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अर्थव्यवस्था को संभालेगी शराब, आज से खुलीं दुकानें!

कोरोना वायरस महामारी के चलते अर्थव्यवस्था पर लगे चोट पर भारत सरकार मरहम लगाने में जुटी है।केंद्र सरकार ने प्रदेशों को आज से शराब की बिक्री के लिए मंजूरी दे दी है।लॉकडाउन थ्री में प्रदेशों में एकल शराब और पान की दुकानें शाम 7 बजे तक ही खुलेंगी।

Suyash Tripathi
Suyash Tripathi | 04 May, 2020 | 12:10 pm

कोरोना वैश्विक महामारी से पुरा विश्व लोहा ले रहा है, उसी क्रम में भारत सरकार ने भी देशव्यापी लॉकडाउन को दो हफ्तों यानी 4 मई से लेकर 17 मई तक बढ़ा दिया है। यह लॉकडाउन कई शर्तों और रियायतों को मद्देनजर रखते हुए बढ़ाया गया है, जिसमें शराब की बिक्री भी शामिल है।केंद्रीय गृहमंत्रालय ने लॉकडाउन थ्री में शराब की बिक्री को लेकर दिशानिर्देश जारी किया था, जिसको संज्ञान में रखते हुए कई राज्य सरकारों ने सोमवार 4 मई यानी आज से अपने-अपने प्रदेशों में शराब की बिक्री को मंजूरी दे दी है।सरकार के आदेश के बाद, शराब के ठेकों के बाहर आज सुबह से ही लोगों का जमावड़ा देखने को मिला। लोग लंबी कतार में शराब की दुकान के बाहर खड़े दिखे। 

Main
Points
देश में आज से खुलीं शराब और पान की दुकानें
शाम 7 बजे तक ही खुलेंगी शराब और पान की एकल दुकानें
एक समय में एक दुकान पर सिर्फ 5 व्यक्तियों को शराब खरीदने की अनुमति

किन शर्तों पर खुलीं शराब की दुकानें

लॉकडाउन 3.0 में केवल स्टैंडअलोन शराब और पान की दुकानों को संचालित करने की अनुमति है।कंटेंमेंट जोन और हॉटस्पॉट वाले इलाकों में यह दुकानें नहीं खुलेंगे। शराब और पान स्टैंडअलोन की दुकानें तीनों जोन में शाम 7 बजे तक ही खुलेंगी।सोशल डिस्टेंसिंग को मद्देनजर रखते हुए एक समय में एक दुकान पर सिर्फ पांच व्यक्तियों को शराब खरीदने की अनुमति दी जाएगी।गृह मंत्रालय ने दुकानदारों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि ग्राहक आपस में कम से कम 2 मीटर की दूरी बनाए रखें। मास्क या फेस कवर का उपयोग अनिवार्य होगा।

अर्थव्यावस्था में शराब का योगदान

ऐसे तो शराब को सेहत और सीरत दोनों के लिए हानिकारक माना जाता है लेकिन शराब की बिक्री से जेनेरेट होने वाला राजस्व अर्थव्यावस्था में बहुत बड़ा योगदान देता है। लॉकडाउन के सूरतेहाल में अर्थव्यावस्था पर गहरा चोट पड़ा है, जिसके चलते भारत सरकार ने शराब बिक्री को मंजूरी देने का फैसला लिया है। शराब की बिक्री से वित्त वर्ष 2019-20 में महाराष्ट्र ने 24,000 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश ने 26,000 करोड़, तेलंगाना ने 21,500 करोड़, कर्नाटक ने 20,948 करोड़, पश्चिम बंगाल ने 11,874 करोड़ रुपये, राजस्थान ने 7,800 करोड़ रुपये और पंजाब ने 5,600 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था। दिल्ली ने इस दौरान करीब 5,500 करोड़ रुपये का आबकारी शुल्क हासिल किया था। राज्य के कुल राजस्व का यह करीब 14 फीसदी है।

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