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लॉकडाउन ने बचाईं 8 लाख जानें! जानिए कैसे!

लॉकडाउन ने भारत को कोरोना के कहर से बचाया, एक पॉँज़िटिव कर सकता था सैंकड़ो को संक्रमित, ICMR ने जारी की रिपोर्ट

Archna Jha
Archna Jha | 16 Apr, 2020 | 12:28 pm

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20 जनवरी 2020 से लेकर 16 अप्रैल तक भारत में कोरोना संक्रमण के कुल 12380 मामलें सामने आये हैं जिनमें से 414 लोगों की मौत और  1488 लोग कोरोना मुक्त हुए हैं। इसकी तुलना में यदि अमेरिका और इटली जैसे विकसित देशों की बात की जाए तो वहां 24 घंटों के भीतर ही यूएस में 1509 और इटली में 727 कोरोना पॉज़िटिव लोगों की मृत्यु हुई है। कहने का मतलब यह है कि भारत में कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा अपेक्षाकृत काफी कम है। दूसरी ओर वर्तमान में वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण के मामले 1,923,935 हैं जिनमें से 1,19,618 लोगों की मृत्यु और 4,44,711 लोगों की रिकवरी हो चुकी है। क्या इसकी वजह सही समय पर भारत में लॉकडाउन को लेकर किया गया निर्णय है?

Main
Points
लॉकडाउन की वजह से भारत में कोरोना मामलों में कमी आई
अमेरिका और इटली के मुकाबले भारत में चार महीनों में भी कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा कम
स्वास्थ्य मंत्रालय और ICMR ने जारी किये सबंधित आंकड़े
कोविड-19 का एक मरीज़ 30 दिन में लगभग 406 लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित कर सकता है-रिपोर्ट
लॉकडाउन के कारण 30 दिन में केवल 2.5 लोगों को ही संक्रमित कर पाया-रिपोर्ट

क्या कहता है भारतीय स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय

दरअसल 13 मार्च को भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय की जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि यदि देश में लॉकडाउन घोषित नहीं किया गया होता तो केवल 15 अप्रैल तक ही 8.20 लाख कोरोना पॉज़िटिव के मामले होते। इतना ही नहीं स्वास्थ्य मंत्रालय  ने एक ग्राफ शेयर करते हुए लॉकडाउन के साथ- साथ रोकथाम के उपाय जैसे सोशल डिस्टैंसिंग दोनों को एक साथ सही समय रहते अप्लाई करने की स्थिति में कोरोना केसों में आई कमी को दर्शाया है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR)

सरकार के लॉकडाउन सबंधी निर्णय के बारे में आईसीएमआर का कहना है –“यदि लॉकडाउन न हो और सोशल डिस्टैंसिंग का ख्याल न रखा जाए तो कोविड-19 का एक मरीज़ 30 दिन में लगभग 406 लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित कर सकता है, पर लॉकडाउन होने की स्थिति में सोशल मीटिंग में 75% तक की कमी आई है , जिसके चलते एक संक्रमित व्यक्ति 30 दिन में केवल 2.5 लोगों को ही संक्रमित कर पाएगा”। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल ने ICMR के इन आंकड़ो पर ज़ोर देते हुए सोशल डिस्टैसिंग को आवश्यक बताया है। वही स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन का भी कहना है- “सोशल डिस्टैंसिंग एक तरह से सोशल वैक्सीन है और कोरोना संक्रमण को काबू में रखने के लिए इस वक्त देश को इस वैक्सीन की आवश्यकता है”

लॉकडाउन को लेकर आम जनता की राय क्या है

ज़्यादातर लोगों ने लॉकडाउन पर सहमति जताते हुए कहा कि जिस तरह से देश में कोरोना के मामले अचानक ही बढ़े हैं उसको देखते हुए सरकार का लॉकडाउन का निर्णय बिल्कुल सही है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन हो इसके लिए पुलिस के साथ-साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी ज़िम्मेदारियां दी जानी चाहिए। दूसरी ओर कुछ लोगों ने सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करते हुए आशिंक लॉकडाउन रखने का भी सुझाव दिया। वहीं कुछ लोगों ने स्टेप बाई स्टेप लॉकडाउन हटाने की बात कही।

Tags:
Corona   |  Lockdown   |  saveslives   |  MOH   |  ICMR   |  praise

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