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कोरोना काल में दूषित हवा कैसे दे रही है मौतों को दावत! भारत ने कदम नहीं उठाये तो...!

बढ़ते वायु प्रदूषित देशों मे कोरोना मृत्युदर सामान्य से अधिक, रिसर्च के मुताबिक प्रदूषण से प्रभावित शरीर पर कोरोना का असर जल्दी

Archna Jha
Archna Jha | 24 Apr, 2020 | 11:57 am

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पूर्व में यह साबित हो चुका है कि वायु प्रदूषण के चलते दुनिया में हर साल तकरीबन 70 लाख लोगों की मौत होती है। वहीं इस वक्त कोविड-19 को लेकर पूरी दुनिया में रोज नए शोध चल रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन(WHO) की आई एक रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण का ऊंचा स्तर कोरोना के गंभीर मामलों के लिए एक रिस्क फैक्टर साबित हो सकता है, क्योंकि वायु में मौजूद महीन कण (fine particals) PM 2.5 के संपर्क में रहने वाले लोगों पर कोरोना का दुष्प्रभाव जल्दी होगा।

Main
Points
WHO के मुताबिक वायु प्रदूषित देशों में कोरोना का असर बाकी देशों की तुलना में अधिक
इंडियन पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन, अमेरिकन रिसर्च, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट से हुआ साबित
वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख लोगों की मौत- WHO
वायु प्रदुषण से कोविड-19 के मरीज़ों में 15 फीसदी का इज़ाफा- रिपोर्ट

क्या कहना है शोधकर्ताओं का

बढ़ते वायु प्रदूषण और कोरोना के बीच संबंध को समझाते हुए पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन, इंडिया ने कहा है कि “अगर वायु प्रदूषण से इंसान के एयरवेज़ और लंग टिश्यू को नुकसान पहुंचता है, तो कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता और कम हो जाती है। दरअसल गहरा वायु प्रदूषण मनुष्य के फेफड़ों को प्रभावित करता है और कमज़ोर फेफड़ों पर कोरोना का असर जल्दी होता है। हालांकि लॉकडाउन के चलते वायु प्रदूषण में बेशक कमी आई है, लेकिन जैसे ही लॉकडाउन में ढ़ील दी जाएगी, प्रदूषण तो बढ़ेगा ही साथ ही कोरोना संक्रमित लोगों में रिकवरी का डर और बढ़ जाऐगा।

क्या कहती है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी?

वहीं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के मुताबिक- “ऊंचे वायु प्रदूषण, ज़्यादा आबादी वाले क्षेत्रों और कोरोना मृत्युदर में गहरा सबंध है, उदाहरण के तौर पर उत्तरी इटली में प्रदूषण का स्तर अधिकतम है जो की इस इलाके में कोरोना से हुई ज़्यादा मौतों की वज़ह बना हुआ है। ऐसे में कोरोना के मद्देनज़र वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों को सुचारु रखने की आवश्यकता है”। अमेरिकन रिसर्च के मुताबिक- “वायु प्रदूषण के बीच लंबा वक्त बिताना कोरोना के मामलों को 20 गुना अधिक  घातक बनाता है”। दूसरी ओर वैज्ञानिकों का कहना है कि- “वायु प्रदूषण से ग्रसित मरीज़ों में कोविड-19 का गंभीर संक्रमण देखा गया है, ऐसे में कोरोना मृत्युदर में 15% के इज़ाफे की आशंका रहती है, इतना ही नहीं सार्स और मर्स जैसी महामारियों के दौरान भी वायु प्रदूषण और महामारी के बीच गहरा संबंध देखा गया था।“

डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर (DFCA), इंडिया का सरकार से अनुरोध

कोरोना और वायु प्रदूषण में संबंध पर चिंता व्यक्त करते हुए DFCA ने  कहा है कि “कोरोना से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री मोदी सार्क देशों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर रहे हैं, ये अच्छी बात है, लेकिन यदि अपने देश में भी सरकार पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास करे, तो न केवल कोरोना बल्कि भविष्य में देश को ऐसी महामारियों से लड़ने क्षमता में इजाफा होगा।“ साथ ही DFCA ने थर्मल पावर प्लांट, डीज़ल पैट्रोल वाहनों से निकलने वाले धुएं के लिए मानदंडों को सख्ती से लागू करने की मांग भी सरकार से की है।

Tags:
Covid 19   |  airpollution   |  WHO   |  research   |  public   |  health   |  foundation   |  India

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