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बिहार में करोना का चुनावी मायाजाल


Akhilesh Akhil
Akhilesh Akhil | 04 May, 2020 | 6:39 pm

आर्थिक रूप से गरीब लेकिन राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से अमीर बिहारी समाज चुनाव के वक्त में कुछ ज्यादा ही भावुक हो जाता है। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते जाते हैं ,बिहार में गप्पबाजी कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। सरकार के छोटे छोटे कामों में भी बड़े बड़े घोटाले देखे जाने लगते हैं और हर सरकारी काम में जनता के साथ धोखा खोजा जाने लगता है। बिहार अभी इसी कगार पर खड़ा है। इसी माह के अंत में विधान सभा चुनाव होने हैं और नीतीश कुमार  के लगातार 15 साल तक मुख्यमंत्री बने रहने के बाद जदयू का लिटमस टेस्ट भी इस चुनाव में होना है। बिहार में चर्चा शुरू हो गई है कि अब नीतीश  कुमार को कितना झेला जाय ?  याद रहे बिहार में नीतीश कुमार जिस जाति  बिरादरी से आते हैं ,वह जाति नीतीश  की राजनीति के लिए नगण्य सी है। उस जाती का कोई बड़ा प्रभाव बिहार की राजनीति और खासकर किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री  की कुर्सी सौंप देने के लायक नहीं है। लेकिन नीतीश  कुमार 15  साल तक मुख्यमंत्री रहे।  जाहिर सी बात है कि नीतीश  कुमार की राजनीति  जाति  से आगे की है। उनकी पैठ हर जाति  में है।  बिहार के लोग उन्हें विकास पुरुष  और सुशासन बाबू के रूप में जानते रहे हैं। और उनकी यही राजनीति  उनकी जातिगत वोट ना होते हुए भी उन्हें  और नेताओं से अलग कर देती है। कह सकते हैं कि नीतीश कुमार का अपना एक औरा  है और अपनी एक छवि भी।

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Points
लगातार 15 साल तक मुख्यमंत्री बने रहने के बाद जदयू का लिटमस टेस्ट भी इस चुनाव में होना है
बिहारी मजदूरों को लाने के लिए राजद देगी 50 ट्रेनों का किराया
तेजस्वी यादव ने दिया बड़ा बयान

लेकिन इस चुनाव में क्या नीतीश कुमार अपनी छवि को फिर से भुना पाएंगे ? कहना मुश्किल है। नीतीश के साथ बीजेपी भी है। लोकसभा चुनाव में दोनों ने साथ लड़ा और विपक्ष को परास्त किया। लेकिन क्या विधान सभा चुनाव में भी वे विपक्ष को परास्त कर  पाएंगे? अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। करोना वायरस का असर देश में नहीं रहता तो बिहार की राजनीति से दिल्ली गूंजती रहती और और राष्ट्रीय मीडिया को हर रोज कोई न कोई बड़ी पोलिटिकल स्टोरी मिलती रहती। लेकिन करोना ने बिहार की राजनीति को ख़त्म कर दिया। लेकिन अब जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं बिहार के नेता करोना के जरिए ही अपनी राजनीति को चमका रहे हैं।

इधर राजद नेता तेजस्वी यादव का एक बड़ा बयान आया  है। राजद नेता का यह बयान दूसरे राज्यों में फसे बिहारी मजदूरों और छात्रों को अपने गृह राज्य में लाने को लेकर आया है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि वह बिहारी मजदूरों को लाने के लिए 50 ट्रेनों का किराया देने को तैयार हैं।  तेजस्वी ने कहा कि आरजेडी शुरुआती तौर बिहार सरकार को अपनी तरफ से 50 ट्रेन देने को तैयार है। सरकार पांच दिनों में ट्रेनों का बंदोबस्त करें।  पार्टी इसका किराया तुरंत सरकार के खाते में ट्रांसफर करेगी।

तेजस्वी के इस बयान में बिहारी मजदूरों के लिए पीड़ा भी है और राजनीति भी।  पीड़ा यह है कि दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में गए लोग करोना के इस संकट में अपने घर वापस आ जाए। अपने परिवार के साथ रहे। और राजनीति ये है कि इस तरह की जनसेवा के बदले जनता राजद को वोट दे। बता दें कि लालू प्रसाद के जेल जाने के बावजूद आज भी राजद का एक बड़ा वोट बैंक कायम है और थोड़ी कमजोरी के साथ राजद का माय समीकरण भी कारगर है। राजद हर हाल में इस बार के चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने की तैयारी में है।

उधर बिहार में चुनावी खेल कई और राजनीतिक दलों के जरिये भी जारी है। जनाधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव भी बड़े स्तर पर देश के कई राज्यों में फसे बिहारी छात्रों को वापस लेन के लिए बसे भेजने का ऐलान किया है और कई जगहों पर भेजा भी है। पप्पू यादव इस तरह का काम अक्सर करते भी रहते हैं। कह सकते हैं कि करोना  देश दुनिया और मानवता के लिए  अभिशाप भले ही है ,राजधारियों के लिए यह एक मौक़ा भी है।

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Covid-19   |  Lockdown   |  Bihar   |  Politics   |  CM   |  Nitish   |  Tejaswi Yadav

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