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कोरोना की जड़ तक पहुंचने के लिए तैयार है पूल टैस्टिंग, जानें कैसे होगा फायदा

नुकसान होते हुए भी पूल टैस्टिंग की क्यों कर रहा ICMR हिमायत। कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते ICMR का कदम, पूल टैस्टिंग करेगी कम किटस् में ज़्यादा संक्रमितों की जांच

Archna Jha
Archna Jha | 17 Apr, 2020 | 10:41 am

देश में प्रतिदिन बढ़ते कोरोना मामलों और उन पर 13 अप्रैल तक केवल 2 लाख नमूनों की जांच हो पाने के बारे में चिन्ता व्यक्त करते हुए 14 अप्रैल को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने सभी प्रयोगशालाओं के लिए पूल टैस्टिंग सबंधी एडवाइज़री जारी की। जिसमें ICMR ने कहा है- “ कोरोना संक्रमण की वर्तमान स्थिति में सभी लैब अपने टैस्टों की संख्या बढ़ाएं , ये पूल टैस्टिंग खासकर सामुदायिक सर्वे और उन लोगों के लिए होगी जिनमें कोरोना के लक्षण नही दिखाई देते हैं। वर्तमान में  पूरे भारत में हर रोज़ केवल 15,000 नमूनों की जाँच ही हो रही है। जिससे कोरोना संक्रमितों का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पा रहा है। इसके लिए ज़रुरी है कि रोज़ 1 लाख तक टैस्ट हों जिससें न केवल लैबों की टैस्टिंग क्षमता बढ़ेगी, समय व कीमत की बचत और मानवश्रम भी कम होगा।”

Main
Points
ICMR का निर्णायक फैसला, कोरोना मामलों के बढ़ते बताई पूल टैस्टिंग की आवश्यकता
एकसाथ हो सकेगी 100 लोगों तक की जांच
उत्तरप्रदेश को मिली ICMR की सबसे पहले मंज़ूरी
किट, समय, कीमत, मेहनत की होगी बढ़ी बचत
केवल 2 प्रतिशत से कम कोरोना पॉज़िटीव मामलों वाले क्षेत्रों में ही हो पाएगा पूल टैस्ट

पूल टैस्टिंग क्या है

पूल टैस्टिंग पोलीमर्स चैन ट्रैन्ज़िशन स्क्रीनिंग ऐल्गोरिदम (RT-PCR) यानि बहुलक श्रृंखला प्रतिक्रिया स्क्रीनिंग पर आधारित है ( जिसका मतलब है हर सैंपल को अलग-अलग पाँच वैज्ञानिक चरणों से गुज़र कर जाना होगा) इस बात को ICMR की सीनियर वैज्ञानिक निवेदिता गुप्ता ने इस प्रकार समझाया है- “पूल टैस्टिंग के ज़रिये हर इंसान की जाँच अलग न होकर एक साथ 100 लोगों को 20-20 लोगों के 5 समूहों में बांट दिया जाएगा, उसके बाद हर एक ग्रुप की जाँच होगी और हर ग्रुप पर 5 से अधिक टैस्ट होंगें, अगर पूरे ग्रुप का रिज़ल्ट पाज़िटिव आता है, तब हर व्यक्ति की जाँच अलग-अलग होगी, रिज़ल्ट नेगेटिव आने के संदर्भ में आगे जाँच नही होगी।”

पूल टैस्टिंग के फायदे

भारत जैसे देश में जहाँ टैस्टिंग किटस् की कमी है, वहाँ यह पूल टैस्ट एक साथ कई लोगों की जाँच कर किटस् की बचत करेगा। इसके अलावा जिन क्षेत्रों से पहले लॉकडाउन हटाने की बात की जा रही है वहां इस प्रकार का टैस्ट काफी फायदा करेगा।

पूल टैस्टिंग का नकारात्मक पहलू

बता दें कि केवल 2% से कम पाज़िटिव वाले क्षेत्रों में ही RT-PCR टैस्ट निर्धारित किये गए हैं। मतलब यदि कोई राज्य या क्षेत्र बहुत ज़्यादा कोरोना प्रभावित है तो वहां यह टैस्ट होना मुमकिन नहीं होगा। साथ ही अगर कोई व्यक्ति सीधे तौर पर किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया है तब पूल टैस्टिंग नही होगी। 

भारत में सबसे पहले अंडमान-निकोबार में पूल टैस्टिंग का इस्तेमाल किया गया था जिसके ज़रिये वहां 11 कोरोना पॉज़िटिव लोगों के बारे में जानकारी मिली। हाल ही  में  ICMR ने उत्तरप्रदेश को भी पूल टैस्टिंग की अनुमति दे दी है। इससे पहले इज़राइल में पूल टैस्टिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल हुआ था जहां एकसाथ 64 सैंपलों को परीक्षण किया जा रहा था।  लेकिन भारत में एकसाथ केवल 5 नमूनों के जाँच की अनुमति दी गई है क्योंकि ICMR के डॉक्टरों का यह मानना है कि अधिक टैस्ट होने पर वैज्ञानिक चरणों से गुज़रते हुए सैंपल पतला हो जाएगा, जिससे टैस्ट करने का फायदा नही होगा। ऐसे में कहा जा सकता है कि यह ICMR  का बेहद उपयोगी निर्णय है।

Tags:
increased   |  corona   |  cases   |  ICMR   |  pooltesting   |  up testfirst

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