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डॉयचे वेले फ्रीडम ऑफ स्पीच अवॉर्ड 2020 - विजेताओं की घोषणा


PB Desk
PB Desk | 04 May, 2020 | 5:25 pm

डॉयचे वेले यानि डीडब्ल्यू हर साल दुनिया भर के उन पत्रकारों को सम्मानित  करता है जो फ्रीडम ऑफ़ स्पीच की वकालत करते हुए पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। इस साल 2020  के फ्रीडम ऑफ़ स्पीच अवॉर्ड विजेताओं की घोषणा डीडब्ल्यू ने की है। 2020  के ये प्रतिष्ठित अवॉर्ड उन पत्रकारों को देने की घोषणा की गई जिन्होनें मीडिया पर लगी पाबंदियों के बावजूद कोविड-19 पर शानदार रिपोर्ट किया है। बता दें कि  इस साल 14 देशों से 17 पत्रकारों को यह सम्मान दिया जा रहा है जिनमे एशिया के 6 पत्रकार शामिल हैं। भारतीय पत्रकार सिद्धराज वरदराजन का नाम भी अवॉर्ड पाने वाले पत्रकारों की सूचि में शामिल है।

Main
Points
डीडब्ल्यू ने की फ्रीडम ऑफ़ स्पीच अवॉर्ड विजेताओं की घोषणा
14 देशों से 17 पत्रकारों को मिला सम्मान
भारतीय पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन का नाम भी अवॉर्ड पाने वाले पत्रकारों की सूचि में शामिल

"द वायर" के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन "द हिंदू" अखबार के संपादक रह चुके हैं।  भारत में लॉकडाउन शुरू होने के बाद जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में पूजा की, तब द वायर ने इस खबर को छापा और कुछ दिन बाद उन्हें पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। वरदराजन पर  एफआईआर दर्ज हुई। वरदराजन का कहना है, "कोविड संकट एक जरिया बन गया है पूर्वाग्रहों को बढ़ावा देने का, पारदर्शिता को कम करने का और सांप्रदायिक राजनीति का इस्तेमाल कर लोगों को बांटने का। ''

चीन के चेन किउशी को भी यह पुरस्कार दिया जा रहा है। चेन की पहचान चीन के वकील, एक्टिविस्ट और सिटीजन जर्नलिस्ट के रूप में है। 2019 में इन्होंने हांगकांग में हुए प्रदर्शनों पर रिपोर्टिंग की।  प्रदर्शन के वीडियो पोस्ट करने के बाद उनका वाइबो अकाउंट डिलीट कर दिया गया और अक्टूबर में उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया। 2020 में उन्होंने वुहान से रिपोर्टिंग जारी रखी और ट्विटर और यूट्यूब पर डॉक्टरों से बातचीत को पोस्ट किया।  6 फरवरी को ये  अचानक गायब हो गए।  30 जनवरी को एक वीडियो में इन्होंने कहा था, "मुझे डर लग रहा है।  मेरे सामने बीमारी है और पीछे चीनी सरकार। लेकिन जब तक मैं जिंदा हूं, मैंने जो देखा और सुना है, वो मैं बोलता रहूँगा।

चीन के ही ली जेहुआ को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है।  बता दें कि सिटीजन जर्नलिस्ट ली चीन के सरकारी सीसीटीवी चैनल में एंकर हुआ करते थे। कोविड-19 के शुरुआती दौर में इन्होंने चैनल से इस्तीफा दे दिया और यूट्यूब, ट्विटर पर अपना वीडिया ब्लॉग शुरू किया।  26 फरवरी को ये गायब हो गए और 22 अप्रैल को एक वीडियो के साथ वापस लौटे।  वीडियो में इन्होंने कहा कि इन्हें क्वॉरंटीन किया गया था लेकिन जानकारों को इस पर शक है।

पुरस्कार पाने वालों में चीन के ही  फैंग बिन भी शामिल हैं। ये वुहान के सिटीजन जर्नलिस्ट। इनका वह वीडियो खूब वायरल हुआ जिसमें एक अस्पताल के बाहर कई शव बैग में बंद पड़े दिखे।  2 फरवरी को पुलिस ने इनका लैपटॉप जब्त कर लिया।  4 फरवरी को पुलिस ने इनके अपार्टमेंट में घुसने की कोशिश की लेकिन इन्होंने पुलिस को अंदर नहीं आने दिया। 9 फरवरी को ये गायब हो गए और सोशल मीडिया अकाउंट भी डिलीट कर दिया गया। इसके बाद चीन में अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रश्न उठने लगे।

पुरस्कार पाने वाले एशिया के अन्य पत्रकारों में शामिल हैं कंबोडिया के सोवान रीथी। ये हैं टीवीएफबी न्यूज वेबसाइट के अध्यक्ष हैं। इन्होंने प्रधानमंत्री हुन सेन के खिलाफ लिखा कि कोरोना संकट के बीच उनकी सरकार टैक्सी ड्राइवरों की मदद नहीं कर पा रही है।  इसके कारण इन पर अराजकता फैलाने और समाज के लिए खतरा बनने के आरोप लगाए गए और 7 अप्रैल को इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।  सूचना मंत्रालय ने चैनल का लाइसेंस भी रद्द कर दिया। आरोप साबित होने पर इन्हें दो साल कैद की सजा हो सकती है।

फिलीपींस के मारिया विक्टोरिया बेल्तरान को बी ही यह पुरस्कार दिया जा रहा है। बेल्तरान फिल्म अभिनेत्री हैं और लेखिका भी।  सेबू सिटी में बढ़ रहे कोरोना मामलों के बारे में इन्होंने फेसबुक पर एक टिप्पणी की।  इस पर शहर के मेयर ने लिखा, "यह फेक न्यूज है और आपराधिक है।  मिस बेल्तरान आपको जल्द ही साइबर क्राइम यूनिट पकड़ेगी और जेल में फेंक देगी। " 19 अप्रैल को साइबर क्राइम्स एक्ट के तहत इन्हें हिरासत में ले लिया गया।

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Covid-19   |  Lockdown   |  deutsche   |  wella   |  award   |  2020

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