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प्लाज्मा थेरेपी के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक! जारी है ट्रायल

प्लाज्मा थेरेपी के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं। दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में कोरोना वायरस से बीमार गंभीर मरीजों पर इसका ट्रायल चल रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और डॉक्टर सरीन ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताजा हालात की जानकारी दी।

Manmeet Singh
Manmeet Singh | 24 Apr, 2020 | 5:50 pm

कोरोना वायरस के इलाज के लिए दुनिया के कई देशों में प्लाज्मा थेरेपी पर ट्रायल चल रहा है। इस क्रम में आईसीएमआर ने भी 11 अप्रैल को भारत में इसके इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। केंद्र सरकार ने दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल के गंभीर मरीजों पर इसके ट्रायल को मंजूरी दी थी। इस क्रम में 24 अप्रैल को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डॉक्टर सरीन के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की और हालात की जानकारी दी।

Main
Points
प्लाज्मा थेरेपी के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक
दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में चल रहा है ट्रायल
कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों से प्लाज्मा डोनेट करने का अनुरोध
यह केवल शुरुआती परिणाम स्थाई इलाज नहीं

शुरुआती परिणाम उत्साहजनक

इंस्टिट्यूट ऑफ़ लीवर एंड बिलिअरी साइंसेस (ILBS) के हेड डॉ सरीन ने बताया कि इस थेरेपी  के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं। बीते मंगलवार को चार मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया गया था जिनकी हालत बेहद गंभीर थी। उनमें से 2 मरीजों को आईसीयू से कॉमन वार्ड में शिफ्ट मे कर दिया गया है और संभवतः एक-दो दिन में अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाएगी। बाकी बचे दो मरीजों की हालत में भी सुधार हो रहा है। अरविंद केजरीवाल ने बताया कि ट्रायल आगे भी जारी रहेगा और परिणाम उत्साहवर्धक होंगे तो हम इसे बाकी अस्पतालों में भी इस्तेमाल करने की इजाजत केंद्र सरकार से मांगेंगे।

कौन से हैं तीन चरण

डॉक्टर सरीन ने बताया कि इस वायरस के तीन चरण हैं। प्रथम चरण में वायरस शरीर के अंदर प्रवेश कर विभिन्न अंगों में पहुंचता है। द्वितीय चरण में वायरस फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है और तीसरे और आखिरी चरण में स्थिति गंभीर हो जाती है और वायरस साइटोकीन पैदा करता है जिससे शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं।

प्लाज्मा थेरेपी के फायदे

डॉक्टर सरीन के अनुसार यदि इस थेरेपी का इस्तेमाल दूसरे चरण में पहुंच चुके मरीज पर किया जाए तो उसे ऑर्गन फेलियर से बचाया जा सकता है। यह तकनीक काफी सस्ती है। 1901 में डिप्थीरिया के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता था।

समस्याएं

हमारा शरीर किसी भी बीमारी या वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज बनाता है। ऐसे में प्लाज्मा थेरेपी में उन्हीं लोगों के प्लाज्मा का इस्तेमाल किया जा सकता है जो कोरोना वायरस से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। डॉक्टर सरीन ने बताया कि ऐसे लोगों की भारी कमी है जो कोरोना से ठीक होने के बाद प्लाज्मा का दान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्लाज्मा फोरेसिस में मशीन के इस्तेमाल से खून से सिर्फ प्लाज्मा ही निकाला जाता है और इससे कोई कमजोरी नहीं आती। यदि इंसान चाहे तो 10 दिन के बाद दोबारा प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जानकारी दी कि प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल एक प्राइवेट अस्पताल ने भी किया जिसके बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई।

अनुरोध

मुख्यमंत्री और डॉक्टर सरीन ने कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों से अनुरोध किया कि वह स्वतः अस्पताल आकर प्लाज्मा दान करें जिससे कोरोना वायरस से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों का इलाज सफलतापूर्वक किया जा सके। अरविंद केजरीवाल ने बताया कि उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। अस्पताल आने जाने की पूरी व्यवस्था दिल्ली सरकार करेगी और यह पूर्णतः सुरक्षित है।

नहीं है स्थाई इलाज

अंत में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि यह केवल शुरुआती नतीजे हैं। यह स्थाई इलाज नहीं है। यह खुशी की बात है कि शुरुआती नतीजे उत्साहवर्धक हैं।

Tags:
Corona   |  pc   |  kejriwal   |  plaz matherapy

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