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कोरोना से सदन भी घबराया


Parliamentary Business Team
Parliamentary Business Team | 23 Mar, 2020 | 12:00 am

बजट सत्र 2020  का दूसरा चरण अनेक उतार चढाव से गुजरते हुये , निर्धारित अवधि (1 मार्च- 3 अप्रैल ) से पहले ही 23 मार्च को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया।  पूर्व में सदन मे दिल्ली दंगो को लेकर विपक्ष के हंगामे को देखते हुए 6 मार्च- 10 मार्च के लिए सदन स्थगित हुआ था। तत्पश्चात ,11 मार्च से लेकर 20 मार्च तक कर्यवाही सुचारु रूप से चलती रही। जिसमे रेलवे निजीकरण ,फसल एवं किसान बीमा योजना ,   दूरसंचार अधिनियम 2020 ,मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2020 , युवा खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया ,एयरक्राफ्ट अमेंडमेंट बिल 2020 , मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नन्सी अधिनियम 2020 ,बैंकिंग रेगुलेशन संशोधन बिल 2020 ,इंस्टिट्यूट ऑफ़ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेदा जैसे महत्वपूर्ण विषयो पर चर्चा हुई।

Main
Points
केंद्रीय बजट 2020 -21 पर 11 घंटे चर्चा
16 सरकारी विधेयक प्रस्तावित हुए जिनमे 13 विधयक पारित हुए

आज जहाँ एक ओर कोरोना महामारी के चलते देश के अधिकॉंश राज्यों को लाँकडाउन कर दिया गया। वही कोरोना की मार सदन की कार्यवाही को भी  स्थगन के रूप में झेलनी पड़ी। कोरोना महामारी के चलते विपक्षी दल के सांसद  अधीर रंजन चौधरी  और टी.आर बालू ने आर्थिक पैकेज की मांग की। जिसके जवाब में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोरोना को देश की असाधरण स्तिथि बताते हुए तथा सभी सांसदों की मंजूरी के साथ वित्तीय बिल को सदन में पास किया। साथ ही ,केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से ,जिला प्रशासन द्वारा कोरोना के लिए बनाए जाने वाले कानूनों के पालन की अपील भी की।

बजट सत्र के दौरान होने वाली कार्यवाही के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए ओम बिरला ने सदन को बताया कि इस बार केंद्रीय बजट 2020 -21 पर 11 घंटे चर्चा हुई। विभिन्न अनुदानों की मांग पर लगभग 2 घंटे 31 मिनट चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि इस दौरान 16 सरकारी विधेयक प्रस्तावित हुए जिनमे 13 विधयक पारित हुए। नियम 377 के अन्तर्गत 399 मामले उठाए गए। सम्बन्धित 1 हजार 765 प्रपत्र पटल पर रखे गए । इतना ही नही ,महत्वपूर्ण मुद्दो पर 21 धन्टे48 मिनट देर रात्रि तक सदन में चर्चा चली।

अततः लोकसभा अध्यक्ष ने प्रेस , सभी संबधित एजेंसियो और सांसदो  का आभार प्रकट करते हुए अनिश्चित काल के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित किया।

आज भले ही सर्वसम्मति से कोरोना को लेकर फाईनेशियल बिल को  पास कर दिया गया हो । लेकिन ये अपने पीछे कुछ सवाल भी छोड गया  है। जैसे कोरोना से लडने के लिए क्या सरकार को बडा आर्थिक पैकेज घोषित नही करना चाहिए था ? देश मे कोरोना के चलते डाक्टरो, नर्सो,अस्पताल पर बढती जिम्मेदारी को देख कर आर्थिक पैकेज से मदद नही करनी चाहिए थी ? क्या केवल फाइनेशियल बिल को पास कर देने मात्र से कोरोना की रोकथाम के लिए यथासंभव कदम उठाए जा

सकते हैं ? 

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