पणी करता दिखाई दे रहा था।

हालाँकि ऐसा नहीं है कि टिक-टॉक पर केवल ऐसी ही नफरत फैलाने वाली वीडियो क्लिप्स है। टिक-टॉक का इस्तेमाल बहुत से यूज़र जागरूकता फैलाने के लिए भी कर रहे हैं। टिक-टॉक पर कोरोना और कोरोना वायरस हैश-टैग के साथ अपलोड हुई वीडियो को 50 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

Tags:
Corona Virus   |  fighta gainst corona   |  fakenews   |  tiktok

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