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एयर इंडिया की नीलामी पर कोरोना का ग्रहण

आज एयर इंडिया पर कुल 60,074 करोड़ का कर्ज है। जिसमें इस नीलामी से मिले सफल खरीदार को कुल कर्ज में से 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज की जिम्मेदारी लेनी होगी। वहीं बाकी के करीब 37 हजार करोड़ रुपए के कर्ज की जिम्मेदारी खुद सरकार की होगी।

Ankit Mishra
Ankit Mishra | 29 Apr, 2020 | 3:27 pm

कोरोना संकट के कारण पूरे विश्व में आर्थिक गतिविधियों पर ताला लगा हुआ है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की समय सीमा को 30 जून तक बढ़ा दिया है। कर्ज में डूबी इस विमानन कंपनी को बेचने की कोशिश सरकार 2018 से ही कर रही है पर अभी तक इसमें सफलता नहीं मिली है।  

Main
Points
एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की समय सीमा को 30 जून तक बढ़ाया
नीलामी की समयसीमा को दूसरी बार बढ़ाया गया
कंपनी के नीलामी की प्रक्रिया 27 जनवरी को शुरू हुई थी

केंद्र सरकार ने एयर इंडिया में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया 27 जनवरी को शुरू की थी लेकिन तब से इस कंपनी के नीलामी में बोलियां लगाने की समयसीमा को दूसरी बार बढ़ाया गया है। 27 जनवरी को जारी हुए ज्ञापन में नीलामी की बोलियां 17 मार्च तक मंगाई गई थीं।  हालांकि बाद में कोरोना संकट की वजह से इसे बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया और अब इस समयसीमा को फिर बढ़ाया गया है। 

निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग ने एअर इंडिया की बिक्री के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट का ज्ञापन जारी करते हुए कहा कि इस हालात के मद्देनजर इच्छुक बोलीदाताओं (Interested Bidders ) के अनुरोध पर समय सीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है। योग्य इच्छुक बोलीदाताओं (QIB) को सूचित करने की तारीख को भी 2 महीने के लिए बढ़ाकर 14 जुलाई कर दिया गया है।  तिथियों को लेकर अगर कोई अन्य महत्वपूर्ण बदलाव किया जाता है तो इच्छुक बोलीदाता को सूचित किया जाएगा।

1953 में सरकार के स्वामित्व में आने वाली इस कंपनी की शुरुआत 1932 में टाटा ग्रुप ने की थी। जेआरडी टाटा के समय शुरू हुई इस विमान सेवा की पहली फ्लाइट कराची से मुंबई के लिए थी जिसे खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी। 1946 में इसका नाम बदलकर एअर इंडिया रखा गया। पहले घरेलु उड़ानों के लिए इंडियन एयरलाइन्स और अंतर्राष्टीय उड़ानों के लिए एअर इंडिया बनाई गई थी लेकिन दोनों कंपनियों के ज्वाइंट एंटरप्राइज के तौर पर वायुदूत कंपनी शुरू हुई जो रीजनल फीडर कनेक्टिविटी देती थी। कंपनी पर कर्ज तब बढ़ा जब 1993 में वायुदूत का इंडियन एयरलाइन्स में मर्जर हो गया। 

आज एयर इंडिया पर कुल 60,074 करोड़ का कर्ज है। जिसमें इस नीलामी से मिले सफल खरीदार को कुल कर्ज में से 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज की जिम्मेदारी लेनी होगी। वहीं बाकी के करीब 37 हजार करोड़ रुपए के कर्ज की जिम्मेदारी खुद सरकार की होगी।

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Corona airIndia   |  auctio

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