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WHO के खिलाफ बड़ा कदम उठा सकता है अमेरिका, क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप!


Ankit Mishra
Ankit Mishra | 09 Apr, 2020 | 7:53 pm

कोरोना महामारी से उत्पन्न हुए संकट के बीच इस समय वैश्विक मंच पर एक अलग प्रकार की ही बहस छिड़ी हुई है। जापान और ताइवान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व में मोर्चा खोल रखा है। इन देशों ने WHO पर चीन की सरपरस्ती का आरोप लगाया है। इन देशों के अनुसार अगर WHO कोरोना वायरस को लेकर सही सूचना सही समय पर जारी कर देता तो दुनिया महामारी से बच सकती थी।

Main
Points
WHO पर लगा चीन की सरपरस्ती का आरोप
अमेरिकी प्रशासन WHO को दिए जाने वाले वित्त पोषण पर करेगा विचार
WHO महानिदेशक ने कहा कि वायरस का राजनीतिकरण करने से बढ़ेगा मतभेद
अमेरिका में कोरोना संक्रमितों की संख्या 3 लाख 97 हजार, लगभग 15000 की गई जान

ट्रंप ने लगाए गंभीर आरोप  

अमेरिका के राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के साथियों ने WHO पर गंभीर आरोप लगाएं हैं।  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को अमेरिका की ओर से दिए जाने वाले वित्त पोषण पर वह रोक लगाएंगे। उन्होंने संगठन पर इस महामारी के दौरान सारा ध्यान चीन पर केंद्रित करने का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा कि, ‘‘जब मैंने यात्रा प्रतिबंध लगाया था तो वे उससे सहमत नहीं थे और उन्होंने उसकी आलोचना की थी। जबकि वे गलत थे। वे कई चीजों के बारे में गलत रहे हैं। उनके पास पहले ही काफी जानकारी थी और वे काफी हद तक चीन केंद्रित लग रहे हैं।’’

वित्तीय सहयता पर लग सकती है रोक

अमेरिकी प्रशासन WHO को दिए जाने वाले वित्त पोषण पर विचार करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार WHO इस महामारी से लड़ने में देशों की सहायता करने में नाकाम साबित हुआ है। ट्रंप ने कहा कि ‘‘हम उन्हें 5.8 करोड़ डॉलर से अधिक की धनराशि देते हैं। इतने वर्षों में उन्हें जो पैसा दिया गया है उसके मुकाबले 5.8 करोड़ डॉलर छोटा-सा हिस्सा हैं। कई बार उन्हें इससे कहीं ज्यादा मिलता है लेकिन हम अब इस पर विचार करना चाहते हैं।“

विश्व स्वास्थ्य संगठन को मिलने वाली कुल वित्तीय सहायता में से अमेरिका का योगदान सबसे ज़्यादा है। इस मामले में कोई भी अन्य देश उसके आस-पास भी नहीं ठहरता है।  2019 के चौथे क्वाटर में अमेरिका ने WHO को 553.1 मिलियन डॉलर की सहायता की थी जो कुल सहायता का 14.67 प्रतिशत है। वहीं चीन का योगदान मात्र 0.21 प्रतिशत रहा था जो भारत(0.48%) से भी कम है।

रिपब्लिकन नेताओं उठाई जांच की मांग

अमेरिकी संसद (सीनेट) के रिपब्लिकन नेताओं ने इस महामारी से लड़ने में WHO की भूमिका पर जांच की मांग की है। 24 सांसदों का एक समूह, सीनेट में WHO  की निधि रोकने के लिए प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। इन सांसदों ने WHO के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रेयसस का इस्तीफा माँगा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चीनी सरकार की नाकामी छिपाने में इस संगठन ने भूमिका निभाई है।

WHO ने दिया जवाब

WHO के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रेयसस ने कोरोना पर सियासत न करने की सलाह दी। महानिदेशक ने कहा कि वायरस का राजनीतिकरण करने से मतभेद बढ़ेगा। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय एकता के बिना कोरोना वायरस को नहीं हराया जा सकता है। इसी सन्दर्भ में उन्होंने अमेरिका और चीन से अपील की कि वे कोरोना वायरस महामारी से मिलकर निपटें।

हालाँकि ट्रंप को अपने देश में ही अपने बयान की वजह से सवालों का सामना करना पड़ रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और अमेरिकी मीडिया ने उनके बयान को अपनी विफलता छिपाने की कोशिश बताया। उनके अनुसार कोरोना संक्रमण को रोकने में बुरी तरह विफल ट्रंप प्रशासन, अपनी साख बचाने के लिए WHO को बलि का बकरा बना रहा है।

अमेरिका में कोरोना संक्रमितों की संख्या पूरे विश्व में सर्वाधिक 3 लाख 97 हजार है और मरने वालों की संख्या भी 15000 लाख के करीब पहुंच गई है।

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Corona Virus   |  USA   |  trump   |  who   |  China,

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