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क्या जान से ज्यादा कीमती है जाम ?

2019-20 के दौरान 29 राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों ने शराब पर स्टेट एक्साइज के जरिये संयुक्त रूप से 1,75,501.42 करोड़ रुपये कमाई की है। बीते वित्त वर्ष के दौरान, जिन पांच राज्यों ने शराब पर उत्पाद शुल्क से सबसे अधिक राजस्व एकत्र किया, उनमें उत्तर प्रदेश (31517 करोड़ रुपये), कर्नाटक (20950 करोड़ रुपये), महाराष्ट्र (17477 करोड़ रुपये), पश्चिम बंगाल (11873 करोड़ रुपये) और तेलंगाना (10,901 करोड़ रुपये) थे। कई राज्यों में कर से मिले कुल राशि का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा शराब से प्राप्त होता है।

Ankit Mishra
Ankit Mishra | 05 May, 2020 | 3:03 pm

देश में लॉकडाउन लगने के 40 दिनों बाद जब सरकार ने पूर्ण बंदी के बीच ही शराब के बिक्री की अनुमति दी तो लोगों का हुजूम दुकानों पर ऐसा दिखा जैसे मानो कोरोना का कोई भय ही न हो। लंबी-लंबी कतारों के बीच सामाजिक दूरी संबंधी नियमों की जबरदस्त धज्जियां उड़ी। बंद पड़ी अर्थव्यवस्था के कारण राज्यों को  हो रहे नुकसान को कम करने के लिए लिया गया यह फैसला जल्द ही सरकार के लिए मुसीबत बन गया।

Main
Points
कई राज्यों में भीड़ नियंत्रित करने के लिए पुलिस को करना पड़ा बल प्रयोग
दिल्ली सरकार ने शराब की कीमतों में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी का दिया आदेश
आंध्र सरकार शराब की कीमतों में अब तक 75 प्रतिशत का इज़ाफ़ा कर चुकी है

देश के कई राज्यों में दुकानों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा। दिल्ली में कुछ जगहों पर तो बेकाबू भीड़ देख दुकानें तक बंद करानी पड़ी। हालात इतने खराब रहे की शाम में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को प्रेस कॉन्फ्रेंस तक करना पड़ा। अरविन्द केजरीवाल ने इस महामारी के बीच हुई लापरवाही पर नाराजगी जताई और सख़्त कार्यवाई की चेतावनी दी।

 

इन सब के बावजूद स्थिति में सुधार होता न देख दिल्ली सरकार ने देर रात शराब की कीमतों में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी का आदेश दिया। इस आदेश के बाद राज्य सरकार को यह उम्मीद थी कि इतने बड़े स्तर पर बढ़ाये गए दामों के बाद दिल्ली में शराब की दुकानों पर भीड़ कम होगी लेकिन आशा के विपरीत जब सुबह शराब की दुकानें खुली तो भीड़ कल जैसी ही दिखी।पिछले 40 दिनों से मदिरा सेवन से दूर रहे इन लोगों के लिए जान और जहान से ज्यादा जरूरी जाम रहा।  इस भीड़ को रोकने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा लगाया गया "स्पेशल कोरोना फी" भी काम नहीं आ सका। 

कुछ ऐसा ही निर्णय आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने लिया। प्रदेश की दुकानों पर अनियंत्रित भीड़ को कम करने के लिए आंध्र प्रदेश की सरकार ने आज सुबह शराब की कीमतों में 50 प्रतिशत वृद्धि करने का आदेश दिया। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही राज्य सरकार ने शराब की कीमतों में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की थी। आंध्र सरकार शराब की कीमतों में अब तक 75 प्रतिशत का इज़ाफ़ा कर चुकी है। जगनमोहन रेड्डी के सत्ता में आने के बाद शराब के दुकानों की संख्या 4,380 से घटकर 3,500 रह गई है। इसके पहले भी राज्य सरकार ने अक्टूबर 2019 में शराब की कीमतों में बढ़ोतरी की थी।

इतनी बड़ी महामारी के बीच भी शराब की बिक्री की अनुमति देने के सरकार के फैसले पर काफी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालाँकि कई राज्य सरकारें शुरू से ही इसकी मांग करती रही हैं। राज्य सरकारों द्वारा यह मांग क्यों की जा रही थी यह समझने के लिए अगर हम आरबीआई की एक रिपोर्ट देखे तो सब कुछ स्पष्ट हो जायेगा। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 2019-20 के दौरान 29 राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों ने शराब पर स्टेट एक्साइज के जरिये संयुक्त रूप से 1,75,501.42 करोड़ रुपये कमाई की है । 

बीते वित्त वर्ष के दौरान, जिन पांच राज्यों ने शराब पर उत्पाद शुल्क से सबसे अधिक राजस्व एकत्र किया, उनमें उत्तर प्रदेश (31517 करोड़ रुपये), कर्नाटक (20950 करोड़ रुपये), महाराष्ट्र (17477 करोड़ रुपये), पश्चिम बंगाल (11873 करोड़ रुपये) और तेलंगाना (10,901 करोड़ रुपये) थे। कई राज्यों में कर से मिले कुल राशि का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा शराब से प्राप्त होता है।

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