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तालाबंदी से उर्जा क्षेत्र प्रभावित , कार्बन उत्सर्जन में आएगी भारी कमी

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक लॉक डाउन की वजह से ऊर्जा खपत में 2020 में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। कोयला और तेल की कम खपत की वजह से कार्बन उत्सर्जन में भी 8% तक की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की जाएगी।

Manmeet Singh
Manmeet Singh | 01 May, 2020 | 4:52 pm

कोरोनावायरस और उसकी वजह से हुए लॉकडाउन ने दुनिया के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। भला ऊर्जा क्षेत्र इससे कैसे अछूता रहता। 30 अप्रैल को आई इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट में यह कहा गया कि 2020 में वर्तमान स्थिति की वजह से ऊर्जा की मांग में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है।

Main
Points
ऊर्जा खपत में हो सकती है 6% तक की गिरावट
कार्बन उत्सर्जन में आएगी 10% तक गिरावट
बिजली की मांग में भी दर्ज की गई 5% तक की गिरावट

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी द्वारा 30 अप्रैल को जारी की गई रिपोर्ट कोविड -19 महामारी के लगभग सभी प्रमुख ईंधनों पर पड़ने वाले असाधारण प्रभाव के बारे में बताती है। इस वर्ष अब तक के 100 दिनों के वास्तविक आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर, IEA की ग्लोबल एनर्जी रिव्यू में अनुमान लगाया गया है कि ऊर्जा खपत और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन का रुझान 2020 के बाकी हिस्सों में किस तरह रहने वाला है।

कितनी हो सकती है गिरावट

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा की मांग 2020 में 6% गिर जाएगी जो कि भारत की पूरी ऊर्जा मांग को खोने के बराबर है, जो कि दुनिया का तीसरा सबसे बडा ऊर्जा उपभोक्ता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 9% की गिरावट और यूरोपीय संघ में 11% की मांग के साथ उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में भी सबसे बड़ी गिरावट देखने की उम्मीद है। ऊर्जा की मांग पर  प्रभाव वायरस के प्रसार को रोकने के लिए उपायों की अवधि और कठोरता पर निर्भर करता है।

लॉकडाउन के दौरान बिजली के उपयोग में हुए बदलाव के कारण समग्र बिजली की मांग में महत्वपूर्ण गिरावट आई है,    संपूर्ण लॉकडाउन ने बिजली की मांग को 20% या उससे अधिक नीचे धकेल दिया है। 2020 में बिजली की मांग में 5% की गिरावट दर्ज की गई है, जो 1930 के दशक में महामंदी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है।

लॉकडाउन की वजह से एक बड़ा शिफ्ट देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार कम कार्बन उत्सर्जन वाले बिजली के माध्यम जैसे सौर ऊर्जा की तरफ झुकाव  है। साल 2020 में कम कार्बन उत्सर्जन वाले स्रोतों से बिजली उत्पादन  में हिस्सेदारी बढ़कर 40% हो जाएगी जो कोयला जैसे स्रोतों से 6% ज्यादा होगी। वर्तमान रुझान की वजह से कोयले और प्राकृतिक गैस से बिजली की मांग  प्रभावित हो रही है, परिणामस्वरूप, वैश्विक शक्ति मिश्रण में गैस और कोयले का संयुक्त हिस्सा 2020 में 3 प्रतिशत तक  गिर सकता है  जो  2001 के बाद  न्यूनतम  होगा ।

सबसे अधिक प्रभाव कोयले पर पड़ने वाला है। 2020 में इसकी मांग में 8% तक की गिरावट दर्ज होने वाली है जो कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी गिरावट है।

10 साल की निर्बाध वृद्धि के बाद, 2020 में प्राकृतिक गैस की मांग में 5% की गिरावट आएगी। 20 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध के दौरान प्राकृतिक गैस की मांग में वृद्धि के बाद से खपत में यह साल-दर-साल गिरावट होगी।

कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट

इस साल कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट होनी तय है। रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा क्षेत्र में बदलते रुझान और कोयला और तेल की कम खपत की वजह से कार्बन उत्सर्जन में 8% तक की गिरावट दर्ज की जाएगी।

डॉक्टर कैरोल ने कहा की दुनियाभर में अकाल मौतों और आर्थिक आघात के परिणामस्वरूप, वैश्विक उत्सर्जन में ऐतिहासिक गिरावट में पूरी तरह से खुश करने के लिए कुछ भी नहीं है और अगर 2008 के वित्तीय संकट के बाद कुछ भी हो सकता है, तो हम जल्द ही तेज आर्थिक सुधार की वजह से उत्सर्जन में तेज सुधार देख सकते हैं। लेकिन सरकारें आर्थिक सुधार के लिए अपनी योजनाओं के केंद्र में स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों - नवीकरणीय, दक्षता, बैटरी, हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर पर जोर देकर उस अनुभव से सीख सकती हैं। उन क्षेत्रों में निवेश करने से नौकरियां पैदा हो सकती हैं, अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है और भविष्य को अधिक लचीला और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बढ़ाया जा सकता है।

Tags:
Lockdown   |  CO2   |  energy   |  carbon   |  emission   |  International   |  Energy   |  agency

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