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कोरोना पर राहुल-राजन का मंथन

कोरोना महामारी के दौर में अस्थिर होती अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RBI के पूर्व गवर्नर ने चर्चा की, जिसमें राजन बोले वर्तमान में गरीबों की मदद के लिए 65 हज़ार करोड़ रुपये की ज़रुरत है

Archna Jha
Archna Jha | 30 Apr, 2020 | 1:20 pm

कोरोना महामारी से तकरीबन एक महीने से देश में लॉकडाउन जारी है, जिसके चलते सभी फैक्ट्रियाँ बंद हैं जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ना और जीडीपी ग्रोथ रेट में कमी होना निश्चित है। अर्थव्यवस्था के लिए  आई इन्ही चुनौतियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रिजर्व बैंक आफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से चर्चा की, जिसमें रघुराम राजन ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में गरीबों की मदद करना लाज़मी है, जिसके लिए सरकार के करीब 65 हज़ार करोड़ रुपये खर्च होंगें। 

कोरोना की वजह से अर्थव्यवस्था में आई अस्थिरता के बारे में राहुल -राजन में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

Main
Points
कोरोना संकट के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जारी की मुहिम
रधुराम राजन के साथ की बातचीत
आने वाले समय में राहुल स्वीडन के वीरोलोजिस्ट से बात भी करेंगें: ANI
अस्थिर इकोनोमी के चलते लॉकडाउन को हटाना आवश्यक: रघुराम राजन

राहुल ने राजन से हुई चर्चा में कहा कि इस दौरान असमानता से लड़ना भी एक चुनौती है, क्योंकि हर राज्य का अलग तरीका है, ऐसे में तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को एक नज़रिये से देखना ठीक नही होगा ऐसे में उपयुक्त रास्ता क्या है?  जिस पर राजन बोले कि फूड, हेल्थ और एजुकेशन पर कईं राज्यों मे अच्छा व समान रुप से काम हो रहा है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती लोअर क्लास और मिडिल लोअर क्लास के लिए है जिनके पास अच्छे जॉब नही हैं। आज केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भरता ठीक नही ऐसे में लोगों के लिए नई जॉब अपोरच्युनिटी बनाना बेहद ज़रुरी है। राहुल के सवाल पर कि कोरोना के बीच अर्थव्वस्था एक बड़ी चिंता है ऐसे में इस चुनौती से कैसे निपटा जा सकता है और लॉकडाउन के बीच अर्थव्यवस्था को कैसे सुचारु किया जाए ? जिसके जवाब में गवर्नर राजन बोले अगर हम सोचें कि कोरोना का शून्य मामला होने की दशा में ही लॉकडाउन को खोला जाएगा, तो यह संभव नही है अगर लॉकडाउन 3 भी आता है तो इसका मतलब आप इसको खोलने को लेकर सही तैयारी नही कर पाये हैं। चर्चा के इसी दौर में राहुल ने कहा दूसरे देशों के मुकाबले भारत में काफी कम टैस्टिंग हो रही है फिर? रघुराम राजन बोले अगर हम अर्थव्यवस्था को खोलना चाहते हैं, तो टैस्टिंग क्षमता बढ़ानी ही होगी। अमेरिका आज लाखों टैस्ट रोज़ कर रहा है लेकिन यहां केवल 20 से 30 हज़ार के बीच ही हैं, राहुल के इस सवाल पर कि कोरोना संकट से भारत को क्या लाभ हो सकता है, राजन ने कहा कि- हांलाकि इस तरह कि धटनायें बमुश्किल ही कोई अच्छा प्रभाव छोड़ती हैं, लेकिन भारत के लिए ये एक मौका बन सकता है जब वह अपनी इंडस्ट्री को दुनिया तक पहुचाये। आवश्यक है कि, हम जल्द से जल्द अपनी इकोनोमी को सुचारु करे क्योकिं हमारे पास अन्य देशों की तरह अच्छी इकोनोमी नही है। राजन ने भविष्य पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि CMIE के मुताबिक करीब 10 करोड़ लोग वर्कफोर्स से बाहर हो सकते है, ऐसे में हमें कठोर कदम उठाने ही होंगें। बता दें कि रधुराम राजन 2013 से 2016 तक रिज़र्व बैंक के गवर्नर रह चुके हैं और कईं मौकों पर वह मोदी सरकार की आलोचना करते हुए भी नज़र आये हैं।

कोरोना काल में राहुल गांधी के इकनोमिक सुझाव

आने वाले समय में कांग्रेस नेता राहुल गांधी कोरोना महामारी के चलते देश-विदेश के अलग-अलग एक्सपर्टस् से बात करने वाले हैं। इस सीरीज़ की शुरुआत आरबीआई के पूर्व गवर्नर रधुराम राजन से की गई है। न्यूज़ एज़ेसी ANI के मुताबिक- राहुल हफ्ते में एक-दोबार  ऐसी चर्चा करेंगें । इसी सीरीज़ के दूसरे पार्ट में राहुल स्वीडन के वीरोलॉज़िस्ट से कोरोना महामारी के संदर्भ में बात करने वाले हैं। पहले भी राहुल गांधी ने प्रेस कोन्फ़्रेंस के दौरान मोदी सरकार को लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद का प्लान तैयार करने, कोरोना टैस्ट बढ़ाने और अर्थव्यव्स्था बढ़ाने को लेकर भी सुझाव दिये थे। बता दें कि राहुल फरवरी से ही कोरोना और इसके बाद होने वाले असर को लेकर चेतावनी देते आये हैं। 

वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर पूर्व गवर्नर का क्या कहना है

वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था को लेकर रघुराम राजन ने कहा कि-“ मुझे लगता है कि ग्लोबल आर्थिक सिस्टम में कुछ गलती है, लोगों के पास नौकरी नही है, जिनके पास नौकरियाँ हैं उनकों आगे की चिन्ता है, आय का असमान वितरण हो रहा है, नौकरी के अवसरों का भी सही वितरण करने की आवश्यकता है, लेकिन यह सराहनीय है कि वैश्विक मंच पर भारत एक बड़ी भूमिका निभा रहा है, जिसके चलते नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत बेशक ही अपनी जगह बना सकता है, दूसरी बात वर्तमान स्थिति में समाज को एकजुट होने की भी आवश्यकता है।”

Tags:
Covid 19   |  rahul gandhi   |  raghuram rajan   |  unstable   |  economy

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