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नाम तो बदला! काम कितना हुआ ?


Parliamentary Business Team
Parliamentary Business Team | 17 Mar, 2020 | 12:00 am

3 दिसम्बर 2015 को पहली बार 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांग शब्दावली को बदल कर दिव्यांग करने का प्रस्ताव रखा और सुझाव मांगे।  सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा मई 2016 में अधिसूचना जारी कर नाम बदल दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न मंचों से अक्सर दिव्यांग जनों की बात करते सुने जाते हैं।

Main
Points
दिव्यांगों के उत्थान और पुनर्वास को लेकर हुई लोकसभा में चर्चा
30 सांसदों ने दिव्यांगों के उत्थान को लेकर सरकार से पूछे प्रश्न
चलने-फिरने में पूर्णतः असमर्थ 15,581 नागरिकों को कानपुर में निर्मित मोटराइज़्ड साइकिलों के लिए सब्सिडी
पांच सालों में 8,852 शिविरों का आयोजन करके 15 लाख 22 हजार लोगों को 942.27 करोड़ की सामग्री बांटी
2,555 बोलने और सुनने में असमर्थ बच्चों को 6 लाख की सहायता पहुंचाई

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से सम्बंधित अनुदानों पर चर्चा का और लगभग 30 सांसदों के सवाल और सुझाव सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री थावर चंद्र गहलोत  वक्तव्य रख रहे थे । केंद्रीय मंत्री के वक्तव्य का अच्छा ख़ासा हिस्सा दिव्यांग जनों को समर्पित रहा। दिव्यांग जनों के उत्थान के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों गिनाते हुए केंद्रीय मंत्री ने सरकार की तमाम  उपलब्धियां गिनाई। केन्द्रीय मंत्री ने अपने भाषण में दीन दयाल उपाध्याय दिव्यांग पुनर्वास योजना समेत दिव्यांग छात्रवृत्ति एवं दिव्यांग उद्यमशीलता लोन तक का जिक्र किया।

केन्द्र सरकार की योजनाएं

केंद्रीय मंत्री के अनुसार पिछले पांच सालों में 8,852 शिविरों का आयोजन करके 15 लाख 22 हजार लोगों को 942.27 करोड़ की सामग्री बांटी गई। चलने-फिरने में पूर्णतः असमर्थ 15,581 नागरिकों को कानपुर में निर्मित मोटराइज़्ड साइकिलों के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराई गई। 2,555 बोलने और सुनने में असमर्थ बच्चों को 6 लाख की सहायता पहुंचाई गई, 2000 से ज्यादा बच्चे अब बोल सकते है।

दिव्यांगजनों के रोजमर्रा की ज़िन्दगी में सुगमता पहुंचाने के उद्देश्य पर बल देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री ने सदन को बताया कि 1,101 राज्य सरकारी भवनों समेत 991 केंद्र सरकारी भवनों को भी दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाने का काम किया गया है। इसके अलावा एयरपोर्ट एवं विमानों को भी इनके सुगमता के अनुसार ढाला जा रहा है। रेल मंत्रालय के सहयोग से रेलवे को भी दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाने के कार्य में तेज़ी जी लायी जा रही है।

दीन दयाल विकलांग पुनर्वास योजना (DDRS)

दिव्यागों को समान अवसर, समानता, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए सुगम वातावरण सृजित करने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना के बारे में बताते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा अभी भी देश में बहुत से ऐसे जिले हैं, जहां विकलांग व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए किसी प्रकार की कोई बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। मंत्रालय द्वारा देश के सभी जिलों में आधारभूत स्तर पर विकलांग व्यक्तियों को व्यापक सुविधाएँ उपलब्ध करने के लिए, जिला स्तर पर विकलांग पुनर्वास केंद्र की स्थापना के माध्यम से जागरूकता अभियान, सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, मार्गदर्शन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

कौशल विकास के माध्यम से ट्रेनिंग दे कर दिव्यांग जनों को स्वालंबी बनाने की योजना का भी उल्लेख किया। केन्दीय मंत्री ने सदन में बताया की दुव्यांगों के लिए विशेष छात्रवृत्ति की व्यवस्था भी की गई। दिव्यांगों के खेल के प्रति बढ़ती रूचि को विशेष रूप से रेखांकित कर केन्द्रीय मंत्री ने पैरा ओलंपिक में भारतीय पैरा खिलाड़ियों द्वारा किए गए ऐतिहासिक प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

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