Your image is ready, you can save / share this image
Please wait!
#MPsPerformance


%
RANKOUT OF

कोरोना खतरे से बचने के लिए बनाया गया एप कितना है खतरनाक?


Archna jha
Archna jha | 11 Apr, 2020 | 9:36 am

हाल ही में , मीडिया के ज़रिये यह ख़बर सामने आई कि जिन लोगों को कोरोना पाँज़िटीव होने के कारण होम क्वारंटीन किया गया था।वह तमाम आदेशों को ताक पर रखकर न केवल बाज़ारों और मैट्रो में घूमते नज़र आये, बल्कि उन्होंने अपने हाथ पर लगी होम क्वारंटीन की स्टैंम्प तक मिटा दी। क्या स्वंय को और समाज को कोरोना जैसी महामारी से बचाने के लिए यह छोटा सा प्रयास न करने में भी लोगों को इसमें अपना स्वार्थ नज़र आ रहा है। बहरहाल, केन्द्र एंव राज्य सरकारें अब ऐसे लोगों की मूवमेंट पर नज़र रखने के लिए टेलिकाँम कंपनियों की मदद से न केवल  मोबाइल ऐप शुरु कर रहीं हैं। बल्कि कोरोना संक्रमितों की लोकेशन और काँल हिस्ट्री के ज़रिये काँनटैक्ट ट्रेसिंग भी कर रहीं हैं।

Main
Points
होम क्वारंटीन लोगों पर निगरानी के लिए सरकार ने टेलीकाँम विभागों की मदद से जारी किये क्वारंटीन ट्रेसिंग ऐप
केन्द्र ओर राज्य सरकार, दोनों ही इस दिशा में प्रयासरत
साइबर एक्सपर्टस् ने सरकार के कदमों पर उठाए सवालिया निशान
पूर्व में विदेशों तक में जारी किये गए हैं इस तरह के कानून एंव ऐप

होम क्वारंटीन ट्रेसिंग ऐपस् कौन से हैं

केन्द्र सरकार की पहल: अप्रैल के पहले सप्ताह में केन्द्र सरकार ने ‘आरोग्य सेतु’ ऐप लाँन्च किया है। जिसके ज़रिये लोग अपने आसपास कोरोना के मरीज़ों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके आलावा भारत सरकार ‘कोरोना कवच’ नामक ऐप भी लाने वाली है। जो कोरोना संक्रमितों की गतिविधियों पर नज़र रखेगा। इतना ही नही, सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया कि ये ऐप यूज़र्स की निजता को ध्यान में रखकर बनाये गये हैं।

क्या हैं राज्य सरकारों के प्रयास

ANI के मुताबिक हिमाचल प्रदेश सरकार ने ‘कोरोना मुक्त हिमाचल ऐप’ लाँन्च किया है। वहीं आन्ध्र प्रदेश सरकार,ऐसे लोगों पर निगरानी के लिए ‘कोरोना एलर्ट ट्रेसिंग सिस्टम’ का इस्तेमाल करने जा रही है। कर्नाटक सरकार ने ‘क्वारंटीन वाँच’, केएसपी क्लियर पास चैकर और ‘कोरोना वाँच’ नामक ऐप की शुरुआत की है,यह ऐप मिनिस्टरी आँफ मेडिकल एजुकेशन के प्रैस रिलीज़ ने जारी किया है।जिसमें प्रत्येक होम क्वारंटीन व्यक्ति को हर एक घंटे में अपनी सेल्फी खींच उस पर अपलोड करनी होगी। तमिलनाडु पुलिस विभाग ने ‘कोविड-19 क्वारंटीन मोनिटर ऐप’ जारी कर इस दिशा में कदम उठाया है।वहीं ग्रेटर चेन्नई कोरपोरेशन ने ‘जीसीसी-कोरोना मोनिटरिंग’ शुरु किया है। ‘कोरोना वायरस अर्लट(कोवा)’,ऐप की शुरुआत कर पंजाब सरकार ने क्वारंटीन लोगों की सेल्फ स्क्रीनिंग ,ट्रैवल हिस्ट्री,कान्टैक्ट इंफोरमेशन और लोकेशन संबधी दिशा- निर्देश जारी किये हैं।वहीं ‘नासिक म्युनिसिपल कोरपोरेशन ने महाकवच’ ऐप जारी कर कोविड-19 प्रभावित लोगों की गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश की है। इस दिशा में ‘जीओके-डायरेक्ट’ और ‘कोविड केयर केरला’ केरल सरकार का एक प्रयास है। इतना ही नहीं, इलैक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रौघोगिकी मंत्रालय ने कोविड-19 फीडबैक ऐप की शुरुआत कोरोना टैस्टिंग से गुज़रने वाले व्यक्तियों के फीडबैक के लिए की है।

ऐप्स् पर लगाये जा रहे हैं निजता के हनन के आरोप

साइबर कानून एक्सपर्ट पवन दुग्ग्ल ने तमाम राज्य एंव केन्द्र सरकार के इन ऐप्स् जारी करने की प्रसंगिकता पर कुछ सवाल उठाए हैं जैसे- इलेक्ट्राँनिक सर्विलांस के ज़रिये इकठ्ठा किया जा रहा डेटा,  न केवल लोगों के निजता के अधिकार का हनन होगा बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हनन होगा, जिसमें अनुच्छेद-19 के तहत निजता का अधिकार ,पूरी तरह संवैधानिक है। भले ही सरकार का कहना है कि ये ट्रेसिंग ऐप्स् जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए और कम्यूनिटी ट्रांसमिशन को रोकने के लिए बनाये गए है। लेकिन सरकार ऐसी कोई गारंटी भी नहीं दे रही है, जिसके चलते लोगों को यह आश्वासन मिले कि हालात सुधरने के बाद इस डेटा का कोई गलत इस्तेमाल नहीं होगा। साथ ही, यह डाटा नष्ट कर दिया जाएगा। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर अपार गुप्ता ने भी इस बात पर सहमति जताते हुए कहा है-“ इन ऐप्स् से जो संभव नुकसान हो सकते हैं। उनमें सबसे प्रमुख है कि सरकार जो डेटा ले रही है, वो बेशक ही कानूनी कदम नहीं है, ऐसे में वो इसका उपयोग कब तक और किस रुप में करती है,  ये संदेहास्पद हो सकता है। ऐसी स्थिति में तमाम सरकारी अथोरिटी को यह आश्वासन देना ही होगा। कि इन होम क्वारंटीन ऐप्स् में इस्तेमाल की जा रही सूचना का और लोगों की पर्सनल जानकारी का इस्तेमाल बाकी कोई पार्टी या विभाग नहीं करेंगें।

यदि विचार किया जाए तो ऐसा नहीं है कि केवल भारत सरकार ने ही यह कदम उठाए हैं।इससे पहले इस्राइल, चीन, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग में भी कोरोना संक्रमण को रोकने, काँन्टैक्ट ट्रैसिंग के लिए एंव होम क्वारंटीन लोगों पर नज़र रखने के लिए रातोंरात ऐसे कठोर कदम उठाये हैं।

Tags:
Covid-19   |  home   |  quarantine   |  people   |  tracking   |  apps   |  cyber   |  expertsalleged   |  could beaffectrightto privacy

Stories for you

SEARCH YOUR MP

Or

Selected MP