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चीन से कोरोना फैलने के लिए WHO जिम्मेदार? समिति ने लगाई सवालों की झड़ी!


Ankit Mishra
Ankit Mishra | 16 Apr, 2020 | 4:59 pm

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कोरोना महामारी के बीच अमेरिका और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के बीच तकरार लगातार बढ़ती जा रही हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने WHO पर चीन की सरपरस्ती का आरोप लगा कर अमेरिका की तरफ से WHO को दी जाने वाली फंडिंग रोक दी है। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 8 अप्रैल को हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने WHO पर चीन के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।

Main
Points
अमेरिका की तरफ से WHO को दी जाने वाली फंडिंग रुकी
यूएस की निरीक्षण और सुधार कमेटी ने दिए जांच के निर्देश
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक को जांच समिति ने लिखा पत्र

समिति ने WHO से मांगी सफाई

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के एक दिन बाद ही अमेरीकी कांग्रेस (संसद) की निरीक्षण और सुधार कमेटी (Oversight and reform ) ने राष्ट्रपति के WHO पर लगाए आरोपों की जांच के निर्देश दिए। इसी सम्बन्ध में इस समिति ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम घेब्येयूसस को पत्र लिखा है। इस पत्र में समिति ने महानिदेशक पर 4 आरोप लगाए गए हैं साथ ही इस मुद्दे से संबंधित कुछ जरुरी कागजात भी उपलब्ध कराने की मांग की है। अमेरिका के ओवरसाइट एंड रिफार्म समिति की जांच में WHO से मांगे गए दस्तावेजों को समिति के सामने उपलब्ध कराने की आखिरी तारीख 16 अप्रैल यानि आज ही का दिन निर्धारित है।    

अमेरिका के WHO पर 4 आरोप

1. कम्युनिटी ट्रांसमिशन को छिपाया

अमेरिकी इंटेलिजेंस के अनुसार WHO ने चीन में कोरोना के कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात को छुपाया। ताइवान ने WHO को कम्युनिटी ट्रांसमिशन की जानकारी दिसंबर में दी थी पर WHO इस बात को टालता रहा। 14 जनवरी को ट्वीट कर इससे इंकार किया और अंततः 23 जनवरी को कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात स्वीकार की।

2. महामारी घोषित करने में की देरी

अमेरिका ने कोरोना वायरस को महामारी और अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने में देर करने का भी आरोप WHO पर लगाया। 30 जनवरी को WHO ने इसे PHEIC घोषित किया लेकिन तब तक विश्व में 10,000 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित और 1000 हजार से ज्यादा अपनी जान गवां चुके थे।

3. WHO लगातार गुमराह करता रहा

WHO ने इस महामारी को रोकने के लिए उठाये जाने वाले अत्यंत जरुरी कदमों को लागू कराने में देरी की। अमेरिका के अनुसार दूसरे देशों से आये संक्रमित व्यक्तियों से कोरोना के प्रसार के सबूत मिलने के बावजूद, यात्रा संबंधी दिशा-निर्देश जारी करना जरूरी नहीं समझा। 31 जनवरी को राष्ट्रपति ट्रंप के लगाए गए चीन पर ट्रेवल बैन की भी WHO ने आलोचना की थी। WHO के निष्क्रियता के कारण 31 दिसंबर से 31 जनवरी के बीच 4 लाख 30 हजार लोगों ने चीन से अमेरिका की सीधी यात्रा की। जिस कारण अमेरिका में कोरोना संक्रमण तेजी से फैला।

4. चीन ने मौत के आंकड़े छुपाए

चीन इस महामारी के इलाज और प्रसार से संबंधित गलत जानकारियां देता रहा। अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुताबिक चीन में कोरोना से संक्रमित मरीज़ों और संक्रमण से होने वाली मृत्यु की संख्या चीन के सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। चीन के झूठ के बावजूद WHO लगातार इस मामले में चीन की कम्युनिस्ट सरकार की सराहना करता रहा है।

मांगे कुछ अहम दस्तावेज़

इस जांच में सहयोग के लिए समिति ने WHO से कुछ दस्तावेज मांगे है। अगस्त 2019 से अभी तक WHO और चीन और ताइवान के बीच हुए कोरोना वायरस से संबंधित सारे कम्यूनिकेशन के दस्तावेज मांगे हैं।  इसके अलावा चीन से आये कोरोना संक्रमितों और उससे हुई मृत्यु के आंकड़ों से सम्बन्धित दस्तावेजों की भी मांग की है।

Tags:
WHO   |  us   |  Corona   |  China   |  donald trum

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