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कोरोना पर जानकारों ने जताई चिंता, अधूरी जांच से कोरोना से निपटना नामुमकिन


Riya Rai
Riya Rai | 01 Apr, 2020 | 3:45 pm

देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन कोरोना से निपटने के लिए अभी तक उतनी प्रभावी जांचें नहीं हो रही है जिनकी देश में जरुरत है। इसको लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर करने के साथ चेतावनी दी है कि सरकार का ये ही रवैया रहा, तो देश को आने वाले समय में भीषण नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि 21 दिन का लॉकडाउन तभी सफल होगा, जब कोरोना के संदिग्धों की बड़ी संख्या में जांच होगी।

Main
Points
लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए ज्यादा संख्या में जांच जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार भारत जांच के दायरे बढाए
विशेषज्ञ बोले जांच में कमी के कारण देश को भीषण नतीजे भुगतने पड़ेंगे
WHO ने भी भारत को ज्यादा संख्या मे जांच की दी सलाह
भारत में 1400 से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित

एक कोरोना संक्रमित भी हजारों को शिकार बना सकता है

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एक संक्रमित मरीज भी लॉकडाउन तोड़ता है तो समाज को संक्रमित कर देगा। इसलिए सरकार जांच की क्षमता को बढ़ाए और उन लोगों की भी जांच करे, जिनके किसी के संपर्क में आने की आशंका है। इटली. स्पेन, फ्रांस और दक्षिण कोरिया की तरह अधिक से अधिक जांच के बाद भारत में भी कोरोना से संक्रमित मरीजों को अलग रखा जाना चाहिए ताकि इस वायरस के संक्रमण पर अंकुश लग सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि, भारत में जांच को और अधिक प्रभावी बनाने की जरुरत है।। कम जांच से संक्रमिति लोगों की संख्या का पता ही नहीं लगेगा।। क्योंकि अभी सरकार के मापदंडों के अनुसार भी शत-प्रतिशत जांच नही हो रही। निजी लैब के पास किट नहीं है। साथ हीं सैंपल लेने वालों की भी कमी है।

WHO की सलाह

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जिसके संक्रमति होने की आशंका हो, उसे जांच के बाद आइसोलेट कर देना चाहिए। लेकिन भारत के पास इतनी क्षमता नहीं है। ऐसे में अधिक से अधिक जांच करना जरूरी है। जो संक्रमित न पाए जाएं उन्हें काम पर लगाना चाहिए, जिससे की अर्थव्यवस्था को नुकसान ना पहुंचे।

जानें भारत में किन लोगों को जांच के दायरे में रखा गया है 

1. वो लोग जो विदेश से आए हैं और जिनमें कोरोना के लक्षण प्राथमिक तौर पर दिखे हैं,

2. विदेश से आए लोग जिनमें कोरोना के लक्षण थे, उनके संपर्क में आए वो सभी लोग जिनमें कोरोना के लक्षण दिख रहे हों,

3. कोरोना मरीज के परिजन जो किसी रूप में संपर्क में आए हों,

4. अस्पतालों में भर्ती वो सभी मरीज जिन्हें सांस की बीमारी है और उनमें लक्षण दिख रहे हों, 

5. स्वास्थ्य कर्मी या डॉक्टर जो कोरोना मरीजों या संदिग्धों के इलाज में लगे हों और उनमें भी लक्षण दिख रहे हों, ऐसे लोगों के जांच को सरकार ने मानक बनाया है.

विदेशों में लक्षण दिखाई देने पर सघन जांच 

दक्षिण कोरिया ने हर उस व्यक्ति की जांच की, जिसने पिछले दिनों क्रूज शिप में यात्रा की हो यो विदेश से लौटा हो। कोरोना संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की भी जांच की गई। भारत में ऐसा सिर्फ निजामुद्दीन में होने जा रहा है। जबकि दुनिया भर में सिर्फ उन लोगों की जांच की जा रही है, जिनमें कोरोना के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।

जांच के लिए प्राईवेट लैब की मंजूरी

भारत सरकार ने कोरोना वायरस की जांच के लिए निजी अस्पतालों और निजी प्रयोगशालाओं को कुछ शर्तों के साथ जांच की अनुमति दी है। सरकार के अनुमति के अनुसार निजी प्रयोगशालाएं जांच के लिए 4500/- से ज्यादा शुल्क नहीं ले सकतीं। हालाकि सरकार ने निजी लैब से भी बिना किसी शुल्क के जांच करने को कहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक भारत में अब तक 1400 से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। हालाकि 138 संक्रमित मरीज ठिक हो चुके हैं, जबकि इस वायरस से संक्रमित होने के वजह से क़रीब 38 लोगों की मौत हो चुकी है।

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WHO   |  Corona   |  India   |  Lockdown   |  Indian government   |  Health ministry   |  Privatela

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