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लॉकडाउन से बढ़े मानसिक रोगी, WHO ने जारी किए ये निर्देश


Riya Rai
Riya Rai | 02 Apr, 2020 | 1:39 pm

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चीन के वुहान से उत्पन्न कोरोना वायरस ने दुनिया भर में हाहाकार मचा रखा है। भारत में भी कोरोना से संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इस वायरस से क़रीब 1700 लोगों के संक्रमण के मामले सामने आए हैं। कोरोना वायरस का असर लोगों के मानसिक दशा पर भी हो रहा है। भारत में जब से इस वायरस ने दस्तक दी है तब से मनोरोगियों की संख्या मे लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। देश में मनोचिकित्सकों के एसोसिएशन इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी के सर्वे के मुताबिक मानसिक रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ गई है। सर्वे के अनुसार मानसिक मरीजों की संख्या एक हफ्ते के अंदर बढ़ी है और इसका कारण वैश्विक महामारी हो सकता है। देश में मनोरोगियों की संख्या में बढ़ोतरी का कारण लोगों में लॉकडाउन के चलते बिजनेस, नौकरी, कमाई, बचत और यहां तक कि मुलभूत संसाधन खोने का डर भी माना जा रहा है।

Main
Points
मनोचिकित्सकों के मुताबिक कोरोना से मानसिक रोगियों में 20% की बढ़ोतरी
हर 5 में से 1 भारतीय मानसिक रोग का शिकार
दुनियाभर के हेल्थ वर्कर्स में 1% मेंटल हेल्थ वर्कर
भारत में करीब 1700 लोग कोरोना से संक्रमित हैं
WHO ने मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के दिए सुझाव

सर्वे में हर 5 में से 1 भारतीय मानसिक रोग का शिकार

इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च के मुताबिक हर पांच में से एक भारतीय किसी न किसी मानसिक रोग का शिकार है। कोरोना के बाद मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है तो इसके लिए जागरूकता और सुविधाएं दोनों की ही कमी को जिम्मेदार माना जा सकता है और यह देश के लिए चिंता का विषय है। जानकारी के मुताबिक दुनियाभर में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में से केवल एक प्रतिशत ही स्वस्थ कर्मचारी मेंटल हेल्थ के इलाज से जुड़े हैं। ऐसे में अगर भारत की बात करें तो भारत में इसका आंकड़ा और भी कम है।

कोरोना के कहर के डर से देश लॉकडाउन है। लोग सीमित संसाधनों के साथ घरों में रहने और अकेले जीने को मजबूर हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना और भी जरूरी है।

जानिए कैसे पहचानें मानसिक रोगियों को

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी महामारी की स्थिति में लोगों को अनिश्चितता महसूस होती रहती है। अकेलापन इन बातों को और भी बढ़ा देता है। ऐसी विचार और भावनाएं एंग्जाएटी डिसॉर्डर में बदलने लगती है। कोरोना के वजह से एंगजाएटी डिसॉर्डर या पैनिक अटैक की पहचान आप इन लक्षणों को देखकर कर सकते हैं-

बार-बार तथ्य और आंकड़े जांचते रहना

नींद नहीं आना और ये सोचते रहना कि कुछ बुरा हो सकता है

लगभग हर बात को लेकर खुद को दोषी ठहराना

बीती बातों को बार-बार याद करना

बहुत भूख लगना और एक साथ ही बहुत सारा खाना 

कपकपी होना, किसी बात में ध्यान नहीं लगता है

WHO ने जारी की गाइडलाइन

1. लॉकडाउन के दौरान दुख, तनाव, भ्रम, डर और गुस्सा महसूस करना सामान्य है। जिनपर विश्वास करते हैं, उनसे बात करने से मदद मिल सकती है।

2. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं।

3. अच्छी डाइट, पर्याप्त नींद, रोजाना एक्सरसाइज बहुत जरूरी है।

4. ऐसे समय में स्मोकिंग, शराब या अन्य ड्रग्स को सहारा ना बनाएं।

5. भावनात्मक उथल-पुथल से जूझ रहे हैं तो मेडिकल काउंसलर से संपर्क करें। 

6. उन स्किल्स का इस्तमाल करें जिससे आपको जीवन मे पहले भी बुरी स्थिति का सामना करने में मदद मिली हो। इससे महामारी वाली स्थिति में अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

दुनिया भर में कोरोना के वजह से क़रीब 48 हजार लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 10 लाख लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इसलिए लॉकडाउन और क्वारंटीन के समय में धैर्य रखना, सामाजिक दूरी बरतना और अपने रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाना कोरोना संक्रमण से मुक्ति के लिए बहुत जरूरी है। अनावश्यक बाहर ना जाएं और स्वस्थ्य रहें और कोरोना को हराने में घर बैठे अपना योगदान दें।

Tags:
Indian   |  psychiatric   |  society   |   Corona effect   |  Mental health   |  WHO   |  EXPERTS

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