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कोरोना से लड़ने के लिए 55 देशों को कौन सी दवा देने जा रहा है भारत! जानिए

कोरोना संक्रमण के समय बुखार को कम करने वाली पैरासीटामॉल के निर्यात को भारत सरकार ने हरी झंडी दे दी है। दुनियाभर में कोरोना के बढ़ते मांग को लेकर पैरासीटामॉल की जरुरत पर दुनियाभर से मांग भारत को आ रही थी।

Suyash Tripathi
Suyash Tripathi | 18 Apr, 2020 | 5:26 pm

कोरोना महामारी की वजह से दुनियाभर में हालात बद से बत्तर होते जा रहे हैं, अब तक 22 लाख से ज्यादा लोग इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं। कोरोना से त्रस्त दुनियाभर के तमाम देश इसका तोड़ निकालने में जुटे है, लेकिन अभी तक कोई पुख्ता कामयाबी हाथ नहीं लग पाई है। कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। टेस्टिंग किटस् और प्रतिरोधक दवाईयों की किल्लत होने से कोरोना के खिलाफ लड़ाई की रफ्तार भी धीमी पड़ती नज़र आ रही है। ऐसे में दुनियाभर के देश एक दूसरे की मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं, जिसमें भारत का योगदान अहम है।

Main
Points
वाणिज्य मंत्रालय ने दी पैरासीटामॉल के निर्यात की मंजूरी
पैरासीटामॉल से बनने वाले फॉर्मुलेशंस को दी छूट
55 कोरोनोवायरस प्रभावित देशों की जबरदस्त मांग थी
जुकाम और बुखार में उपयोगी है पैरासीटामॉल
कोरोना के प्राथमिक लक्षणों में शामिल है जुकाम-बुखार

पैरासीटामॉल को लेकर भारत ने खोले दरवाजे

भारत लगातार 55 कोरोनोवायरस प्रभावित देशों को मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति पहले से ही कर रहा है और अब भारत सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के बीच पैरासीटामॉल दवा के फॉर्मुलेशंस के निर्यात को भी मंजूरी दे दी है। वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि, ‘पैरासीटामॉल से बनने वाले फॉर्मुलेशंस (फिक्स्ड डोज मिश्रण) को तुरंत प्रभाव से निर्यात के लिए खोल दिया है। हालांकि पैरासीटामॉल के एक्टिव फार्मा इनग्रेडिएंट (एपीआई) पर निर्यात प्रतिबंध जारी रहेगा।’

कोरोना में पैरासीटामॉल कैसे है सहायक

पैरासीटामॉल एक एनाल्जेसिक और एंटीपायरेटिक ड्रग है जिसका उपयोग दर्द को दूर करने और बुखार को कम करने के लिए किया जाता है। सर्दी, जुकाम और बुखार कोरोना के प्राथमिक लक्षणों में से हैं, जिसमें एनाल्जेसिक और एंटीपायरेटिक ड्रग काफी उपयोगी होती है। पैरासीटामॉल दूसरे एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स के मुकाबले कम नुकसानदायक है। ऐसे में बुखार आने पर पैरासीटामॉल ज्यादा कारगर है।

पैरासीटामॉल का भारत में उत्पादन

भारत दुनिया के जेनेरिक दवाओं के बाजार में एक अग्रणी देश है। हर साल भारतीय जेनेरिक कंपनियां लगभग 17.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की दवाओं का निर्यात करती हैं।  जिसमें सन फार्मास्यूटिकल्स भारत में सबसे बड़ी दवा कंपनी है। भारत हर महीने 5,600 मीट्रिक टन पैरासीटामॉल का उत्पादन करता है, जिसमें से 200 मीट्रिक टन पैरासीटामॉल ही घरेलू आवश्यकता के लिए इस्तेमाल होता है। ऐसे में कोरोना से जंग में पैरासीटामॉल से बनने वाले फॉर्मुलेशंस के निर्यात का फैसला काफी अहम साबित हो सकता है।

क्या है फॉर्मुलेशंस (फिक्स्ड डोज मिश्रण) और एक्टिव फार्मा इनग्रेडिएंट (एपीआई)

फॉर्मुलेशंस (फिक्स्ड डोज मिश्रण) ऐसी दवाइयां होती हैं, जिनकी एक खुराक में दो या दो से अधिक सक्रिय दवाओं का संयोजन होता है। इनको किसी भी मिलते जुलते सक्रिय तत्वों से तैयार किया जा सकता है, जिसके चलते इसके निर्यात से फार्मास्यूटिकल्स कम्पनियों को ज्यादा नुकसान का सामना भी नहीं करना पड़ता है।

एक्टिव फार्मा इनग्रेडिएंट (एपीआई) किसी भी दवा का वह हिस्सा होता है जो इच्छित प्रभाव पैदा करता है। कुछ दवाओं में विभिन्न लक्षणों का इलाज करने के लिए विभिन्न तरीकों से सक्रिय तत्वों ( एक्टिव इनग्रेडिएंट) का प्रयोग किया जाता है। हाल के वर्षों में कई देशों ने लागत में कटौती करने के उद्देश्य से सक्रिय तत्वों के मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया को भी निर्यात करना शुरु कर दिया था। हांलाकि इन दोनों के निर्यात से फार्मास्यूटिकल्स कम्पनियों के मार्केट में कम्पटीशन काफी बढ़ सकता है।

गौरतलब है कि इसके पहले भारत सरकार ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के अलावा 12 दवाओं और 12 एपीआई के निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया था। इन सभी के निर्यात पर 3 मार्च को रोक लगाई गई थी। केंद्र ने एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव करते हुए 26 दवाओं और फॉर्मुलेशन के निर्यात पर रोक लगा दी थी। पैरासीटामॉल, टिनिडाजोल, निओमाइसिन समेत 26 दवाओं और फॉर्मुलेशन पर रोक लगाने का फैसला किया गया था। दवाओं की कमी न हो, इसलिए आवश्यक दवाओं के निर्यात पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन कोरोना के बढ़ते प्रकोप और दुनियाभर में इन दवाईयों की मांग को मद्देनज़र रखते हुए सरकार ने इन दवाईयों के निर्यात को मंजूरी दे दी है।

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Corona   |  Hydroxy   |  chloroquine   |  Paracetamol   |  Indian Govt   |  Exporto fmedicine

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