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लॉकडाउन और IITGN का ISAAC फार्मूला

लॉकडाउन की स्थिति में छात्रों के कौशल को विकसित करने के लिए IIT गांधीनगर ने वैज्ञानिक न्यूटन को प्रेरणा बनाकर ISAAC PROJECT की शुरुआत की है।

Archna Jha
Archna Jha | 01 May, 2020 | 1:12 pm

देश में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरे देश में 24 मार्च से लॉकडाउन की स्थिति है। जिसके चलते देश की अर्थव्यवस्था से लेकर, रोजगार और शिक्षण संस्थानों पर विराम लग गया है। शिक्षण संस्थानों की बात करें तो क्क्षाएं निलम्बित हो गई हैं जिसका असर यकीनन बच्चों की पढ़ाई पर भी पढ़ रहा है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि लॉकडाउन की स्थिति में स्टूडेंट्स घर पर बैठकर क्या करें? इसी दिशा में INDIAN INSTITUTE OF TECHNOLOGY (IIT), गांधीनगर ने एक शानदार पहल की है। जिसके चलते उसने अपने स्टूडेंट्स के लिए ISAAC PROJECT शुरु किया है।

Main
Points
ISAAC PROJECT छात्रों में नए कौशल को विकसित कर उनका उज्जवल भविष्य बनाने में सहायक होगा: सुधीर के. जैन, निदेशक,IIT
चार प्रेरणादायक भागों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा
रिवार्ड, प्रोजेक्ट शोकेस, प्राइज़ से छात्रों के कार्य को सराहा जाएगा

क्या हैं ISAAC PROJECT

IIT, गांधीनगर ने अपने स्टूडेन्टस् से कहा है कि वह लॉकडाउन के दौरान उसी तरह नई-नई स्किल्स् डेवल्प करें जिस तरह महान वैज्ञानिक आईज़ैक न्यूटन ने लॉकडाउन के चलते वर्क फ्राम होम के दौरान सीखी थीं। संस्थान का उद्देश्य है कि इस प्रोजेक्ट के ज़रिये स्टूडेंटस् नई-नई स्किल्स् सीखें, जिसका उन्हे भविष्य में लाभ हो। इस बारे में IIT, गांधीनगर के निदेशक सुधीर के. जैन का कहना है कि-“यह प्रोजेक्ट आईज़ैक न्यूटन से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। तब 22 साल के न्यूटन नें घर पर रहकर ही अर्ली कैलकुल्स, थ्योरी ऑफ ऑप्टिक्स, थ्योरी ऑफ ग्रैविटी समेत कई महत्वपूर्ण खोज कर विश्व को बहुत कुछ नया दिया था। दरअसल, 1665 में जब लंदन में प्लेग महामारी का भंयकर प्रकोप था, तब आईज़ैक न्यूटन कैंब्रिज के ट्रिनिट कालेज में पढ़ते थे। तब भी लंदन सरकार ने प्लेग महामारी को फैलने से रोकने के लिए स्कूल-कालेज सब बंद कर दिये गए थे। ऐसे में न्यूटन ने घर पर रह कर ही कईं सफल एक्सपैरिमैंटस् किये थे।

कैसे काम करेगा ISAAC PROJECT

इस प्रोजेक्ट के तहत IIT ने अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है, जिसकी वजह से छात्रों में लेखन, पेटिंग, म्यूज़िक, डिफरेंट डिस्कवरिज़, कोडिंग-डिकोडिंग और रचनात्मक अभिव्यक्ति जैसे नए कौशल विकसित हो पाएंगे। बता दें कि इन प्रतियोगिताओं को चार भागों में बांटा गया है।

पहली प्रतियोगिता कंप्यूटर सांइस के छात्रों के लिए हैं, जिसमें उन्हे 24 घंटे नई-नई प्रोबलम्स् दी जाएंगी जिन्हे कोडिंग के माध्यम से सोल्व करना होगा।

दूसरी प्रतियोगिता का नाम LEADERSHIP CHALLENGE रखा गया है जिसमें छात्रों को TED/TEDX TALK प्लेटफार्म के ज़रिये यह पता करना है कि दुनिया में किस व्यक्ति नें, क्या नया विकसित किया है। इसके पीछे IITGN का उद्देश्य छात्रों में नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करना है।

DON’T QUARANTINE YOUR CORNEA नाम की तीसरी प्रतियोगिता के ज़रिये कहा गया है कि छात्र लॉकडाउन के दौरान जो भी वेब सीरिज़, डाक्यूमेंट्री, मूवीज़ देखें उनके बारे में अपने रिव्यू विकसित करें लॉकडाउन हटने के बाद इन रिव्यूज को न केवल पब्लिश किया जाएगा बल्कि बेस्ट रिव्यू का अवार्ड भी दिया जाएगा।

PROJECT ISAAC SHOWCASE प्रतियोगिता के ज़रिये छात्र अपने भीतर क्रिएटिविटी और इनोवेशन विकसित करेगें, बेहतरीन प्रोजेक्ट को न केवल सराहा जाएगा बल्कि उसे शोकेस कर दुनिया के सामने लाया जाएगा।

लॉकडाउन के चलते घर बैठे छात्र इसमे ऑनलाइन भी भाग ले सकते हैं। IIT गांधीनगर के लगभग 40 प्रतिशत छात्र पहले से ही विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढकर भाग ले रहे हैं। बता दें की संस्थान ने इन प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे स्टूडेंटस् को प्रोत्साहित करने के लिए प्राइज़ और रिवार्डस् भी रखे हैं। इतना ही नही IITGN के पूर्व छात्र और विश्व की अन्य संस्थाओं के छात्र एव शिक्षक इस प्रयास की सराहना करते हुए ISAAC PROJECT को एक प्रेरणादायक प्रोजेक्ट बता रहे हैं। बेशक ही IITGN का यह प्रयास न केवल सराहानीय है बल्कि छात्रों के उज्जवल भविष्य के लिए यह एक सकारात्मक कदम भी है।

Tags:
Lockdown   |  iitgn   |  isaac formula   |  students   |  skills   |  development

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