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कोरोना संकट के बीच आईसीएमआर ने बनाई प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी

स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर के बीच मतभेद की खबरें आ रही हैं। इस बीच आईसीएमआर ने स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ होने वाली साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी बना ली। विपक्ष ने सरकार को घेरा है।

Ankit Mishra
Ankit Mishra | 02 May, 2020 | 1:42 pm

देश में तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर के बीच सब कुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है। पिछले दिनों में हुए घटनाक्रमों की वजह से यह माना जा रहा है कि केंद्र की इन दो प्रमुख इकाइयों के बीच कोरोना संक्रमण के मुद्दे पर आपसी मतभेद हैं। 

हफ्ते में 4 दिन होने वाली स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले एक हफ्ते से आईसीएमआर की तरफ से कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ है, जबकि इसके पहले तक आईसीएमआर की तरफ डॉ रमन गंगाखेड़कर शामिल होते आये थे। आईसीएमआर का प्रेस कॉन्फ्रेंस में आना इस लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता  क्योंकि आईसीएमआर द्वारा टेस्ट की संख्या और स्ट्रेटेजी से संबंधित दी गई जानकारी महत्वपूर्ण है।

 कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह समस्या अप्रैल के मध्य से शुरू हुई। पहले स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ आईसीएमआर भी कोरोना संक्रमित मरीज़ों के आंकड़े अपने वेबसाइट पर पब्लिश करता था। हालाँकि स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर के आंकड़े कभी एक समान नहीं रहे। आईसीएमआर के आंकड़े हमेशा स्वास्थ्य मंत्रालय से ज्यादा रहे हैं। इस अंतर पर पूछे गए सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय राज्यों के साथ समन्वय और जिलों से जमीनी स्तर की पुष्टि प्राप्त करने के बाद ही संख्या की रिपोर्ट करता है। जिस कारण इस प्रक्रिया से कभी-कभार पिछड़ जाता है।

18 अप्रैल को आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला था। आईसीएमआर की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 18 अप्रैल को देश में कोरोना संक्रमण के कुल मामले 16,365 थे और उसी दिन स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की 14,792 थी। इन दोनों के आंकड़ों में 1573 मरीज़ों का अंतर था। 

Main
Points
आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच मतभेद की खबरें
आईसीएमआर ने बनाई है एक हफ्ते से साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी
दोनों इकाइयों के आंकड़ों में है अंतर
पी चिदंबरम ने भी मामले पर उठाए सवाल

इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा। पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा कि राज्य सरकार, आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए पॉजिटिव मामलों की संख्या विवादास्पद और भ्रामक है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि वह स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए गए आंकड़े पर निर्भर रहते हैं लेकिन 18 अप्रैल के आंकड़ों में दोनों के बीच का अंतर 1573 केस का है। उन्होंने पूछा कि क्या स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर राज्यों की रिपोर्ट के साथ अपनी रिपोर्ट का मिलान कर हर दिन एक समान नंबर जारी कर सकते हैं?

हालाँकि अब आईसीएमआर ने भी अपनी वेबसाइट पर संक्रमित मरीज़ों की संख्या से जुड़ी जानकारी को देना बंद कर दिया है। 

देश में संक्रमित मरीज़ों की संख्या अब तेजी से बढ़ रही है। अप्रैल के शुरुआत में संक्रमित मरीज़ों की संख्या 2000 थी लेकिन अप्रैल के खत्म होते ही इसमें 30 हजार से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। अभी यह संख्या 37 हजार से भी ज्यादा पहुँच चुकी है। औसतन प्रतिदिन 1800 से ज्यादा नए कोरोना के मरीज़ सामने आ रहे हैं।

Tags:
ICMR   |  health   |  ministry   |  Corona Virus   |   P Chidambaram

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