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कोरोना और मीडिया रिपोर्टिंग: कितनी जिम्मेदारी निभा रहा है भारत का मीडिया!


Archna jha
Archna jha | 03 Apr, 2020 | 6:58 pm

25 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये प्रिंट मीडिया के संपादकों और प्रकाशकों से बात करते हुए कोरोना महामारी के संदर्भ में उनके द्वारा समाज के हर कोने में फैलाई जानें वाली जागरुकता को सराहा गया। साथ ही मीडिया से यह भी अपेक्षा जताई कि वह सभी कोरोना टेस्टिंग सेंटर की लोकेशन, यह टेस्ट किसे कराना चाहिए, इसके लिए किससे संपर्क करना चाहिए और होम कवैरेन्टाइन के तमाम दिशानिर्देशों के बारे में लोगों को जागरुक करें। सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के सचिवों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि –“कोरोना महामारी के समय में मीडिया को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सरकार और जनता के बीच न केवल तारतम्य बैठाने का काम करना है। बल्कि लगातार राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर जनता के फीडबैक भी सरकार तक पहुचांने का काम मीडिया को करना है।“

Main
Points
सुप्रीम कोर्ट ने की केन्द्र सरकार से मीडिया के लिए दिशानिर्देश जारी करने को कहा
कोरोना के चलते फेक न्यूज़ का प्रसार करने पर दिया था आदेश
तमाम मीडिया चैनल कर रहे सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन
मीडिया में बड़ा डर, कहीं मीडिया सेंसरशिप के रुप में न इस्तेमाल हों यह निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया केन्द्र को निर्देश

वहीं 31 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन और मजदूरों के पलायन की खबरें अगले 3 महीने तक चलती रहेंगी। इन खबरों को चलाने के लिए मीडिया पर बड़ी जिम्मेदारी है। हालांकि इसी बीच फेक न्यूज फैलाई गयी जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने फेक न्यूज फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज तकनीकि विशेषकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जिसके लिए केन्द्र सरकार को इसमें दख़ल देना ही होगा। जिसके चलते केन्द्र सरकार ने भी मांग की, कि कोर्ट कोरोना को लेकर मीडिया व्दारा की जा रही कवरेज पर दिशा- निर्देश जारी करे। गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि दुनिया के लिए महामारी बन चुके कोरोना पर गलत रिपोर्टिंग समाज के हर वर्ग को नुकसान पहुंचा सकती है। जिसके लिए आवश्यक है कि शीर्ष अदालत यह दिशा- निर्देश जारी करे कि कोई भी इलैक्ट्रानिक, प्रिंट मीडिया, वेब पोर्टल या सोशल मीडिया सरकार के मैकेनिज्म से तथ्यों की पुष्टि किए बिना कोविड-19 पर कुछ भी प्रिंट, प्रकाशित, प्रसारित न करें। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब सरकार 24 घंटो के भीतर लोगों की शंकाओ को दूर करने के लिए सोशल मीडिया और अन्य प्रसारण मंचों सहित, सभी माध्यमों के ज़रिये कोविड-19 पर एक दैनिक बुलेटिन जारी करेगी।

NBA ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया

न्यूज ब्राडकास्टिंग एसोसिएशन (NBA) ने कोरोनो पर रिपोर्टिंग के संदर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का वादा करते हुए कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रैस की आज़ादी को समझने की प्रंशसा की।

सरकारी गाइडलांइस के साथ मीडिया की कोरोना कवरेज़

‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज़’ इन दिनों कोरोना संबंधित कंटेंट एंव कई नये प्रोग्राम शुरु किये गए हैं। जिसमें बताया जा रहा है कि कोरोना कैसे फैलता है, संक्रमण को कैसे रोका जा सकता है। साथ ही, कोरोना अपडेट के लिए भी प्रोग्राम शुरु किये गए हैं।

ऐसे समय में सोशल मीडिया भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में सजग है। ट्वीटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम ,व्हाटसएप, गूगल, यूट्यूब, स्नैपचेट, वीमेट जैसे सोशल मीडिया नेटवर्कों ने कोविड-19 नाम का हैशटैग स्थायी कर लिया है ,डब्ल्यूएचओ और भारत के स्वास्थ्य विभाग के लिंक दिए जा रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर फेसबुक रियल डाटा दे रहा है। व्हाट्सएप पर आम लोगों के साथ स्वास्थ कर्मियों,सामाजिक नेताओ, समाज के सभी वर्गों से वेरिफाई न्यूज़ साझा करने की अपील कर रहा है। भारत में व्हाट्सएप पर मायज़ीओवी कोरोना हेल्प डेस्क की शुरुआत की गई है +919013151515 नंबर भी जारी किया गया है। साफ-सफाई से संबंधित वीडियो यू-ट्यूब पर साझा किए जा रहे हैं। महामारी बन चुके कोरोना के चलते और सरकार व्दारा दिए गए दिशा निर्देशों को अपनाते हुए आज सभी मीडिया चैनल्स सही तथ्य जनता के समक्ष लाने में प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में ‘आईटीवी नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज़ ‘ ने #घर पर रहो, और अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल ‘न्यूज़ एक्स’ ने #stay at home जैसे कैम्पेन लाँन्च किये हैं। साथ ही सबसे ‘बड़ा देश भक्त’ ,’कोरोना वारियर्स’, ‘कोरोना से जंग’,और ‘कोरना रिपोर्ट’ जैसे कार्यक्रमों ने न केवल जनता को जागरुक करने का काम कर रहा है। बल्कि सरकार के कोरोना के प्रति उठाए जा रहे कदमों से भी जनता को जागरुक कर रहा है।

31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के आदेश एंव सरकार के आदेशों को आज मीडिया जगत अपनाने और जनता के आगे कोई फेक न्यूज़ न आये यह प्रयास कर रहा है।

मीडिया के रिस्क:

31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मीडिया के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग करते हुए आपदा प्रंबधन अधिनियम 2005 का उल्लेख किया,जिसके तहत अगर कोई आपदा के समय अफवाह फैलाता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई और एक साल की सज़ा या ज़ुर्माना हो सकता है।

कोर्ट ने आईपीसी की धारा188 की तरफ भी लोगों का ध्यान खींचा,जिसके तहत सरकारी आदेश की अवहेलना करने पर सजा का प्रावधान है । इस महामारी के दौर में कोर्ट ने कहा कि किसी भी घटनाक्रम को लेकर मीडिया आधिकारिक बयान शामिल करे।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की हर रोज़ होने वाली प्रेस वार्ता में जाने वाले पत्रकारों का कहना है कि मंत्रालय या उससे जुड़े अधिकारी सभी सवालों का जवाब नही देते हैं। कई मौकों पर तो वह बिल्कुल सही ख़बर को इस आधार पर फेक न्यूज़ कह देते है ताकि उन्हें जवाब न देना पड़े।

इस प्रकार सरकार की पुष्टि के बाद कोरोना वायरस से संबधित खबरें मीडिया से चलाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अलग अलग मायनें आज निकाले जा रहे हैं। मीडिया में डर का माहौल है कि कहीं केंद्र इसे मीडिया सेंसरशप के रुप में न इस्तेमाल करे ,अगर ऐसा होगा तो यह अभिव्क्ति की आज़ादी के लिए एक बढ़ा खतरा हो सकता है।

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Covid 19   |  media   |  fake news   |  Supreme court   |  cent.govt   |  issue guidelines   |  followed media   |  arise mediacen corshiprisk

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