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स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले पर सरकार सख़्त, लेकर आई अध्यादेश, सजा के कड़े प्रावधान

अगर कोई व्यक्ति स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा करने का दोषी पाया जाता है तो उसे 3 महीने से लेकर 5 साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा उसे 50 हजार से दो लाख रुपए तक जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। वहीं हमला गंभीर होने की सूरत में सजा और भी कड़ी होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा 6 महीने से लेकर 7 साल तक की हो सकती है। वहीं अपराधी को 1 से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

Ankit Mishra
Ankit Mishra | 22 Apr, 2020 | 6:52 pm

कोरोना महामारी के सामने आने के बाद से ही चिकित्सक समेत तमाम स्वास्थ्यकर्मियों को पूरे देश में हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। इस पर संज्ञान लेते हुए आज प्रधानमंत्री की मौजूदगी में हुई केंद्रीय बैठक में केन्द्र सरकार स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ होने वाले हमलों और उत्पीड़न को रोकने के लिए अध्यादेश लेकर आई है।

Main
Points
स्वास्थ्यकर्मियों पर हमलों को रोकने के लिए सरकार लाई अध्यादेश
महामारी अधिनियम, 1897 में बदलाव कर पारित किया गया अध्यादेश
अधिकतम 7 साल तक की सजा का प्रावधान

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हमलों को बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए महामारी अधिनियम, 1897 में बदलाव कर एक अध्यादेश पारित किया गया है जो राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अमल में लाया जायेगा।

इस कानून के लागू होने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों पर कड़ी कार्यवाई की जाएगी। इस अपराध की सजा गैर-जमानती होगी साथ ही साथ अपराधी अर्थदंड का भी भोगी बनेगा। देश की सुस्त न्याय व्यवस्था को देखते हुए ऐसे मामलों की चार्जशीट 30 दिनों के भीतर दायर होगी और 1 साल के अंदर फैसला सुनाने का भी प्रावधान सरकार ने जोड़ा है।

क्या होगी सजा?

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा करने का दोषी पाया जाता है तो उसे 3 महीने से लेकर 5 साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा उसे 50 हजार से दो लाख रुपए तक जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। वहीं हमला गंभीर होने की सूरत में सजा और भी कड़ी होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा 6 महीने से लेकर 7 साल तक की हो सकती है। वहीं अपराधी को 1 से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। 

इस दौरान यदि हमले में अपराधी चिकित्सक की गाड़ी या फिर क्लिनिक को नुकसान पहुंचता है तो उसे उस नुकसान के बाजार मूल्य से दोगुनी राशि भरनी पड़ सकती है। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यह कानून इसलिए लाया गया है ताकि स्वास्थ्यकर्मी तनाव मुक्त हो अपना काम कर सके।

गृहमंत्री की IMA के साथ बैठक

आज सुबह ही गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के साथ बैठक की थी। इस बैठक में IMA के सदस्यों ने पूरे देश में स्वास्थ्यकर्मियों  पर हो रहे हमलों को लेकर गृह मंत्री से नाराजगी जाहिर की थी।  इसके पूर्व IMA ने देशभर के स्वास्थ्यकर्मियों से आज रात 9 बजे मोमबत्ती जला कर अपना विरोध दर्ज कराने की अपील की थी। हालाँकि गृह मंत्री से मिले सुरक्षा के आश्वासन के बाद यह प्रदर्शन वापस ले लिया गया था।

स्वास्थ्यकर्मियों पर दुर्भाग्यपूर्ण हमले

चिकित्सकों की सुरक्षा तो पहले भी चिंता का विषय रही है। पहले भी असामाजिक तत्वों द्वारा उन पर हमले की खबरें आती रही हैं पर कोरोना संकट के बीच यह क्रम और भी तेजी से बढ़ा है। मुरादाबाद में एम्बुलेंस पर हुए हमले में एक स्वास्थ्यकर्मी को गंभीर चोटें आयी थी। इंदौर में कोरोना संक्रमण जांच के लिए नमूने लेने गए स्वास्थ्यकर्मियों पर हुआ हमला हो या बेंगलुरु में आशाकर्मियों के साथ झड़प। इन सभी मामलों ने एक समाज के तौर पर हमें शर्मसार किया।

स्वास्थ्यकर्मियों पर उत्पीड़न की सबसे ज्यादा शिकायतें उनके पड़ोसियों के खिलाफ आयी है।  ऐसे कई मामले सामने आये जहां इन फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स को कोरोना कैर्रियर बताकर उत्पीड़ित किया गया। हालाँकि इस कानून के आने के बाद ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के कम होने के आसार है।

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