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विश्व की आधी आबादी पर आजीविका का संकट: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन

कोरोना वायरस की वजह से उपजे अभूतपूर्व आर्थिक संकट की वजह से दुनिया की लगभग आधी आबादी के ऊपर इस वक्त आजीविका का बड़ा संकट मंडरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार त्वरित कदम उठाने की जरूरत है ताकि अनाधिकारिक क्षेत्र में काम कर रहे कामगारों को संकट से उबारा जा सके और साथ ही साथ उन उद्योगों को भी जिनके पास कोई सहायता उपलब्ध नहीं है।

Manmeet Singh
Manmeet Singh | 01 May, 2020 | 10:16 am

लॉकडाउन की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था ठप पड़ी हुई है। आर्थिक गतिविधियां थम गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मानें तो इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था को 30 ट्रीलियन डॉलर से ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। इसी बीच अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की एक रिपोर्ट नें चिंताएं बढ़ा दी हैं।

Main
Points
आर्थिक मंदी की वजह से विश्व की आजीविका पर बड़ा संकट
1.6 बिलीयन कामगारों की आजीविका पर संकट
काम करने की अवधि में गिरावट की संभावना
अनाधिकारिक क्षेत्र अत्यधिक प्रभावित
वैकल्पिक आय के स्रोत तलाशने की जरूरत

संगठन ने चेतावनी दी है लगातार घटते कार्य समय की वजह से दुनिया के लगभग आधे कार्य बल पर अपनी आजीविका खोने का संकट मंडरा रहा है।

संकट-पूर्व स्तरों (Q4 2019) से तुलनात्मक अध्ययन करने पर  अब 10.5 प्रतिशत की गिरावट अनुमानित है जो 305 मिलियन पूर्णकालिक नौकरियों (48-घंटे के कार्य सप्ताह को मानते हुए) के बराबर है। पिछला अनुमान 6.7 प्रतिशत की गिरावट का था जिसका जो कि 195 मिलियन पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर था। यह लॉकडाउन के प्रसार और विस्तार के कारण है।

काम के घंटों में कमी

लॉकडाउन का नकारात्मक प्रभाव  तो हर देश पर पड़ा है । प्रमुख क्षेत्रीय समूहों के लिए स्थिति खराब हो गई है। यदि काम के घंटों की बात करें तो अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन  की रिपोर्ट का अनुमान है कि अमेरिका में (पूर्व-संकट के स्तर की तुलना में) दूसरी तिमाही में  काम के घंटों में 12.4% की कमी आ सकती है और यूरोप और मध्य एशिया के लिए 11.8 प्रतिशत काम के घंटे कम हो सकते हैं। बाकी क्षेत्रीय समूहों के अनुमान करीब-करीब 9.5 फीसदी से ज्यादा हैं।

अनाधिकारिक अर्थव्यवस्था पर असर

महामारी की वजह से उपजे आर्थिक संकट का सबसे अधिक प्रभाव अनाधिकारिक क्षेत्र में कार्यरत कामगारों पर पड़ा है। इसकी वजह से 1.6 बिलियन कामगारों के ऊपर संकट आन पड़ा है। उनकी आजीविका खतरे में है। विश्व के पूरे कार्यबल से यदि तुलना की जाए जो 3.3 बिलियन है तो यह उसका आधा है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह सभी लोग उस क्षेत्र में काम करते हैं जो लॉकडाउन से अत्यधिक प्रभावित हुए हैं।

कोरोनावायरस की वजह से पैदा हुई अभूतपूर्व स्थिति की वजह से पहले महीने में ही अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों की आय में 60% की गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट की मानें तो अफ्रीका और अमेरिका में 81 प्रतिशत और एशिया और प्रशांत में 21.6 प्रतिशत और यूरोप और मध्य एशिया में 70 प्रतिशत की गिरावट की संभावना है। वैकल्पिक आय स्रोतों के बिना, इन श्रमिकों और उनके परिवारों के पास जीवित रहने का कोई साधन नहीं होगा।

उद्योग पर असर

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर 436 मिलियन से अधिक उद्यमों को गंभीर व्यवधान के उच्च जोखिम का सामना करना पड़ता है। ये उद्यम सबसे कठिन आर्थिक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनमें थोक और खुदरा में कुछ 232 मिलियन, विनिर्माण क्षेत्र में 111 मिलियन, आवास और खाद्य सेवाओं में 51 मिलियन और अचल संपत्ति और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में 42 मिलियन शामिल हैं।

त्वरित कदम उठाने की जरूरत

संगठन के अनुसार स्थिति को ध्यान में रखते हुए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है है। इस वक्त हमें एक ऐसे लचीले कदम की जरूरत है जिससे इन कामगारों की मुश्किलें कम हो सकें और साथ ही साथ छोटे उद्यमों की भी।

आर्थिक पुनर्सक्रियन के लिए उठाए गए कदमों को एक रोजगार-संपन्न दृष्टिकोण का पालन करना होगा, जो कि मजबूत रोजगार नीतियों और संस्थानों और बेहतर-पुनर्जीवित और व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली द्वारा समर्थित होना चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के मुखिया गाए राइडर के मुताबिक ''लाखों श्रमिकों के लिए यह एक बेहद मुश्किल घड़ी है। आय का स्रोत न होने का होने का मतलब सीधे तौर पर न भोजन, न सुरक्षा और न ही भविष्य है। दुनिया भर में लाखों व्यवसाय मुश्किल से सांस ले रहे हैं। उनके पास ना तो बचत और ना ही क्रेडिट की पहुंच संभव है। ये काम की दुनिया के असली चेहरे हैं। यदि हम अभी उनकी मदद नहीं करते हैं, तो ये उद्यम नष्ट हो जाएंगे।”

Tags:
job loss   |  International   |  Labour   |  Organisation   |  Covid-19   |  economiccrisi

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